राज्य सभा टीवी में बैक डोर से इंट्री, भर्तियां चोरी-चोरी चुपके-चुपके!

राज्य सभा टीवी ने जनवरी माह में पत्रकारों की भर्ती के लिए जो मैराथन इंटरव्यू आयोजित किये थे उनके परिणाम तो अभी तक घोषित नहीं किये  हैं, लेकिन पिछले दरवाज़े से अपने लोगों के लिए रास्ता ज़रूर खोल दिया है. 

खबर है कि इन दिनों राज्य सभा टीवी में कईं लोगों को चुपके से अपॉइंटमेंट लेटर थमाए जा रहे हैं. ये पूरी प्रक्रिया इतने गुप-चुप तरीके से अंजाम दी जा रही है कि किसी को भी इसकी भनक तक नहीं है. जिन लोगों को लेटर दिए जा रहे हैं वो या तो राज्य सभा टीवी के कर्ताधर्ताओं के नज़दीकी हैं, या फिर कुछ नेताओं और आईएएस लॉबी के ऊंची पहुँच वाले रिश्तेदार. दूसरी तरफ सैकड़ों पत्रकार जो जनवरी माह में इंटरव्यू में शामिल हुए थे वो अभी तक परिणाम की राह देख रहे हैं.  

गौरतलब है कि  जनवरी माह में पत्रकारों की भर्ती के लिए कईं दिनों तक इंटरव्यू के नाम पर औपचारिकता निभाई गयी थी. राज्य सभा टीवी ने प्रोड्यूसर से एडिटर, रिपोर्टर से सीनियर एंकर और तकनीकी विभाग के लिए भी वाक इन इंटरव्यू का आयोजन किया था. ये इंटरव्यू कईं  दिनों तक चले थे जिनमें हज़ारों की संख्या में बेरोज़गार पत्रकारों ने भाग लिया था. जिसमें बड़ी संख्या में महिला पत्रकार भी शामिल थी. लेकिन पूरी प्रक्रिया उस समय विवादों के घेरे में आ गयी थी जब पत्रकारों ने इंटरव्यू में भारी अनियमितता और  गड़बड़ी की आशंका जताते हुए आयोजकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था. 

इसके बाद मामले को शांत करने के लिए अगले चरण के इंटरव्यू सिस्टेमेटिक तरीके से संसद भवन में आयोजित किये गए थे. बावजूद इसके पांच महीने बीत जाने के बाद भी राज्यसभा टीवी ने इंटरव्यू के परिणाम सार्वजनिक नहीं किये हैं। ना ही इस बारे में कोई सूचना राज्यसभा टीवी की वेब साइट पर दी गई.  संसद  का ये चैनल अपनी लांचिंग के  समय से ही वित्तीय अनियमितताओं और नियुक्ति में भ्रष्टाचार को लेकर विवादों में रहा है. पिछले दिनों कैग ने भी राज्य सभा  टीवी में हुई पत्रकारों की नियुक्तियों में भारी भ्रष्टाचार और करोड़ों की वित्तीय अनिमियताओं का खुलासा किया था, बावजूद इसके जनता के पैसों से चलने वाले संसद के इस चैनल में पिछले दरवाज़े से  नियुक्ति पत्र थमाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. जबकि इंटरव्यू में शामिल हज़ारों बेरोज़गार पत्रकार अभी तक परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं. 

आरोप हैं कि चैनल में चयन की पूरी प्रक्रिया में कभी भी कोई पारदर्शिता नहीं बरती गयी. चैनल में भर्ती और चयन की कमान अभी भी उन्हीं लोगों के हाथों में है जिनपर भारी भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप लगे हैं.  आरोप हैं कि  इस सरकारी चैनल में पत्रकारों के चयन के लिए कभी भी कोई निष्पक्ष समिति गठित नहीं की गयी और सुविधानुसार कुछ ख़ास लोगों को लाकर उन्हें ऊँचे पद और वेतन पर प्रमोट कर दिया गया. जिसके चलते पत्रकारों में नाराज़गी बढ़ रही है और पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करने जा रहा है.

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