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मौसमी सिंह की हरकत बेहद निंदनीय : अजीत अंजुम

अजीत अंजुम-

हां, मैंने कुछ मौकों पर आजतक की रिपोर्टर मौसमी सिंह की तारीफ की है लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं कि मैं उनका कोई पक्षकार हूं.

शमा मोहम्मद का पीछा करके जिस तरह से मौसमी ने उन्हें घेरने की कोशिश की है, वो बेहद निंदनीय है. शमा के एक बयान की वजह से उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर बजरंग दल, वीएचपी और बीजेपी के कार्यकर्ताओं वाले सवाल किसी रिपोर्टर को क्यों पूछना चाहिए?

शमा की अगर रोहित शर्मा के बारे में कोई निजी राय है तो इसका मतलब ये नहीं कि उन्हें पाकिस्तान परस्त घोषित कर दिया जाए. सिर्फ इसलिए कि वो मुस्लिम हैं. उनके मुस्लिम होने की वजह से ही उनके बयान को इतना बड़ा मुद्दा बनाया गया.

मोदी, योगी और शाह की सत्ता के सामने जब बड़े – बड़े चैनल ज़मीन पर लेटे हों, उनकी चापलूसी में संपादकों की मंडली बिछी जा रही हो, तब शमा मोहम्मद को उनके एक बयान की वजह से यूं घेरना एक किस्म की लिंचिंग है.

मोदी के बयानों पर जिन चैनलों ने कभी एक सवाल पूछने की हिम्मत नहीं की, उन्होंने शमा मोहम्मद के पीछे अपने रिपोर्टर्स छोड़ दिए. बीजेपी के एजेंडे का हिस्सेदार बनकर सवाल पूछना और इस कदर किसी को घेरना बिल्कुल गलत है.

शमा के बयान पर उनका पक्ष लेने की कोशिश करना एक रिपोर्टर की ड्यूटी है लेकिन ये ड्यूटी ऐसे नहीं निभाई जाती.

बजरंग दल वाले सवालों के साथ जबरदस्ती पीछा नहीं किया जा सकता.

दस सालों में बीजेपी के नेताओं के बयानों और दावों पर अगर चैनलों ने ऐसे उनका पीछा किया होता तो मीडिया की साख रसातल में नहीं गई होती.

मोदी और शाह के सामने रिपोर्टर तो छोड़िए मालिक भी मिमियाने लगते हैं लेकिन विपक्ष के किसी नेता को घेरना हो तो सबकी आवाज तेज हो जाती है…

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