दिल्ली की एक विशेष अदालत ने NDTV के संस्थापक प्रणय रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ दर्ज आपराधिक साजिश के मामले में सीबीआई द्वारा दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। इस मामले में आरोप था कि NDTV के संस्थापकों ने आईसीआईसीआई बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर एक लोन से जुड़े लेन-देन में अनियमितता की थी।
विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने अपनी टिप्पणी में कहा कि सीबीआई की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि रॉय दंपति ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 19(2) का उल्लंघन नहीं किया है। धारा 19(2) के तहत किसी बैंकिंग कंपनी को किसी अन्य कंपनी के शेयर को गिरवी, बंधक या स्वामित्व के तौर पर 30% से अधिक नहीं रखने की अनुमति है।
क्या थे आरोप?
यह मामला संजय दत्त नामक शिकायतकर्ता द्वारा दायर किया गया था, जो कि M/s Quantum Security Pvt. Ltd. के निदेशक हैं। शिकायत के अनुसार, 2008-09 के वित्तीय वर्ष में NDTV के प्रमोटर्स ने RRPR होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर 20% वोटिंग शेयर कैपिटल खरीदने की प्रक्रिया में अनियमितता की। आरोप था कि ICICI बैंक ने 375 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत करते हुए रॉय दंपति की पूरी हिस्सेदारी को गिरवी रख लिया था, जो कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम की धारा 19(2) का उल्लंघन था।
CBI की जांच के निष्कर्ष-
किसी प्रकार की आपराधिक साजिश या मिलीभगत के साक्ष्य नहीं मिले।
ICICI बैंक के अधिकारियों ने लोन पर ब्याज दर को 19% से घटाकर 9.65% करने में किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया।
फोरेंसिक ऑडिट में यह पाया गया कि यह एक सामान्य व्यावसायिक लेन-देन था।
शिकायतकर्ता संजय दत्त ने भी अदालत में बयान दिया कि उन्हें सीबीआई की जांच से संतोष है।
अदालत का फैसला
अदालत ने अपने आदेश में कहा…
“सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद यह स्पष्ट है कि किसी भी आरोपी ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 19(2) का उल्लंघन नहीं किया है। क्लोजर रिपोर्ट संतोषजनक है, इसलिए इसे स्वीकार किया जाता है।”
यह आदेश NDTV और उसके संस्थापकों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है।



