खुद को पत्रकार बताने में अब ज़बान लड़खड़ाने लगती है!

यूं तो दोस्तों और हमउम्र के जानने वालों के ज़रिए जब यह सवाल पूछा जाता है कि ‘क्या करते हो’ तो मज़दूरी करते हैं जैसे तमाम हल्के जवाबों से उनके सवालों को टाल देता हूं। लेकिन यही सवाल कोई बड़ा (उम्र में), रिश्तेदार, घर में आए मेहमान करते हैं तो ज़बान लड़खड़ाने लगती है, यह …

प्रधानों और ब्लाक-तहसील स्तर के अधिकारियों से उगाही करने वाले पत्रकारों की लिस्ट बनेगी

यूपी के विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने पिछले दिनों विधानसभा में शिकायत की थी कि कई पत्रकार ग्रामीण इलाकों में जाकर प्रधानों को डरा धमका कर उगाही करते हैं. ब्लाक और तहसील स्तर के अफसरों को भी ब्लैकमेल करते हैं. इन पत्रकारों को चिन्हित कर इनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

जि‍न हालातों में इस वक्‍त देश भर के भाषाई पत्रकार हैं, अगर वह भ्रष्‍ट नहीं हैं तो वह अधर्मी हैं!

Rohini Gupte : मेरे एक मि‍त्र सहारनपुर में पत्रकार हुए। सहारनपुर के नहीं थे, मगर नौकरी खींच ले गई। तनख्‍वाह तय हुई साढ़े पांच हजार रुपए महीना, साढ़े तीन सौ रुपए मोबाइल और साढ़े छह सौ रुपए पेट्रोल। मित्र महोदय खुश कि चलो फ्रीलांसि‍ंग से तो पांच हजार का भी जुगाड़ नहीं हो पाता था, यहां कम से कम साढ़े छह मिलेंगे। दि‍ल्‍ली से घर बार बीवी लेकर सहारनपुर पहुंचे और ढाई हजार रुपए में एक कमरा कि‍राए पर लि‍या। आठ दस साल पहले की बात है, ‘सस्‍ते’ का जमाना था। साथ में एक साथी पत्रकार काम करते थे, जि‍नका सहारनपुर में ही गांव था। वो गांव से आने वाली आलू प्‍याज में एक हि‍स्‍सा इन्‍हें भी देते, सो बेसि‍क सब्‍जी का भी खर्च कम हो गया। फि‍र भी बचते बचते महीने की बीस तारीख तक वो पैसे खत्‍म हो जाते, जो लाला हर महीने सात दि‍न देर से देता।

नीमच का एक पत्रकार बता रहा है आजकल की पत्रकारिता की सच्चाई, जरूर पढ़ें

बात दिल की है. कहानी लंबी है. पढ़ेंगे तो जानेंगे ‘मेरी’ हकीकत क्या है… इन दिनों मीडिया का बोलबाला है. मीडियाकर्मी होना बड़ा चार्मिंग लगता है. लेकिन इस व्यवस्था के भीतर यदि झांक कर देखा जाए तो पता चलेगा, जो पत्रकार जमाने के दुःख दर्द को उठाता है, वो खुद बहुत मुश्किल में फंसा है. पत्रकारों को समाज अब बुरे का प्रतीक मानने लगा है. हम कहीं दिख जाएं तो लोग देखते ही पहला सवाल करते हैं- मुस्तफा भाई, खैरियत तो है… आज यहाँ कैसे? यानि यहाँ ज़रूर कुछ झंझट है, इसलिए आये हैं.

नागरिक करे तो जागरूकता, पत्रकार करे तो धौंस

गोविंद गोयल
श्रीगंगानगर। फेसबुक की एक छोटी मगर बहुत प्यारी पोस्ट के जिक्र के साथ बात शुरू करेंगे। पोस्ट ये कि एक दुकानदार ने वस्तु का मूल्य अधिक लिया। ग्राहक ने उलाहना देते हुए वीडियो शूट किया। दुकानदार ने सॉरी करना ही था। हर क्षेत्र मेँ जागरूकता जरूरी है। बधाई, उस जागरूक ग्राहक को। तारीफ के काबिल है वो। लेकिन अगर यही काम किसी पत्रकार ने किया होता मौके पर हँगामा  हो जाता। लोग पत्रकार कि वीडियो बनाते। सोशल मीडिया पर बहुत से व्यक्ति ये लिखते, पत्रकार है, इसलिए धौंस दिखा रहा है। पत्रकारिता की आड़ लेकर दुकानदार को धमका रहा है। चाहे उस पत्रकार को कितने का भी नुकसान हुआ होता। पत्रकार के रूप मेँ किसी की पहचान उसके लिए मान सम्मान के साथ दुविधा, उलझन, कठिनाई भी लेकर आती है। क्योंकि हर सिक्के दो पहलू होते हैं। एक उदाहरण तो ऊपर दे दिया। आगे बढ़ते हैं।

पत्रकारों की उम्र 55 साल होने पर सरकारें इन्हें सत्ता में एडजस्ट करें!

वर्तमान में पत्रकारिता की जो दशा है, उस हिसाब से सरकार को एक उम्र के बाद हर पत्रकार को शासन में एडजस्ट करना चाहिए। दरअसल, आज पत्रकारिता की राह में अनेक बाधाएं आ चुकी हैं। काम का बोझ, तनाव, समस्याएं, अपर्याप्त वेतन तो है ही इसके ऊपर हर वक्त सिर पर नौकरी जाने का खतरा मंडराता रहता है। मुख्य धारा का एक पत्रकार अपने जीवन में इतना परिश्रम और तनाव झेल जाता है कि 50-55 की उम्र के बाद वह किसी काम का नहीं रह जाता है। शायद यही कारण है कि इस उम्र के बाद आज अनेक पत्रकार अपनी लाइन बदलने का असफल प्रयास करते हैं।

रवीश के इस प्राइम टाइम शो को हम सभी पत्रकारों को देखना चाहिए

एनडीटीवी इंडिया पर कल रात नौ बजे प्राइम टाइम शो के दौरान रवीश कुमार ने पत्रकारों की विश्वसनीयता को लेकर एक परिचर्चा आयोजित की. इस शो में पत्रकार राजेश प्रियदर्शी और प्रकाश के रे के साथ रवीश ने मीडिया और पत्रकार पर जमकर चर्चा की.

पत्रकार बंधु जान लें.. आपकी छुट्टी और ड्यूटी टाइम क्या होनी चाहिए

शशिकांत सिंह

कल एक मराठी दैनिक के पत्रकार भाई का फोन आया। उन्होंने बताया प्रबंधन उनसे 9 घंटे ड्यूटी कराता है। क्या करना चाहिए। ऐसे तमाम सवाल पूछे जाते हैं। कुछ के जवाब तुरंत देता हूँ लेकिन कुछ के लिए डॉटा खोजना पड़ता है। दोस्तों आपको बता दें कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट का चैप्टर 3 साफ़ कहता है कि दिन में 6 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं ली जा सकती और चार घंटे से ज्यादा लगातार काम नहीं कराया जा सकता। दूसरी चीज, चार घंटे के बाद कर्मचारी को 30 मिनट का रेस्ट मिलना चाहिए।

बड़े-बड़े अखबारों के प्रतिनिधि असल में पैसे कमाने के लिए ठेकेदारी से लेकर ब्लैकमेल तक के धंधे करते हैं!

Sanjaya Kumar Singh : बदल रहा है पत्रकारों का धंधा… हिन्दी पत्रकारों के बारे में अक्सर यह कहा सुना जाता है कि पत्रकार हैं ये तो ठीक है, गर चलाने के लिए क्या करते हैं? शुरू में यह मजाक लगता था बाद में पता चला कि देश के ज्यादातार हिस्से में बड़े-बड़े अखबारों के प्रतिनिधि असल में पैसे कमाने के लिए ठेकेदारी से लेकर ब्लैकमेल तक के धंधे करते हैं। कहने वाले कह देते हैं कि अंशकालिक संवाददाताओं के धंधे बुलंद होते हैं पर कुछेक अपवाद को नियम नहीं माना जा सकता।

कानपुर में कांग्रेस नेता ने सम्पादक को दी जूतों से मारने की धमकी

कानपुर : स्वतंत्रता दिवस पर शहर में कांग्रेसी नेता अम्बुज शुक्ला द्वारा लगवाई गई त्रुटि पूर्ण होर्डिंग्स के बारे में खबर प्रकाशित करने पर ‘जन सामना’ के सम्पादक श्याम सिंह पंवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। शुक्ला ने कहा है कि ‘जन सामना’ समाचार पत्र का लाइसेन्स जब्त करवा दूंगा। पत्रकार को अपने घर बुलाकर जूते से मारने की दी धमकी। 

बदायूं में पत्रकार पर हमला, कैमरा और मोबाइल तोड़ डाला

बदायूं में कबरेज के दौरान पत्रकार सुनील मिश्रा पर उपद्रवियों ने जानलेवा हमला कर दिया, कैमरा  और मोबाइल तोड़ डाला। सुनील मिश्रा दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, साधना न्यूज, न्यूज नेशन सहित कई संस्थानों में काम कर चुके है।

उ.प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव के लिए कमेटी गठित

लखनऊ : वर्षों बाद उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव के लिए गत दिवस लखनऊ में आपसी सहमति हो जाने के बाद पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। 

प्रदीप सिंह ओपिनियन पोस्ट के चीफ एडीटर बने, ओमप्रकाश अश्क भी जुड़े

बाराखंबा रोड नई दिल्ली से शुरू होने जा रही राष्ट्रीय पाक्षिक पत्रिका ओपिनियन पोस्ट से एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह यहां बतौर प्रधान संपादक जुड़ चुके हैं और संपादकीय टीम का नेतृत्व करेंगे। 

भारत का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सरकार की मर्जी पर !

यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि आज भारतीय मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपने लिए निर्धारित मानदंडों और आचरण संहिता को भूलकर किसी न किसी राजनीतिक दल का अनुयायी या उग्र राष्ट्रवादी संगठनों की तरह व्यवहार करने लगा है। एंकर चीख चीख कर अशोभन लहजे में अपनी परम देश निष्ठा का परिचय दे रहे हैं। अपने अलावा किसी और को बोलने का मौका वे नहीं देना चाहते। खबरों का प्रसारण यहां राजनीतिक मंतव्यों के तहत हो रहा है। 

रघुवर सरकार ने बंद की पत्रकार दुर्घटना बीमा योजना

झारखंड : प्रदेश की रघुवर सरकार ने पत्रकार दुर्घटना बीमा योजना बंद कर दी है। हेमंत सोरेन सरकार ने इस योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत दुर्घटना में मौत होने पर पत्रकार के परिजन को 5 लाख रूपये मिलने का प्रावधान था। 

संदिग्ध हालात में बरामद हुए लापता पत्रकार चयन सरकार

अलीपुरद्वार (सिलीगुड़ी) : संदिग्ध हालात में पत्रकार चयन सरकार के बरामद होने के साथ उनके लापता होने को लेकर तरह तरह की अटकलों पर विराम लग गया। विगत रात यहां के कूचबिहार बस स्टैंड से पुलिस ने उन्हें बरामद किया। जबकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि चार पांच अज्ञात लोग चयन को वाहन से छोड़ गए। शनिवार को सीआइडी ने उन्हें कोर्ट में पेश किया। यद्यपि चयन के लापता और बरामद होने का घटनाक्रम अब भी तरह तरह के सवाल पैदा कर रहा है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि चयन जल्द मिल जाएंगे। 

जब पत्रकार नौकरशाह-मंत्रियों को लड़कियां पहुंचाने लगें तो पत्रकारिता की गरिमा तार-तार होगी ही

गणेश शंकर विद्यार्थी जो अतीत से आज तक और आगे भी मिशन पत्रकारिता के पितामह जाने जाते रहेंगे, गांधी जी भी पत्रकार थे, अटल बिहारी वाजपेयी ने भी पत्रकारिता के गौरव पूर्ण काल के इतिहास को जिया है। लाल कृष्णा आडवाणी भी पत्रकार थे, बाला साहेब ठाकरे भी कार्टूनिस्ट पत्रकार थे लेकिन इन सभी ने कभी भी मिशन पत्रकारिता और उसकी गरिमा पर आंच नहीं आने दी. 

राजेन्द्र माथुर की गैरहाजिरी के 25 साल

किसी व्यक्ति के नहीं रहने पर आमतौर पर महसूस किया जाता है कि वो होते तो यह होता, वो होते तो यह नहीं होता और यही खालीपन राजेन्द्र माथुर के जाने के बाद लग रहा है। यूं तो 8 अगस्त को राजेन्द्र माथुर का जन्मदिवस है किन्तु उनके नहीं रहने के पच्चीस बरस की रिक्तता आज भी हिन्दी पत्रकारिता में शिद्दत से महसूस की जाती है। राजेन्द्र माथुर ने हिन्दी पत्रकारिता को जिस ऊंचाई पर पहुंचाया, वह हौसला फिर देखने में नहीं आता है। ऐसा भी नहीं है कि उनके बाद हिन्दी पत्रकारिता को आगे बढ़ाने में किसी ने कमी रखी लेकिन हिन्दी पत्रकारिता में एक सम्पादक की जो भूमिका उन्होंने गढ़ी, उसका सानी दूसरा कोई नहीं मिलता है।

पत्रकार की पत्नी से डॉक्टर ने की छेड़खानी, रिपोर्ट दर्ज

गाजियाबाद : जिला अस्पताल में जांच कराने पहुंची जर्नलिस्ट की पत्नी से डॉक्टर ने छेड़छाड़ की। पीड़िता ने डॉक्टर पर छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप लगा है। डाक्‍टर ने आरोपों से इनकार किया है। कविनगर पुलिस को दोनों पक्षों ने तहरीर दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मीडियाकर्मियों की मोर्चेबंदी से पकड़ा गया पर्स लुटेरा

इंदौर : तुकोगंज थाने के ठीक सामने एक बदमाश ने 10-10 के नोट सड़क पर फेंके और महिला को झांसा देते हुए उसका पर्स चुराकर भागने लगा। वारदात वहां खड़े दो मीडियाकर्मियों ने देखी। उन्होंने लुटेरे को पकड़ने के लिए करीब आधा किमी दौड़ लगाई। लुटेरे ने हाथापाई की, लेकिन मीडियाकर्मियों ने उसे पकड़कर पुलिस को सौंप दिया।

पुणे में पत्रकारों पर हिंसक भीड़ का हमला, चार घायल

पुणे (महाराष्ट्र) : कामशेत में एक मनसे कार्यकर्ता के मर्डर की रिपोर्टिंग करने गये प्रिन्ट तथा इलेक्टॉनिक मिडिया के रिपोर्टर्स की जमकर पिटाई की गई. हमले में चार पत्रकार घायल हो गये। पत्रकार संगठनों ने घटना पर रोष जताते हुए दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग की है। 

फेसबुक पर आतंकी बनने की इच्छा जताने वाला पत्रकार गिरफ्तार

सोशल साइट फेसबुक पर याकूब मेमन को शहीद बताने वाले पत्रकार जुबैर अहमद खान को वसंत बिहार (दिल्ली) की पुलिस ने मुंबई में गिरफ्तार कर लिया है। जुबेर अहमद खान ने अपनी पोस्ट में इस्लामिक स्टेट में शामिल होने की मंशा भी व्यक्त की थी। 

दक्षिण भारतीय पत्रकार कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में शामिल

मीडिया सूचनाओं के मुताबिक पालाक्‍कड के एक मलयालम समाचारपत्र से इस्तीफा दे चुके एक पत्रकार के कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में सक्रिय होने की जानकारी मिली है।

देहरादून में वरिष्ठ पत्रकार अशोक पांडेय का मकान ढहाया गया

देहरादून : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के निजी सचिव आईएएस मोहम्मद शाहिद का स्टिंग ऑपरेशन करने वाले पत्रकार अशोक पांडेय का घर मंगलवार को मसूरी-देहरादून डिवेलपमेंट अथॉरिटी ने ढहा दिया। स्टिंग में शाहिद राज्य में शराब की बिक्री संबंधी नीतियों को बदलने के लिए रिश्वत की मांग करते दिखाए गए थे।

पत्रकार जगेंद्र हत्याकांड के गवाहों को बचाना जरूरी : आईपीएस अमिताभ

लखनऊ : शाहजहांपुर के दिवंगत पत्रकार जागेंद्र सिंह के बेटे के अचानक मंत्री राममूर्ति वर्मा के पक्ष में बयान देने के बाद आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस मामले में जागेंद्र के लड़कों सहित सभी गवाहों की रक्षा करने और सच्चाई सामने लाने के लिए राज्य सरकार को उपयुक्त माहौल बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया है।

फोटो पत्रकार की हत्या, अपार्टमेंट में मिले पांच लोगों के शव

मैक्सिको की एक खोजी पत्रिका प्रोसेसो के मुताबिक मैक्सिको सिटी में एक अपार्टमेंट में पांच लोगों के शव मिले, जिनमें एक फोटो पत्रकार का शव भी है। फोटो पत्रकार रूबेन एस्पिनोसा शुक्रवार से लापता थे और शनिवार दोपहर उनके परिवार के सदस्यों ने उनकी पहचान की। उनके शरीर पर दो जगह गोली लगने के निशान थे।

डीएम ने मुर्गा न बनने पर पत्रकार की बाइक पुलिस को सौंप दी

बाराबंकी (उ.प्र.) : जिलाधिकारी ने सरेआम मामूली सी बात पर कल सुबह 10.21 बजे डीएम ऑफिस मोड़ पर ‘क्राइम रिब्यू’ के पत्रकार रामशंकर शर्मा को पहले मुर्गा बनने को कहा। ऐसा न करने पर पुलिस को बुलाकर पुनः दबाव बनाया। 

हल्द्वानी में पत्रकार गौरव गुप्ता और दानिश खान का सम्मान

हल्द्वानी। समूह ग पेपर के लीक होने के मामले में खोजी पत्रकारिता करने वाले देवभूमि पोलखोल समाचार पत्र के सम्पादक गौरव गुप्ता व रामनगर के संवाददाता दानिश खान को जिलाधिकारी दीपक रावत और उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने हल्द्वानी में शाल ओढ़ाकर व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। 

पत्रकार रमा पांडे को ब्रिटने का ‘भारत गौरव सम्मान’

बीबीसी की पूर्व पत्रकार और जानी मानी समाचार वक्ता रमा पांडे को लंदन में उनके जीवन भर की उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। रमा पांडे को पत्रकारिता व सामाजिक कार्यों के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट ने भारत गौरव सम्मान से सम्मानित किया। वह भारत की जानी मानी पत्रकार के साथ-साथ कवियित्री, कलाकार और एक्टिविस्ट हैं।

होशियार ! साजिश का शिकार हो सकता है मजीठिया मामला

भरोसेमंद सूत्रों से पता चला है कि मजीठिया मामले में गंभीर साजिश रची जा रही है। समझ में नहीं आ रहा है कि किस पर भरोसा किया जाए और किस पर नहीं। कुछ लोग व्‍यक्तिगत लाभ के लिए अखबार मालिकों के हाथों की कठपुतली बने हैं। वे सुप्रीम कोर्ट में भ्रम पैदा कर सकते हैं और मजीठिया का केस खराब कर सकते हैं। 

ऋषिकेश जागरण के पत्रकार हरीश तिवारी को मातृ-शोक

ऋषिकेश : दैनिक जागरण के पत्रकार हरीश तिवारी की मां भगवती देवी का देहावसान हो गया। कुछ समय से बीमार भगवती देवी (89) अपने पीछे तीन पुत्र, पुत्री का भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. देवीदत्त तिवारी की धर्मपत्नी भगवती देवी के निधन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत अनेक पत्रकारों, सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने शोक व्यक्त किया है।

लखनऊ के डीएम की चमचागिरी में खबर चुराने की खुल गई पोल

कभी-कभी अफसरों की चमचागिरी भी भारी पड़ जाती है. ऐसा तब देखने को मिला, जब ‘समाचार प्लस’ के पत्रकार आलोक पाण्डेय ने लखनऊ के डीएम की चमचागिरी में अपने अखबार ‘द मिड डे एक्टिविस्ट’ में  एक खबर लिखी और ग्रुप में डाल दी. पलक झपकते ही एक अन्य पत्रकार ने अपनी खबर लगाते हुए कहा कि यह खबर तो उसकी है. आलोक ने चमचागिरी के लिए उसकी खबर हूबहू कॉपी करके छाप दी है. इस पोस्ट के बाद तो आलोक को साप सूंघ गया.

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह को चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि पत्रकारिता पुरस्कार

दिल्ली : राज्यसभा टीवी के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह को कृषि पत्रकारिता के शिखर सम्मान ‘चौधरी चरण सिह राष्ट्रीय कृषि पत्रकारिता पुरस्कार 2014’ से सम्मानित किया गया है। इलेक्ट्रानिक मीडिया श्रेणी में यह पुरस्कार पटना में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 87वें स्थापना दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदान किया। इस समारोह में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह, बिहार के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और देश के अनेक शीर्ष कृषि वैज्ञानिक मौजूद थे। 

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह का सम्मान करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

खौफनाक : डर-डर कर दिन बसर कर रहे पाकिस्तान के मशहूर टीवी पत्रकार हामिद मीर

सवाल बनता है कि क्या कोई पत्रकार हमारे देश भी हमीद मीर की तरह अपनी हिफाजत को लेकर इस कदर अपनी जिंदगी में दो चार हो रहा है।, शायद नहीं। तो फिर क्यों नहीं? क्यों कि हमारे देश में जनपक्षधरता के मसले पर अपनी अलोकतांत्रिक हरकतों के लिए कुख्यात नेताओं वाली सरकारों और सिर्फ पैसे के भूखे मीडिया घरानों को चला रहे पत्रकारों में कोई फर्क नहीं दिखता है। हमीद मीर इन दिनो डरे हुए हैं। वह अपना डर ‘वाशिंगटन पोस्ट’ से साझा करते हैं। वह अपनी हिम्मत और बेबाकी के नाते पाकिस्तान के टीवी मीडिया में शीर्ष हैसियत रखते हैं। उन पर एक बार आतंकवादी अटैक हो चुका है। वह आईएसआई की चेतावनी के बावजूद पीछे नहीं हटे। अब उन्हें अपनी जिंदगी की हिफाजत सता रही है। हमारे देश के मीडिया पर तो बड़ा सीधा सा फार्मूला लागू होता है कि जब कर नहीं, तो डर किस बात का। यानी जब कोई हिम्मत का काम कर गुजरे, तभी तो….हमारे यहां तो पत्रकारों का एक बहुसंख्यक धड़ा मंत्रियों, अफसरों की दलाली में जुटा रहता है।  

प्रेस काउंसिल अध्यक्ष ने कहा – पत्रकारों पर हमला संज्ञेय अपराध, पांच साल सजा होनी चाहिए

दिल्ली : प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन न्‍यायमूर्ति सीके प्रसाद ने कहा है कि आंकड़ों के हिसाब से पत्रकारों पर हमले की घटनाएं बढ़ी नहीं हैं। पीसीआई की एक उप समिति ने इस तरह की धममियों से निपटने के लिए कानून संबंधी अपनी सिफारिशें दे दी हैं। पत्रकार पर उसके काम को लेकर किया गया हमला काफी गंभीर मामला है। इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में लाया जाना चाहिए। हमने इस अपराध के लिए पांच साल की सजा की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया को भी पीसीआई के तहत लाया जाना चाहिए।

मध्य प्रदेश में 15 अगस्त से पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा योजना

भोपाल : मध्यप्रदेश सरकार ने पत्रकारों के लिए दुर्घटना बीमा योजना लागू करने की घोषणा की है। प्रदेश के जनसंपर्क एवं ऊर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया है कि मध्यप्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना 15 अगस्त से लागू की जाएगी।  स्व. महेन्द्र चौधरी स्मृति राज्य-स्तरीय फोटो पत्रकारिता सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष से राज्यस्तर के साथ-साथ आंचलिक फोटो पत्रकारिता को भी पुरस्कृत किया जायेगा।

महाराष्ट्र सरकार जल्द बनाएगी पत्रकार सुरक्षा कानून का प्रारूप

मुंबई : विधानपरिषद में विरोधी पक्ष नेता धनंजय मुंडे ने कहा कि पिछले तीन साल में राज्य भर में करीब 265 पत्रकारों पर हमले हुए। उन पर झूठे आरोप लगाकार मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उनकी हत्या हो रही है। सरकार बिना देरी किए पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कड़ा से कड़ा कानून बनाए।

कभी उमा तो कभी शिवराज-सुषमा के पैर पड़े सीहोर का महाचाटुकार पत्रकार

सीहोर (म.प्र.) : हाल ही में राज्य सरकार से सम्मानित एक पत्रकार ने केंद्रीय मंत्री उमा भारती के पैर पड़ कर बोले कि दीदी आपके आशीर्वाद से मुझे मध्य प्रदेश सरकार ने सराहा है। ये पत्रकार सुषमा स्वराज या शिवराज सिंह चौहान के भी इस क्षेत्र में आने पर इसी तरह की शर्मिंदा करने वाली हरकतें करता रहता है। वे जब तक क्षेत्र में रहेंगे, उनके आगे-पीछे घूमता रहेगा। 

आरा शहर की एक लड़की दो साल तक बहेलिए पत्रकार की बाहों में

जिंदगी के कैसे-कैसे रंग दिखाती है यह कमबख्त फेसबुक। अभी थोड़ी देर पहले विदेश में रहने वाले फेसबुक मित्र राजीव जजवालिया का संदेशा आया। कैसे आरा शहर की एक लड़की अपने सपनों को पूरा करने के वास्ते शहर का रुख करती है। महुआ टीवी में नौकरी मिलती है..ख्वाबों को पर लग जाते हैं..। उगते परों को पहचान शातिर पत्रकार करीब आता है..दोस्त बन सहलाता है। फिर ले उड़ता है। दो साल तक यह लड़की बहेलिए पत्रकार की बाहों में झूलती हुई कुछेक भोजपुरी फिल्मों में छोटे मोटे काम भी करती है। रंगीन दुनिया में अपने वजूद को तलाशती हुई बेफिक्र रहती है..क्योंकि हमदर्द बहेलिया जो साथ था.. 

अब पूरे देश में एक लाख की जमानत और इजाजत के बिना पत्रकारों के जेल में प्रवेश पर पाबंदी

केंद्र सरकार ने विशेष अनुमति के बगैर पत्रकारों और फिल्म निर्माताओं के जेल में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव कुमार आलोक ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखा है कि किसी भी पत्रकार, एनजीओ या कंपनी के कर्मचारी को शोध करने, डॉक्यूमेंटरी बनाने, लेख लिखने या साक्षात्कार लेने के लिए जेल में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

सेक्स रैकेट में पत्रकारों के लिप्त होने की जांच कराएंगे एसएसपी

रविवार को ग्रेटर नोएडा के चाई सेक्टर में चल रहे सेक्स रैकेट मामले में पुलिस और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कुछ पत्रकारों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिन दो इलेकट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों का नाम लिया जा रहा है, दलालों द्वारा दी गयी पूरी बाइट में कहीं भी उन पत्रकारों के रैकेट में शामिल होने की पुष्टि नहीं की गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई गाइड लाइंस के अनुसार पुलिस कभी भी किसी आरोपी की बाइट थाने में नहीं कराती, फिर भी पुलिस ने उनकी बाइट करायी, जिसमें पत्रकारों द्वारा बार-बार पूछे जाने पर भी दलालों ने पत्रकारों द्वारा संरक्षण की बात कहीं नहीं बोली। उसके बावजूद पुलिस ने दो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों के नाम फर्द में डाल दिये। जबकि पुलिस को पहले जांच करनी चाहिए थी। 

पत्रकार आयोग के गठन पर विचार करेगी बिहार सरकार

विक्रमगंज (रोहतास) : पत्रकारों की मांग पर बिहार सरकार ने नियमावली में संशोधन कर, पत्रकार आयोग के गठन और कैशलेस मेडिक्लेम दुर्घटना बीमा योजना लागू करने सहित 18 सूत्री मांगों को संज्ञान लिया है। बिहार वर्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन के संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार दुर्गेश किशोर तिवारी ने बताया कि सरकार के संज्ञान लेने से आंचलिक पत्रकारों में हर्ष व्याप्त है। –

यूपी में एक और पत्रकार पुलिस की साजिश का शिकार, पीजीआई में भर्ती

सहारनपुर (उ.प्र.) : एसओ के खिलाफ खबर लिखना पत्रकार को इतना मंहगा पड़ गया कि उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। दुष्कर्म का मुकदमा कायम होने के बावजूद थानाध्यक्ष ने आरोपी को छोड़ दिया था। पीड़ित पत्रकार की तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, उल्टे धमकाया कि नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहना। पुलिस के इशारे पर कस्बे के एक नेता ने पत्रकार पर अटैक कर दिया। उनके दो दांत टूट गए, जबड़े में फ्रैक्चर हो गया, आंख घायल हो गई, खून की दो उल्टियां हुईं। वह पीजीआई में भर्ती हैं।  

Veteran journalist Allah Bux died

Veteran journalist Allah Bux died . Mr. Bux who had been in the field of journalism for more than 50 years, serving for Daily Thanthi suffered breathlessness and died here around 2.30 p.m. He was 78 years old and he is survived by his wife Mumtaj and son Abul Kalam Azad, Daily Thanthi reporter. Bux entered the field of journalism at a very young age soon after completing the Pre University Course (PUC).

मुंबई में महिला पत्रकार को छेड़ने वाला ऑटो चालक दबोचा गया

मुम्बई : कुर्ला में रहने वाली महिला पत्रकार से छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद आरोपी ऑटोचालक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी रमेश कुमार त्रिलोदर को विनोवा भावे नगर थाने की एक टीम ने कुर्ला क्षेत्र से दबोचा।  

धनबल के दबाव में अमेठी के सीओ ने पत्रकार के खिलाफ अदालत में पेश कर दी झूठी विवेचना

शुकुल बाजार (अमेठी) :  सिधौली ग्राम पंचायत के बाहुबली, आरोपी प्रधान ने अपने समर्थकों के साथ पहले तो पत्रकार सुरजीत यादव और उनके भाई सुरेश यादव पर जानलेवा हमला किया। जब मामला पुलिस तक पहुंचा तो उल्टे पत्रकार के ही खिलाफ कोर्ट को रिपोर्ट दे दी गई। पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि सीओ ने सही रिपोर्ट लगाने के बदले 50 हजार रुपए मांगे थे। न देने पर उल्टी चाल चल दी।   

घटनास्थल का एक दृश्य, जिसमें पुलिस के सामने लाठियों से लैस दिख रहा हमलावर पक्ष

बलात्‍कारी, उगाहबाज, ठग और धोखेबाज गिरोह से पत्रकार हेमन्‍त तिवारी की गलबहियां

लखनऊ: देहरादून की युवती के साथ बलात्‍कार और उगाही के आरोपी वरिष्‍ठ पत्रकार की पहुंच समझनी हो तो आइये। इस फोटो को निहारिये, और फिर आपको अपने आप ही पता चल जाएगा कि बलात्‍कार, ठगी, उगाही, धोखाधड़ी जैसे जघन्‍य अपराधों और अपराधियों की असल शरण-स्‍थली क्‍या और कहां है।

उत्तर प्रदेश के भ्रष्ट नेताओं और अफसरशाहों के तलवे मत चाटो मीडिया के दलालों : अनूप गुप्ता

लखनऊ : वरिष्ठ पत्रकार अनूप गुप्ता ने पिछले दिनो दलाल पत्रकारों को ललकारते हुए एक धरना-प्रदर्शन के दौरान कहा कि जब पत्रकार की हत्या होती है, हमारे बीच से ही भाड़ और दलाल तत्व सत्ता प्रतिष्ठान के तलवे धोने पहुंच जाते हैं। ऐसा नहीं होता तो किसी माई के लाल में नहीं थी कि जगेंद्र …

झारखंड सरकार का विज्ञापन 20 (जे) का तोड़, श्रमायुक्‍त ने पेश की नजीर

राम ए यादव : साथियों, सुप्रीम कोर्ट के 28 अप्रैल 2015 के आदेश के आलोक में झारखंड, रांची के श्रमायुक्‍त ने नजीर पेश की है। उन्‍होंने श्रमजीवी पत्रकार (सेवा की शर्तें) और प्रकीर्ण उपबन्‍ध अधिनियम  1955 के उपखण्ड 20 (जे) के संदर्भ में विज्ञापन देकर सभी साथियों के मन से खौफ और भ्रम को दूर कर दिया है। विज्ञापन में स्‍पष्‍ट उल्‍लेख किया गया है कि सभी साथी इस एक्‍ट के तहत मजीठिया वेजबोर्ड के अनुसार वेतन, एरियर, ग्रेच्युटी आदि पाने के अधिकारी हैं। बेशक संस्‍थान (समाचार पत्र या मैग्‍जीन) ने मजीठिया को लेकर उनको धोखे में रखकर या जबरन किसी डाक्‍यूमेंट (कागजात) पर हस्‍ताक्षर क्‍यों न करवा रखा हो।

 

पत्रकार को जान से मारने की धमकी, गाली-गलौज

बिलासपुर : वरिष्ठ पत्रकार रविवार डॉट कॉम के संपादक आलोक प्रकाश पुतुल को गत दिनो फोन पर एक युवक ने जान से मारने की धमकी दी। पुतुल ने सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। 

मुंबई में एक पत्रकार की हत्या, एक अगवा और एक की हालत गंभीर

मुंबई : महानगरी में आज एक पत्रकार की हत्या कर दी गई। अन्य दो पत्रकारों पर जानलेवा हमला कर उन्हे गंभीर रूप से जख्मी कर दिया गया. उनमें एक पत्रकार को अगवा कर लिया गया है, उसका कोई अता-पता नहीं है। एक पत्रकार को गंभीर हालत में हास्पिटल में भर्ती कराया गया है। 

मुंबई में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों के खिलाफ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करते पत्रकार

मुंबई में विस्फोट की कवरेज करने पहुंचीं महिला पत्रकारों पर हमला

मुंबई में दो महिला पत्रकार समेत तीन पत्रकारों को बुरी तरह से पीटा गया. मुंबई के सांताक्रुझ में गोलीबार इलाके में एक गैस सिलिंडर का विस्फोट हुआ. इस दुर्घटना को कवर करने प्रिन्ट और इलेक्टॉनिक मिडिया के रिपोर्टर तथा कैमरामैन घटनास्थल पर पहुंच गये. पत्रकार अपना काम कर रहे थे. इतने में कुछ असामाजिक तत्वों ने हाथों में चप्पल लेकर एबीपी माझा की रिपोर्टर मनश्री तथा टीवी-9 की कविता और श्रीकांत शंखपाल को पीटना शुरू कर दिया. 

पत्रकारों पर हमले रोकने के लिए क़ानूनी प्रावधान जरूरी : प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया

नई दिल्ली : पत्रकारों पर लगातार बढ़ रहे हमलों पर अब प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने गंभीर रुख अपनाया है। पीसीआई की तरफ से गठित एक सब-कमेटी ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कानून बनाने की सिफारिश की है। किसी भी पत्रकार पर हमले को एक संज्ञेय अपराध मानने और कठोर दंड प्रावधान को जरूरी माना गया है। कमेटी के सिफारिशों को पीसीआई ने मंजूर कर लिया है। यह सब कमेटी 2011 में स्थापित की गई थी, जिसने 11 राज्यों मे जाकर शीर्ष सरकारी अधिकारियों और पत्रकार संघों से चर्चा की। इसकी रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 से 2015 के बीच भारत मे 80 पत्रकारों की हत्या हुई। सब कमेटी ने कहा है कि पीसीआई को सभी राज्यों को उच्च शक्ति वाली समितियां बनाने का निर्देश देना चाहिए। जिनमें पत्रकारों की संस्थाओं का प्रतिनिधित्व हो और वे पत्रकारों पर हमलों के इन सभी मामलों पर हो रही जांच पर निगरानी रखें।

थाने में चैन की बंसी बजा रहे पत्रकार संदीप के हत्यारोपी, परिजनों ने दी खुदकुशी की चेतावनी

बालाघाट (म.प्र.) : पत्रकारों का जैसा हाल उत्तर प्रदेश में, वैसा ही कमोबेश मध्य प्रदेश में भी। पिछले दिनों निर्ममता से मौत के घाट उतारे गए पत्रकार संदीप कोठारी के हत्यारोपियों को पुलिस कटंगी थाने में वीआईपी की तरह सेवाएं दे रही है। लॉकप के बाहर आराम से कूलर की हवा में पलंग पर आरोपी सोते देखे गए। संदीप के परिजनों का कहना है कि ऐसी स्थिति में पुलिस से उचित कार्रवाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है। पुलिस का यही रवैया रहा तो वो सामूहिक आत्महत्या कर लेंगे। 

पत्रकार साथियों कायर न बनो, भागो नहीं, मीडिया को बदलो, ताकत का एहसास कराओ

प्रिय पत्रकार साथियों, आए दिन सुना जा रहा है कि मीडिया प्रबन्धन या संपादकों की मोनोपोली के चलते हमारे साथी त्याग पत्र देकर भाग रहे हैं। युद्ध क्षेत्र से भागना कायरता है और कायर व बुजदिल सैनिक को सम्मान नहीं मिलता बल्कि उसकी आने वाली पीढ़ी को भी समाज के अपमान का सामना करना पड़ता है। हमारे साथी जिस समस्या से आजिज आकर त्याग पत्र देकर मीडिया से दूर होना चाहते हैं, क्या वे मीडिया से दूर रह कर अपने न्याय की लड़ाई लड़ सकते हैं? 

महिला पत्रकार ने घर में घुसकर स्वतंत्र पत्रकार की मां को पीटा, रिपोर्ट दर्ज

वाराणसी : यहां के एक प्रातः कालीन प्रतिष्ठित अखबार में कार्यरत महिला पत्रकार वंदना सिंह के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोप यह है कि उन्होंने अपने दो भाइयो के साथ अपने ही क्षेत्र के निवासी स्वतंत्र पत्रकार विपिन मिश्रा के घर में घुसकर उनकी माँ धनेश्वरी देवी के साथ मारपीट व गाली गलौज किया। थाना चौक इंस्पेक्टर प्रकाश गुप्ता ने मामले को जाँच में सही पाते हुए तत्काल आई पी सी की धारा 323, 504  के तहत महिला पत्रकार व उनके दोनों भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया ।

पत्रकार संदीप कोठाऱी हत्याकांड का मुख्य आरोपी गिरफ्तार

बालाघाट जिले के बैहर में खरीदी गई जमीन के सौदे में की गई दलाली और बाद में जमीन में भागीदारी बनाये जाने की चाहत के कारण ही संदीप कोठारी एवं कथित आरोपियों के बीच हुई अनबन के चलते उसकी हत्या कर दी गई। इस घटनाक्रम का मास्टर माइंड राकेश नर्सवानी अब पुलिस की गिरफ्त में है। उसे पुलिस द्वारा 8-9 जुलाई की मध्य रात्रि बोनकटा के समीप परसवाडा घाट से घेराबंदी कर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वह परिवारजनों से मिलने कटंगी पहुंचने की फिराक में था। 

वाह रे चाटुकारिता, कप्तान की दावत में छलके जाम, पत्रकार हुए मदहोश

मऊ (उत्तरप्रदेश) : प्रदेश में पुलिस द्वारा पत्रकारों पर जुल्म ढाए जा रहे हैं, कही पत्रकार की माँ को पेट्रोल डालकर फूंका जा रहा है तो कही पत्रकार को जिन्दा जलाया गया। चारो तरफ पत्रकारों में प्रशासन को लेकर गुस्सा है, कही प्रोटेस्ट मार्च किया जा रहा तो कही पत्रकार सुरक्षा अधिनयम बनाने की मांग हो रही। पत्रकारो का एकजुट होना तो दूर, यहां के पत्रकार सोमवार को सभी मर्यादाओं को लांघकर पहुंच गए कप्तान की दावत में। जमकर जाम छलकाए गए। 

समाजवादी पत्रकार दाह-संस्कार योजना, सूचना विभाग ने लागू की गाइड लाइन

लखनऊ। पत्रकारों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों से हत-आहत लोगों के लिए एक नायाब राहत योजना शुरू की गई है। सूचना विभाग द्वारा लागू की गई इस योजना का नाम “उप्र समाजवादी पत्रकार दाह संस्कार एवं राहत योजना” दिया गया है। इस योजना को उप्र मान्यता पत्रकार समिति के शीर्ष पदाधिकारियों के निर्देशन में संपादित किया जाएगा, जिसको विभिन्न जिलों में समिति द्वारा चयनित पुलिस अफसरों द्वारा लागू किया जायेगा। 

पत्रकारिता में ज्यादातर बड़े नाम वाले दिल के गंदे, दिमाग से कमीने!

एक भुग्तभोगी महिला पत्रकार की आपबीती : बहुत दिनों से दिल दिमाग परेशान है। करीब दो हफ्तों से। पहली नजर में आपको ये मेरी लाचारी या व्यक्तिगत मामला लग सकता है। बहुत आम बात भी लग सकती है क्योंकि समाज ऐसा ही है।  लेकिन ये बेचैनी, ये घुटन हर उस लड़की की हो सकती है, यशवंत जी, जो बिना किसी समझौते के अपने रास्ते बनाना चाहती है। ये सब लिखने से बहुत दिनों से खुद को रोक रही थी मगर आज नहीं लिख पाई तो शायद सो नहीं पाऊंगी।

आखिर क्यों मारे जा रहे पत्रकार

जी हां, बलातकार, दिनदहाड़े हत्या, घपले-घोटाले, अवैध खनन आदि घटनाओं को उजागर व आरोपी को जनता के सामने लाकर बेनकाब करना अगर गुनाह है तो कोई बात नहीं, लेकिन अगर सच है तो फिर इनकी बखिया उधेड़ने वाले पत्रकारों की क्यों सिलसिलेवार हत्याएं हो रही है। आखिर इसकी छानबीन क्यों नहीं हो पा रही है। आखिर क्यों इन घटनाओं में संलिप्तों के आरोपों की जांच में लगे आफिसरों की ही रिपोर्ट को सही मान लिया जाता है, जिसके बारे में जगजाहिर है कि वह अपने दोषी अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट देना तो दूर जुबा तक नहीं खोलेंगे, फिर इन्हीं भ्रष्ट अधिकारियों से क्यों दोषियों की जांच कराई जाती है 

अक्षय सिंह की मौत पर वरिष्ठ पत्रकारों की त्वरित प्रतिक्रियाएं

आजतक के पत्रकार अक्षय सिंह की संदिग्ध हालात में हुई मौत पर देश के वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने अपने एफबी वाल पर त्वरित टिप्पणियां की हैं, इनमें दो वरिष्ठ पत्रकार आज तक से जुड़े रहे हैं। टिप्पणियां इस इस प्रकार हैं – आज तक से जुड़े रहे चर्चित पत्रकार दीपक शर्मा ने लिखा – स्टिंग …

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री बाबूलाल गौर को पत्रकारों की चिंता नहीं

भोपाल : वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पत्रकारों पर हो रहे हमले से चिंतित है और उनके मन में है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिये भी कानून बने। वहीं प्रदेश के गृहमंत्री बाबूलाल गौर ने जबलपुर में कहा कि पत्रकार आम नागरिक है। गौर साहब भूल गये कि देश में पत्रकारों को चौथा स्तंभ कहा जाता है।

मैक्सिको में दो और पत्रकारों की गोली मारकर हत्या

मैक्सिको : दक्षिणी मैक्सिको में रेडियो स्टेशन से बाहर निकलते समय एक पत्रकार को गोली मार दी गई, जबकि पूर्वी राज्य में दूसरे पत्रकार की हत्या कर दी गई।

बुलंदशहर में सहारा के पत्रकार पर सपा नेता का हमला, नाक तोड़ी, सिर फोड़ा

बुलंदशहर (उ.प्र.) : यहां पिछले दिनों राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार विपिन शर्मा पर सपा नेता ने अपने बेटों के साथ हमला कर उनकी लाठी-डंडों से पिटाई कर दी। उनका सिर फोड़ दिया। पत्रकार की नाक की हड्डी भी टूट गई। उनसे हमलावर 1.18 लाख रुपए और सोने की चेन भी लूट ले गए।

वरिष्ठ पत्रकार एम जे अकबर बने भाजपा के राज्यसभा सांसद

रांची : झारखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए गुरुवार को हुए उपचुनाव में भाजपा के वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर ने भारी जीत हासिल की। उन्होंने विपक्षी झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी को 29 के मुकाबले 48 मतों से पराजित किया।

‘आउटलुक’ की महिला पत्रकार को धमकियां

हैदराबाद : ‘आउटलुक’ पत्रिका ने एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के खिलाफ कथित अपमानजनक और आपत्तिजनक आलेख से पैदा हुए विवाद के बाद अपने संवाददाता को धमकी मिलने के मद्देनजर अब पुलिस का रूख किया है।

गिद्धों से घिरे वक्त में अब आ रही सोशल मीडिया के मोरचे पर डटे पत्रकारों की परीक्षा की घड़ी

हर आरोप जो केजरीवाल पर सुबह टी वी और सोशल मीडिया पर चेपा जाता है शाम होते होते दम तोड़ देता है या बैताल की तरह पुन: उलटकर बीजेपी कांग्रेस पर चिपक जाता है । कल सुबह सुर्ख़ियों में था कि केजरीवाल के मुख्यमंत्री आवास का दो महीने का बिल एक लाख से कुछ ज़्यादा आया है, मामला चटपटा था और प्रथम दृष्टिया “आपियन्स” को बेचैन करने वाला था ।

गाजियाबाद में एसओ ने पत्रकार का कैमरा छीना, मारापीटा, पीएम और सीएम से कार्रवाई की फरियाद

‘सतर्क दृष्टि’ के संपादक तौसीफ हाशमी ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, यूपी के मुख्यमंत्री, गाजियाबाद के एसएसपी, डीआईजी मेरठ जोन, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, मानवाधिकार आयोग, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया एवं गृह मंत्रालय भारत सरकार को प्रेषित पत्र में एक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए पर्दाफाश किया है कि किस तरह पुलिस देह व्यापार को संरक्षण दे रही है। उन्होंने विजयनगर क्षेत्र (गाजियाबाद) में मुस्लिम नाबालिग लड़की को बेचे जाने के आरोपों की जांच करा कर विजयनगर थाने के एसओ व अन्य पुलिसकर्मियों या दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

रोते क्यों हो दुनिया के पहरेदारों

भारत में कुछ स्वयंभू हितैषी और संगठनों को छोड़ दें, तो ना तो पत्रकारों का कोई अधिकृत संगठन है और ना ही उनके हितों की रक्षा करने वाली कोई संस्था। लेकिन पत्रकारों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाने वाली अमेरिकी संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट ने पिछले दिनों एक सूची जारी की थी। इसमें उन देशों को शामिल किया गया है जहां हाल फिलहाल में या तो पत्रकारों पर हमले बढ़ गए हैं या नियमित होते रहते हैं। सूची में शामिल पहले 15 देशों में भारत भी मौजूद है। भारत 11वें स्थान पर है। जबकि पहले भारत 14वें स्थान पर था। इससे साफ जाहिर हो जाता है कि भारत में पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं। ये बेहद अफसोसनाक स्थिति है। जो मीडिया, देश-दुनिया का ठेका लिए बैठा है, खुद वो असुरक्षित होते जा रहा है। मीडिया में काम करने वालों में हमेशा असुरक्षा की भावना बनी रह रही है।

दैनिक जागरण मेरठ में भगदड़, कई गए, कई जाने को तैयार, भ्रष्टाचार में डूबे चापलूसों की चांदी

मेरठ दैनिक जागरण इन दिनों अस्‍थिरता और संक्रमणकाल से गुजर रहा है। हालात ऐसे बन पड़े हैं कि काम करने वाले गंभीर पत्रकार जागरण मेरठ को नमस्‍ते करने को मजबूर हैं। जहां कई संजीदा पत्रकार जागरण को अलविदा कह चुके हैं, वहीं कई नए-पुराने काबिल कर्मचारी भी यही राह पकड़ने की असमंजस में हैं। मालिकान और उनके शीर्ष सहयोगियों की अयोग्यता अब यहां के मीडिया कर्मियों के सिर चढ़ कर बोलने लगी है। भ्रष्ट चापलूसों से ज्यादातर कर्मी आजिज आने लगे हैं। 

पत्रकार धीरज पाण्डेय को सच्ची श्रद्धांजलि

प्रिय पत्रकार साथियों, 

साथियों मेरी जानकारी में सम्बन्धों का तात्पर्य संवेदना से है। अमर उजाला बस्ती के ब्यूरो चीफ धीरज पाण्डेय के साथ जो भी हुआ, वह अप्रत्याशित ही सही परन्तु बेहद खेद जनक एवं दुखदायी है। बड़े ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि जिस संस्था से वे सात वर्षों तक जुड़े रहे दुघर्टना के बाद उस परिवार का कोई भी जिम्मेदार सदस्य उन्हे अस्पताल में देखने तक नहीं गया। बीस दिनों तक जिन्दगी और मौत से लड़ने के बाद 25 जून 2015 को अन्तिम सांसे लीं। 

बिहार के पत्रकार कुमार अविनाश का असामायिक निधन

डी डी न्यूज़ नई दिल्ली प्रोग्राम से जुड़े बिहार के पत्रकार कुमार अविनाश का असामायिक निधन हो गया है। 26 को इनके बड़े भाई कुमार आलोक जो वरीय संवाददाता हैं, डी डी न्यूज़ में पटना से टूर समाप्त कर दिल्ली वापस गए थे। अविनाश से मैं मिला नहीं हूँ, लेकिन 19 जून की रात में …

नशीला दूध पिलाकर रेप करने का आरोप लगाया महिला पत्रकार ने

हरिद्वार में एक महिला पत्रकार ने युवक पर नशीला पदार्थ पिलाकर उसका बलात्कार करने का आरोप लगाते हुए नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। दूसरी ओर युवक ने भी खुद को पीड़ित बताते हुए तहरीर दी है। दिल्ली की रहने वाली महिला पत्रकार साप्ताहिक अखबार निकालती हैं। उनका कहना है कि भूपतवाला की गंगाधाम धर्मशाला में वह ठहरती हैं। इसी दौरान उनकी पहचान प्रबंधक अमरनाथ के पुत्र चिराग शर्मा से हो गई।

अनशन पर बैठी महिला पत्रकार का घर ढहाया, पति समेत गिरफ्तार कर जेल में डाला

छत्तीसगढ़ : उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश में पत्रकारों को जलाकर मार दिये जाने की घटनाओं के बीच छत्तीसगढ के रायगढ़ जिले के खरसिया की महिला पत्रकार आरती वैष्णव के संघर्ष को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। भ्रष्ट सीएमओ के खिलाफ आवाज उठाने वाली आरती वैष्णव को पहले तो अपना अजन्मा बच्चा खोना पड़ा, उसके बाद लगातार धमकियों का सामना करना पडा।जब कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई तो आरती और उनके ​पति ने महिला सीएमओ के खिलाफ आमरण अनशन शुरू कर दिया। इसे भी तुड़वाने की प्रशासन की तरफ से भरपूर कोशिश की गई लेकिन कल तो​हसीलदार द्वारा किया गया वायदा तोड़ दिया गया। वो भी कुछ इस रूप में कि पहले तो अनशनरत आरती को उनके पति के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। उनका घर जेसीबी से ढहा दिया गया।

फिर वहीं पर जीमेंगे जागेन्‍द्र सिंह की तेरहवीं का भोज

देख्‍यौ भइया, तेवरिया ऐण्‍ड कम्‍पनी वालों ने तो शाहजहांपुर में जिन्‍दा फूंक डाले गये जागेन्‍द्र सिंह वाला मामिला को 20 लाख रूपया में डन ( नक्‍की-पक्‍का ) कराया था। सरकार और अफसरों के सामने डींगें खूब मारी थी कि,” यह बड़ा मुश्किल काम है। आजकल पत्रकार खुद को बहुत ईमानदार बनते हैं। ऐसे में इन पत्रकारों को सेट करना बड़ा मुश्किल होता है। खुद की छवि की भी बलि देनी पड़ती है।”

सवाल सिर्फ यह है कि क्या संदीप पत्रकार था ?

यह मप्र है, यहां सबकुछ शांति और सद्भाव के साथ होता है। व्यापमं घोटाले में 28 आरोपियों की मौत हो गई फिर भी शांति है। डीमेट घोटाले में दायें से बायें तक सब के सब फंसे हैं। कुल 5500 फर्जी डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं, फिर भी चारों ओर शांति है। पत्रकार संदीप कोठारी हत्याकांड हो गया, तो क्या हुआ, शांति तो शांति ही है। कोई आवाज नहीं उठा रहा। उल्टा पुलिस मरने वाले को ही कुछ इस तरह दोषी ठहरा रही है मानो मौत तो उसका मुकद्दर ही थी। जो हुआ, वही होना था। 

पत्रकार संदीप हत्याकांड की भी सीबीआई जांच से एमपी सरकार का इनकार, जांच एसआईटी को

बालाघाट (म. प्र.) : पत्रकार संदीप कोठारी को अगवा कर जिंदा फूंक देने की घटना की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दी गई है। दो आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। तीसरे फरारी पर 30 हजार का इनाम घोषित हो गया है। संदीप के भाई नवनीत का कहना है कि उनके भाई की हत्या में खनिज, भूमाफिया का हाथ है। इस मामले की केद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए। इस मांग को राज्य के गृहमंत्री बाबू लाल गौर ने नकार दिया है। कोठारी तीन वर्ष पूर्व एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार थे, वर्तमान में भी वे लेखन का कार्य किए जा रहे थे। आरोपियों का चिटफंड, खनन सहित अन्य कारोबार है। कोठारी इन आरोपियों की गतिविधियों के खिलाफ समाचार लिखते रहे हैं।

व्हाट्सअप ने पत्रकारों को किया एकजुट, घेर लिया सीएम का घर

2008 के आस -पास पहली बार सोशल साइट्स पर कदम रखा था। एक आईटी कंपनी में बतौर एसोसिएट कंटेन्ट क्रिएटर लैपटॉप ऑन करने के बटन को दबाने से मैंने आईटी के इस मकड़जाल को धीरे –धीरे सीखा था। सबसे पहले ऑर्कुट फिर ब्लॉग फिर फेसबुक। तीन साल तक फेसबुक पर अपडेट रहने के कई फायदे हुए। लोगों से जान पहचान हुई और पत्रकारिता जगत में इंट्री भी इसी के माध्यम से हुई। इसलिए आज के व्हाट्सअप तुरत फुरत के जमाने में भी फेसबुक को दिल से जुदा करने का मन नहीं होता लेकिन अब व्हाट्सअप पर क्रांति दौड़ रही है।

कैमूर में पत्रकारों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पुतला फूंका, धरना

भभुआ (बिहार) । कैमूर ज़िला पत्रकार संघ ने यूपी के पत्रकार जगेंद्र सिंह की जघन्य हत्या तथा पीलीभीत के पत्रकार हैदर खान पर सरकारी गुंडों द्वारा किये गए कातिलाना हमले के विरोध में ज़िला समाहरणालय पर एक दिवसीय धरना दिया और सभा की। उसके बाद यू पी के मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव का पुतला दहन किया तथा डी एम के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को अपनी मांग को लेकर ज्ञापन दिया।

कैमूर जिला मुख्यालय पर अखिलेश यादव का पुतला दहन करते पत्रकार

सवाल और आह्वान : जगेन्द्र तो मर गए, क्या आप जिंदा हैं !

लखनऊ : पत्रकार दोस्तों, जगेन्द्र सिंह के जिंदा जलाकर मार दिए जाने के बाद उनका परिवार अब बिखर चुका है। बीबी-बच्चे सड़क पर आ गए हैं और अचानक जिंदगी की छोटी-मोटी जरूरतों तक के लिए भी वे दूसरों पर मोहताज हो गए हैं। आप सभी जानते हैं कि इस स्थिति में आपका अपना परिवार भी कभी भी पहुंच सकता है, यदि आप ईमानदारी से अपनी पेशेगत जिम्मेदारी निभा रहे हैं तो। हालांकि वो लोग जरूर सुरक्षित हैं जिनमें पेशेवाराना ईमानदारी नहीं है और जो छोटी-छोटी खबरों पर भी समझौते कर लेते हैं।

 

पत्रकार को छोड़ने के लिए जर्मनी से अल जजीरा की गुजारिश

दोहा : अल जजीरा ने जर्मनी से आग्रह किया है कि वह उसके पत्रकार अहमद मंसूर को तुरंत रिहा कर दे। अहमद मंसूर को मिस्र के अधिकारियों की मांग पर बर्लिन हवाईअड्डे पर हिरासत में ले लिया गया है।

खुलेआम पत्रकारों को धमकी, चाहे जो भी हो, सच्चाई तो छपेगी

सुना है सिवनी में अब ब्लेकमेलर पत्रकार भी पैदा हो गये हैं जो पहले यदा-कदा ही देखने को मिलते थे। नगर का एक मिड डे अखबार (राष्ट्रचंडिका नही) जो लोगों की वाणी कहलाता था जिस पर अब ब्लेकमेलिंग का धब्बा लग गया है। यूं तो सिवनी में ऐसे भी पत्रकार है जिनके पास अखबार न होते हुए भी वह डंके की चोट में वसूली अभियान चलाते हैं। राष्ट्रचंडिका ने पहले भी कई ऐसे पत्रकारों के काले कारनामें सामने लायें हैं जिनका कोई वजूद (अखबार) ही नहीं है। ऐसे पत्रकारों को हम ‘छोटे कद के’ पत्रकार कहेंगे जिनका कद वास्तविकता में लंबा क्यों न हो लेकिन पत्रकारिता में छोटे कद के नाम से ही जाने जायेंगे।

विवेचना पत्र में पुलिस ने पत्रकार संदीप कोठारी को भी सजायाफ्ता अपराधी करार दिया

पत्रकार संदीप कोठारी हत्या कांड के संबंध में मध्य प्रदेश के कटंगी थाने की पुलिस को दी प्राथमिक सूचना में ललितकुमार राहगडाले ने बताया है कि वह 19 जून को रात साढ़े 12 बजे बाइक से बालाघाट से संदीप के साथ आ रहे थे। आगासी रेलवे क्रासिंग के कुछ दूर एक सफेद रंग की कार नंबर एमएच40केआर 2255 ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। कार को ब्रजेश डहरवाल चला रहा था। कार में दो लोग और बैठे हुए थे। बाइक गिराने के बाद वे तीनो संदीप कोठारी को अपहृत कर बालाघाट की ओर ले गए। 

संदीप हत्याकांड में दबोचे गए दो आरोपी

मुंबई में वरिष्ठ पत्रकार आलोक भट्टाचार्य का निधन

मुंबई : प्रख्यात कवि पत्रकार, साहित्यकार आलोक भट्टाचार्य का शनिवार रात डोंबिवली के नवजीवन अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे पिछले एक साल से बीमार चल रहे थे। वह अपने पीछे पत्नी, पूत्र और पूत्रवधू का भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं। उनके निधन पर मुंबई के पत्रकारो में शोक की लहर है। 

पत्रकार आकार पटेल एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के नए प्रमुख बने

पत्रकार और लेखक आकार पटेल एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के नए कार्यकारी निदेशक, भारत में एमनेस्टी इंटरनेशनल के कामकाज के प्रभारी हो गए हैं। संगठन के मुख्य राजनीतिक सलाहकार, रणनीतिकार और प्रवक्ता के रूप में वह एमनेस्टी के भारत में लक्ष्य को दिशा देंगे। पटेल ने कहा है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के साथ काम करने को लेकर मैं स्वयं को गौरवान्वित और सम्मानित महसूस कर रहा हूं।

यूपी में कहर जारी, दरोगा ने पत्रकार को गांव वालों के सामने दौड़ा दौड़ा कर पीटा, जेल भेजा

अमेठी : दरोगा ने पत्रकार को गांव वालों के सामने दौड़ा दौड़ा कर पीटा। फिर बाल पकड़कर घसीटते हुए जीप में डाल ले गया थाने। फर्जी धाराओं में जेल भेज दिया। 

जगेन्द्र हत्याकांड पर लखनऊ में पत्रकार संगठन ऐसे खामोश क्यों?

पूरे उत्तर प्रदेश में, लगभग हर जनपद में पत्रकार संगठन मौत के घाट उतारे गए पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवार का साथ दे रहे हैं तथा आन्दोलनरत हैं, परन्तु लखनऊ के कई पत्रकार संगठन बिलकुल मौन हैं। सहायता करना तो दूर, यहां तक कि जगेन्द्र सिंह में ही कमियां गिनाते फिर रहे हैं। उन्हें याद रखना चाहिए कि पति/पिता की मृत्यु का दर्द उसकी निर्बल विधवा तथा अनाथ हुए बच्चे ही जान सकते हैं और आज उत्तर प्रदेश के माहौल में यह दिन किसी अन्य का भी आ सकता है। पिछले दस दिनों में तीन पत्रकारों पर हमले हुए हैं, यह अच्छा संकेत नहीं है।

जालंधर ‘पंजाब केसरी’ को पत्रकारों की आवश्यकता

हिंदी समाचारपत्र दैनिक ‘पंजाब केसरी’ को जालंधर यूनिट के लिए सब एडिटर, चीफ सब एडिटर एवं डिप्टी न्यूज एडिटर पदों पर पत्रकारों की आवश्यकता है। वेतन योग्यता के अनुसार दिया जाएगा। इच्छुक पत्रकार फोन नंबर 9592916993 पर संपर्क करने के साथ ही punjabkesari.hr@gmail.com पर अपना बायोडाटा मेल कर सकते हैं।   

पत्रकारों पर हमले के विरोध में हाथरस प्रेस क्लब ने जुलूस निकाला

हाथरस : शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र को जिंदा जलाकर हत्या करने और कानपुर, बस्ती व पीलीभीत में हुए पत्रकारों पर जालनलेवा हमले के विरोध में हाथरस प्रेस क्लब के पत्रकार भी सड़कों पर उतर पड़े। मौन जुलूस निकालकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन एसडीएम सदर को सौंपा।

पत्रकारों पर हमले के विरोध में जुलूस निकालते हाथरस प्रेस क्लब के पत्रकार

झारखंड में पत्रकारों का धरना, जगेंद्र के परिजनों को 50 लाख देने की मांग

कोडरमा (झारखण्ड) : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पत्रकार जगेन्द्र सिंह की हत्या को लेकर कोडरमा जिले के पत्रकारों ने समाहरणालय परिसर में सांकेतिक धरना दिया। इसके पहले सूचना भवन स्थित पत्रकार सदन में पत्रकारों ने शोक सभा भी की और पत्रकार जगेन्द्र सिंह की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। धरना प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों ने गजेन्द्र की हत्या के आरोपी मंत्री राममूर्ति वर्मा और पुलिस कर्मियों को बर्खास्त कर उन्हें जेल भेजने, मृतक पत्रकार के परिजनों को 50 लाख रुपया मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। 

शोक सभा और धरना में शामिल पत्रकार

जगेंद्र हत्याकांड के खिलाफ सड़क पर उतरे जौनपुर के पत्रकार, धरना-प्रदर्शन

जौनपुर : जनपद के पत्रकारों ने शाहजहांपुर के साथी जगेन्द्र सिंह की गत दिवस की गयी निर्मम हत्या के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान जहां पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट परिसर में घूमकर प्रदेश सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की, वहीं पुतला फूंकने के बाद मुख्यमंत्री के नाम सम्बोधित 4 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर मजिस्ट्रेट धर्मेन्द्र सिंह को सौंपा। 

 

जौनपुर कलेक्ट्रेट में धरना-सभा को सम्बोधित करते वरिष्ठ पत्रकार कैलाशनाथ : छाया-कुमार कमलेश

पत्रकारों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा : अनुमंडल पत्रकार संघ

जादूगोड़ा के पत्रकारों के सम्मान समारोह के दौरान घाटशिला अनुमंडल के सभी पत्रकारों ने एक स्वर मे कहा की पत्रकारों पर अब और अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जब भी किसी पत्रकार पर किसी प्रकार की मुसीबत आएगी, सभी पत्रकार एक जुट होकर उसका मुक़ाबला करेंगे। पत्रकारों पर हमला काफी चिंताजनक है। पत्रकारों को हमेशा मजबूती एक रहना पड़ेगा।

जादूगोड़ा के पत्रकारों के सम्मान समारोह की एक झलक

खगड़िया में पत्रकार पर लाठी से हमला, जान बची, दो चाचा घायल

खगड़िया (बिहार) थाना क्षेत्र के बौरने गांव के रहने वाले पत्रकार रणवीर कुमार सिंह पर जानलेवा हमला किया गया लेकिन वह बाल-बाल बच गए। हमलावरों ने उनके दो चाचा को लाठी-डंडे से पीट-पीट कर घायल कर दिया। रणवीर सिंह ने अपने गांव के ही संतोष कुमार, रितेश कुमार एवं उमेश्वर सिंह के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई है।

कानपुर में पत्रकार को गोली मारने वाले दो हमलावर पुलिस ने दबोचे

कानपुर में पत्रकार दीपक मिश्रा को गोली मारने वाले दो हमलावरों दो आरोपियों सचिन पांडेय और मोहनीश उर्फ जीतू पांडेय को पुलिस ने नौबस्ता के हंसपुरम क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। तीसरे आरोपी राजा पांडेय को पुलिस तलाश रही है। 

हम शर्मिन्दा हैं लेकिन हमें शर्म नहीं आती

सुनते आये हैं जो आया है वो जाएगा भी। सभी को जाना है लेकिन किस तरह से ? क्षमा करेंगे, एक और चला गया, पहले भी कई गए हैं। एकता के नारे लगाये जा रहे हैं। हक़ और बदले की भी बातें हो रहीं। कोई कम तो कोई ज्यादा आक्रमक भी है, जमात के लोग अपने अपने अंदाज में अपने अपने झंडे भी बुलंद कर रहे हैं। परिणाम की सुधि किसे है, ये बड़ा प्रश्न हो सकता है।

पत्रकारों की शहादत, बेशर्म सियासत

सारी दुनिया में पत्रकारों के सिर पर 24 घंटे मौत का साया मंडराता रहता है। कलम पर हमले जारी हैं। भारत के कई राज्यों में स्थिति बेहद संवेदनशील है। खासकर उत्तर प्रदेश में पत्रकार बेखौफ होकर काम नहीं कर पा रहे हैं। सत्ता और कानून के पहरेदारों (पुलिस) की संगीने हर पल कलम का पीछा कर रही हैं। बात अस्सी के दशक से शुरू करते हैं। मैं ग्रुजुएशन करके निकला था। दिल्ली के नवभारत टाइम्स, दिनमान और असली भारत के अलावा बांदा से छपने वाले दैनिक मध्ययुग, कर्मयुग और बम्बार्ड में लिखने लगा था। इस दशक की वो काली तारीख अब मुझे याद नहीं है, जब बबेरू कस्बे में तत्कालीन दरोगा अरुण कुमार शुक्ला के इशारे पर भुन्नू महाराज एंड कंपनी ने दैनिक जागरण कानपुर के तत्कालीन संवाददाता और मध्ययुग के संपादक सुरेशचंद गुप्ता की दिनदहाड़े लाठियों से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। वर्ष जरूर मुझे याद है-1983। सुरेश चंद गुप्ता का कुसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने पुलिस के फर्जी एनकाउंटर की रिपोर्ट छापी थी।

यूपी का इतिहास पत्रकारों की लाश पर नहीं लिखने देंगे, हर पत्रकार जगेंद्र बनेगा

उत्तर प्रदेश  में पत्रकारों पर हमले बढ़ रहे हैं। पहले शाहजहाँपुर के जगेंद्र सिंह को जिन्दा जला कर मार दिया गया। फिर कानपुर में पत्रकार दीपक मिश्रा को पांच गोलियां मारी गयीं। साफ़ है कि अगर पहली घटना में अखिलेश सरकार तुरंत कार्यवाही करती तो कानपुर की घटना की पुनरावृत्ति नहीं होती। पहली घटना  में आरोपी मंत्री और पुलिस कर्मियों पर प्रभावी कार्यवाही न होने से माफिया के हौसले और बढ़ गए और उन्होंने एक और पत्रकार को  निशाना बना दिया। अब जगेंद्र की तरह दीपक मिश्रा के हमलावर भी गिरफ्तार नहीं हुए।