खुद को पत्रकार बताने में अब ज़बान लड़खड़ाने लगती है!

यूं तो दोस्तों और हमउम्र के जानने वालों के ज़रिए जब यह सवाल पूछा जाता है कि ‘क्या करते हो’ तो मज़दूरी करते हैं जैसे तमाम हल्के जवाबों से उनके सवालों को टाल देता हूं। लेकिन यही सवाल कोई बड़ा (उम्र में), रिश्तेदार, घर में आए मेहमान करते हैं तो ज़बान लड़खड़ाने लगती है, यह …

प्रधानों और ब्लाक-तहसील स्तर के अधिकारियों से उगाही करने वाले पत्रकारों की लिस्ट बनेगी

यूपी के विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने पिछले दिनों विधानसभा में शिकायत की थी कि कई पत्रकार ग्रामीण इलाकों में जाकर प्रधानों को डरा धमका कर उगाही करते हैं. ब्लाक और तहसील स्तर के अफसरों को भी ब्लैकमेल करते हैं. इन पत्रकारों को चिन्हित कर इनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. कृपया हमें अनुसरण करें …

जि‍न हालातों में इस वक्‍त देश भर के भाषाई पत्रकार हैं, अगर वह भ्रष्‍ट नहीं हैं तो वह अधर्मी हैं!

Rohini Gupte : मेरे एक मि‍त्र सहारनपुर में पत्रकार हुए। सहारनपुर के नहीं थे, मगर नौकरी खींच ले गई। तनख्‍वाह तय हुई साढ़े पांच हजार रुपए महीना, साढ़े तीन सौ रुपए मोबाइल और साढ़े छह सौ रुपए पेट्रोल। मित्र महोदय खुश कि चलो फ्रीलांसि‍ंग से तो पांच हजार का भी जुगाड़ नहीं हो पाता था, यहां कम से कम साढ़े छह मिलेंगे। दि‍ल्‍ली से घर बार बीवी लेकर सहारनपुर पहुंचे और ढाई हजार रुपए में एक कमरा कि‍राए पर लि‍या। आठ दस साल पहले की बात है, ‘सस्‍ते’ का जमाना था। साथ में एक साथी पत्रकार काम करते थे, जि‍नका सहारनपुर में ही गांव था। वो गांव से आने वाली आलू प्‍याज में एक हि‍स्‍सा इन्‍हें भी देते, सो बेसि‍क सब्‍जी का भी खर्च कम हो गया। फि‍र भी बचते बचते महीने की बीस तारीख तक वो पैसे खत्‍म हो जाते, जो लाला हर महीने सात दि‍न देर से देता।

नीमच का एक पत्रकार बता रहा है आजकल की पत्रकारिता की सच्चाई, जरूर पढ़ें

बात दिल की है. कहानी लंबी है. पढ़ेंगे तो जानेंगे ‘मेरी’ हकीकत क्या है… इन दिनों मीडिया का बोलबाला है. मीडियाकर्मी होना बड़ा चार्मिंग लगता है. लेकिन इस व्यवस्था के भीतर यदि झांक कर देखा जाए तो पता चलेगा, जो पत्रकार जमाने के दुःख दर्द को उठाता है, वो खुद बहुत मुश्किल में फंसा है. पत्रकारों को समाज अब बुरे का प्रतीक मानने लगा है. हम कहीं दिख जाएं तो लोग देखते ही पहला सवाल करते हैं- मुस्तफा भाई, खैरियत तो है… आज यहाँ कैसे? यानि यहाँ ज़रूर कुछ झंझट है, इसलिए आये हैं.

नागरिक करे तो जागरूकता, पत्रकार करे तो धौंस

गोविंद गोयल
श्रीगंगानगर। फेसबुक की एक छोटी मगर बहुत प्यारी पोस्ट के जिक्र के साथ बात शुरू करेंगे। पोस्ट ये कि एक दुकानदार ने वस्तु का मूल्य अधिक लिया। ग्राहक ने उलाहना देते हुए वीडियो शूट किया। दुकानदार ने सॉरी करना ही था। हर क्षेत्र मेँ जागरूकता जरूरी है। बधाई, उस जागरूक ग्राहक को। तारीफ के काबिल है वो। लेकिन अगर यही काम किसी पत्रकार ने किया होता मौके पर हँगामा  हो जाता। लोग पत्रकार कि वीडियो बनाते। सोशल मीडिया पर बहुत से व्यक्ति ये लिखते, पत्रकार है, इसलिए धौंस दिखा रहा है। पत्रकारिता की आड़ लेकर दुकानदार को धमका रहा है। चाहे उस पत्रकार को कितने का भी नुकसान हुआ होता। पत्रकार के रूप मेँ किसी की पहचान उसके लिए मान सम्मान के साथ दुविधा, उलझन, कठिनाई भी लेकर आती है। क्योंकि हर सिक्के दो पहलू होते हैं। एक उदाहरण तो ऊपर दे दिया। आगे बढ़ते हैं।

पत्रकारों की उम्र 55 साल होने पर सरकारें इन्हें सत्ता में एडजस्ट करें!

वर्तमान में पत्रकारिता की जो दशा है, उस हिसाब से सरकार को एक उम्र के बाद हर पत्रकार को शासन में एडजस्ट करना चाहिए। दरअसल, आज पत्रकारिता की राह में अनेक बाधाएं आ चुकी हैं। काम का बोझ, तनाव, समस्याएं, अपर्याप्त वेतन तो है ही इसके ऊपर हर वक्त सिर पर नौकरी जाने का खतरा मंडराता रहता है। मुख्य धारा का एक पत्रकार अपने जीवन में इतना परिश्रम और तनाव झेल जाता है कि 50-55 की उम्र के बाद वह किसी काम का नहीं रह जाता है। शायद यही कारण है कि इस उम्र के बाद आज अनेक पत्रकार अपनी लाइन बदलने का असफल प्रयास करते हैं।

रवीश के इस प्राइम टाइम शो को हम सभी पत्रकारों को देखना चाहिए

एनडीटीवी इंडिया पर कल रात नौ बजे प्राइम टाइम शो के दौरान रवीश कुमार ने पत्रकारों की विश्वसनीयता को लेकर एक परिचर्चा आयोजित की. इस शो में पत्रकार राजेश प्रियदर्शी और प्रकाश के रे के साथ रवीश ने मीडिया और पत्रकार पर जमकर चर्चा की.

पत्रकार बंधु जान लें.. आपकी छुट्टी और ड्यूटी टाइम क्या होनी चाहिए

शशिकांत सिंह

कल एक मराठी दैनिक के पत्रकार भाई का फोन आया। उन्होंने बताया प्रबंधन उनसे 9 घंटे ड्यूटी कराता है। क्या करना चाहिए। ऐसे तमाम सवाल पूछे जाते हैं। कुछ के जवाब तुरंत देता हूँ लेकिन कुछ के लिए डॉटा खोजना पड़ता है। दोस्तों आपको बता दें कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट का चैप्टर 3 साफ़ कहता है कि दिन में 6 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं ली जा सकती और चार घंटे से ज्यादा लगातार काम नहीं कराया जा सकता। दूसरी चीज, चार घंटे के बाद कर्मचारी को 30 मिनट का रेस्ट मिलना चाहिए।

बड़े-बड़े अखबारों के प्रतिनिधि असल में पैसे कमाने के लिए ठेकेदारी से लेकर ब्लैकमेल तक के धंधे करते हैं!

Sanjaya Kumar Singh : बदल रहा है पत्रकारों का धंधा… हिन्दी पत्रकारों के बारे में अक्सर यह कहा सुना जाता है कि पत्रकार हैं ये तो ठीक है, गर चलाने के लिए क्या करते हैं? शुरू में यह मजाक लगता था बाद में पता चला कि देश के ज्यादातार हिस्से में बड़े-बड़े अखबारों के प्रतिनिधि असल में पैसे कमाने के लिए ठेकेदारी से लेकर ब्लैकमेल तक के धंधे करते हैं। कहने वाले कह देते हैं कि अंशकालिक संवाददाताओं के धंधे बुलंद होते हैं पर कुछेक अपवाद को नियम नहीं माना जा सकता।

कानपुर में कांग्रेस नेता ने सम्पादक को दी जूतों से मारने की धमकी

कानपुर : स्वतंत्रता दिवस पर शहर में कांग्रेसी नेता अम्बुज शुक्ला द्वारा लगवाई गई त्रुटि पूर्ण होर्डिंग्स के बारे में खबर प्रकाशित करने पर ‘जन सामना’ के सम्पादक श्याम सिंह पंवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। शुक्ला ने कहा है कि ‘जन सामना’ समाचार पत्र का लाइसेन्स जब्त करवा दूंगा। पत्रकार को अपने घर बुलाकर जूते से मारने की दी धमकी। 

बदायूं में पत्रकार पर हमला, कैमरा और मोबाइल तोड़ डाला

बदायूं में कबरेज के दौरान पत्रकार सुनील मिश्रा पर उपद्रवियों ने जानलेवा हमला कर दिया, कैमरा  और मोबाइल तोड़ डाला। सुनील मिश्रा दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, साधना न्यूज, न्यूज नेशन सहित कई संस्थानों में काम कर चुके है।

उ.प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव के लिए कमेटी गठित

लखनऊ : वर्षों बाद उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव के लिए गत दिवस लखनऊ में आपसी सहमति हो जाने के बाद पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। 

प्रदीप सिंह ओपिनियन पोस्ट के चीफ एडीटर बने, ओमप्रकाश अश्क भी जुड़े

बाराखंबा रोड नई दिल्ली से शुरू होने जा रही राष्ट्रीय पाक्षिक पत्रिका ओपिनियन पोस्ट से एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह यहां बतौर प्रधान संपादक जुड़ चुके हैं और संपादकीय टीम का नेतृत्व करेंगे। 

भारत का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सरकार की मर्जी पर !

यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि आज भारतीय मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपने लिए निर्धारित मानदंडों और आचरण संहिता को भूलकर किसी न किसी राजनीतिक दल का अनुयायी या उग्र राष्ट्रवादी संगठनों की तरह व्यवहार करने लगा है। एंकर चीख चीख कर अशोभन लहजे में अपनी परम देश निष्ठा का परिचय दे रहे हैं। अपने अलावा किसी और को बोलने का मौका वे नहीं देना चाहते। खबरों का प्रसारण यहां राजनीतिक मंतव्यों के तहत हो रहा है। 

रघुवर सरकार ने बंद की पत्रकार दुर्घटना बीमा योजना

झारखंड : प्रदेश की रघुवर सरकार ने पत्रकार दुर्घटना बीमा योजना बंद कर दी है। हेमंत सोरेन सरकार ने इस योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत दुर्घटना में मौत होने पर पत्रकार के परिजन को 5 लाख रूपये मिलने का प्रावधान था। 

संदिग्ध हालात में बरामद हुए लापता पत्रकार चयन सरकार

अलीपुरद्वार (सिलीगुड़ी) : संदिग्ध हालात में पत्रकार चयन सरकार के बरामद होने के साथ उनके लापता होने को लेकर तरह तरह की अटकलों पर विराम लग गया। विगत रात यहां के कूचबिहार बस स्टैंड से पुलिस ने उन्हें बरामद किया। जबकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि चार पांच अज्ञात लोग चयन को वाहन से छोड़ गए। शनिवार को सीआइडी ने उन्हें कोर्ट में पेश किया। यद्यपि चयन के लापता और बरामद होने का घटनाक्रम अब भी तरह तरह के सवाल पैदा कर रहा है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि चयन जल्द मिल जाएंगे। 

जब पत्रकार नौकरशाह-मंत्रियों को लड़कियां पहुंचाने लगें तो पत्रकारिता की गरिमा तार-तार होगी ही

गणेश शंकर विद्यार्थी जो अतीत से आज तक और आगे भी मिशन पत्रकारिता के पितामह जाने जाते रहेंगे, गांधी जी भी पत्रकार थे, अटल बिहारी वाजपेयी ने भी पत्रकारिता के गौरव पूर्ण काल के इतिहास को जिया है। लाल कृष्णा आडवाणी भी पत्रकार थे, बाला साहेब ठाकरे भी कार्टूनिस्ट पत्रकार थे लेकिन इन सभी ने कभी भी मिशन पत्रकारिता और उसकी गरिमा पर आंच नहीं आने दी. 

राजेन्द्र माथुर की गैरहाजिरी के 25 साल

किसी व्यक्ति के नहीं रहने पर आमतौर पर महसूस किया जाता है कि वो होते तो यह होता, वो होते तो यह नहीं होता और यही खालीपन राजेन्द्र माथुर के जाने के बाद लग रहा है। यूं तो 8 अगस्त को राजेन्द्र माथुर का जन्मदिवस है किन्तु उनके नहीं रहने के पच्चीस बरस की रिक्तता आज भी हिन्दी पत्रकारिता में शिद्दत से महसूस की जाती है। राजेन्द्र माथुर ने हिन्दी पत्रकारिता को जिस ऊंचाई पर पहुंचाया, वह हौसला फिर देखने में नहीं आता है। ऐसा भी नहीं है कि उनके बाद हिन्दी पत्रकारिता को आगे बढ़ाने में किसी ने कमी रखी लेकिन हिन्दी पत्रकारिता में एक सम्पादक की जो भूमिका उन्होंने गढ़ी, उसका सानी दूसरा कोई नहीं मिलता है।

पत्रकार की पत्नी से डॉक्टर ने की छेड़खानी, रिपोर्ट दर्ज

गाजियाबाद : जिला अस्पताल में जांच कराने पहुंची जर्नलिस्ट की पत्नी से डॉक्टर ने छेड़छाड़ की। पीड़िता ने डॉक्टर पर छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप लगा है। डाक्‍टर ने आरोपों से इनकार किया है। कविनगर पुलिस को दोनों पक्षों ने तहरीर दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मीडियाकर्मियों की मोर्चेबंदी से पकड़ा गया पर्स लुटेरा

इंदौर : तुकोगंज थाने के ठीक सामने एक बदमाश ने 10-10 के नोट सड़क पर फेंके और महिला को झांसा देते हुए उसका पर्स चुराकर भागने लगा। वारदात वहां खड़े दो मीडियाकर्मियों ने देखी। उन्होंने लुटेरे को पकड़ने के लिए करीब आधा किमी दौड़ लगाई। लुटेरे ने हाथापाई की, लेकिन मीडियाकर्मियों ने उसे पकड़कर पुलिस को सौंप दिया।

पुणे में पत्रकारों पर हिंसक भीड़ का हमला, चार घायल

पुणे (महाराष्ट्र) : कामशेत में एक मनसे कार्यकर्ता के मर्डर की रिपोर्टिंग करने गये प्रिन्ट तथा इलेक्टॉनिक मिडिया के रिपोर्टर्स की जमकर पिटाई की गई. हमले में चार पत्रकार घायल हो गये। पत्रकार संगठनों ने घटना पर रोष जताते हुए दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग की है। 

फेसबुक पर आतंकी बनने की इच्छा जताने वाला पत्रकार गिरफ्तार

सोशल साइट फेसबुक पर याकूब मेमन को शहीद बताने वाले पत्रकार जुबैर अहमद खान को वसंत बिहार (दिल्ली) की पुलिस ने मुंबई में गिरफ्तार कर लिया है। जुबेर अहमद खान ने अपनी पोस्ट में इस्लामिक स्टेट में शामिल होने की मंशा भी व्यक्त की थी। 

दक्षिण भारतीय पत्रकार कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में शामिल

मीडिया सूचनाओं के मुताबिक पालाक्‍कड के एक मलयालम समाचारपत्र से इस्तीफा दे चुके एक पत्रकार के कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में सक्रिय होने की जानकारी मिली है।

देहरादून में वरिष्ठ पत्रकार अशोक पांडेय का मकान ढहाया गया

देहरादून : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के निजी सचिव आईएएस मोहम्मद शाहिद का स्टिंग ऑपरेशन करने वाले पत्रकार अशोक पांडेय का घर मंगलवार को मसूरी-देहरादून डिवेलपमेंट अथॉरिटी ने ढहा दिया। स्टिंग में शाहिद राज्य में शराब की बिक्री संबंधी नीतियों को बदलने के लिए रिश्वत की मांग करते दिखाए गए थे।

पत्रकार जगेंद्र हत्याकांड के गवाहों को बचाना जरूरी : आईपीएस अमिताभ

लखनऊ : शाहजहांपुर के दिवंगत पत्रकार जागेंद्र सिंह के बेटे के अचानक मंत्री राममूर्ति वर्मा के पक्ष में बयान देने के बाद आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस मामले में जागेंद्र के लड़कों सहित सभी गवाहों की रक्षा करने और सच्चाई सामने लाने के लिए राज्य सरकार को उपयुक्त माहौल बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया है।

फोटो पत्रकार की हत्या, अपार्टमेंट में मिले पांच लोगों के शव

मैक्सिको की एक खोजी पत्रिका प्रोसेसो के मुताबिक मैक्सिको सिटी में एक अपार्टमेंट में पांच लोगों के शव मिले, जिनमें एक फोटो पत्रकार का शव भी है। फोटो पत्रकार रूबेन एस्पिनोसा शुक्रवार से लापता थे और शनिवार दोपहर उनके परिवार के सदस्यों ने उनकी पहचान की। उनके शरीर पर दो जगह गोली लगने के निशान थे।

डीएम ने मुर्गा न बनने पर पत्रकार की बाइक पुलिस को सौंप दी

बाराबंकी (उ.प्र.) : जिलाधिकारी ने सरेआम मामूली सी बात पर कल सुबह 10.21 बजे डीएम ऑफिस मोड़ पर ‘क्राइम रिब्यू’ के पत्रकार रामशंकर शर्मा को पहले मुर्गा बनने को कहा। ऐसा न करने पर पुलिस को बुलाकर पुनः दबाव बनाया। 

हल्द्वानी में पत्रकार गौरव गुप्ता और दानिश खान का सम्मान

हल्द्वानी। समूह ग पेपर के लीक होने के मामले में खोजी पत्रकारिता करने वाले देवभूमि पोलखोल समाचार पत्र के सम्पादक गौरव गुप्ता व रामनगर के संवाददाता दानिश खान को जिलाधिकारी दीपक रावत और उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने हल्द्वानी में शाल ओढ़ाकर व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। 

पत्रकार रमा पांडे को ब्रिटने का ‘भारत गौरव सम्मान’

बीबीसी की पूर्व पत्रकार और जानी मानी समाचार वक्ता रमा पांडे को लंदन में उनके जीवन भर की उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। रमा पांडे को पत्रकारिता व सामाजिक कार्यों के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट ने भारत गौरव सम्मान से सम्मानित किया। वह भारत की जानी मानी पत्रकार के साथ-साथ कवियित्री, कलाकार और एक्टिविस्ट हैं।