आजतक की पत्रकार मौसमी सिंह ने कांग्रेस की महिला नेता शमा मोहम्मद को सांप्रदायिक एंगल से ट्रोल किया। मौसमी ने शमा से जो सवाल पूछे हैं उन्हें लेकर सोशल मीडिया यूजर्स भड़के नजर आ रहे हैं। नीचे पढ़िए किसने क्या कुछ लिखा है…
अशोक कुमार पांडेय-
मौसमी इसके पहले भी कांग्रेस नेताओं से वाल पूछते हुए अपनी लिमिट क्रॉस करती रही हैं। रोहित के मामले में वह किसी और तरह से सवाल पूछ सकती थीं लेकिन उन्होंने शमा पर सांप्रदायिक हमले की घटिया राह चुनी। शर्मनाक!
प्रशांत टंडन-
कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने क्रिकेटर रोहित शर्मा की फिटनेस को लेकर टिप्पणी का पक्ष–विपक्ष हो सकता है लेकिन सवाल में पाकिस्तान को लाना क्योंकि शमा मोहम्मद मुसलमान हैं बेहद शर्मनाक है.
शमा को इस घटिया सवाल के जवाब में अपनी देशभक्ति साबित करनी पड़ रही बहुत तकलीफदेह है. मीडिया को नस्लवादी सवाल करने का अधिकार नहीं हैं. आजतक का बॉयकॉट होना चाहिये. इस चैनल को कोर्ट में घसीटना चाहिये.
तुलना खराब है लेकिन उपयोगी है – भारत के विपक्ष को ट्रंप के कम्युनिकेशन की स्टडी करनी चाहिये. ट्रंप अमेरिका के लिगेसी मीडिया और डीप स्टेट के विरोध के बावजूद अपने पक्ष में नेरेटिव गढ़ने में सफल रहे.
अब व्हाइट हाउस से लिगेसी मीडिया का वर्चस्व खत्म कर दिया और नए मीडिया को एंट्री दे दी.
हमारा विपक्ष अभी भी उसी गोदी मीडिया के चक्कर काटता है जो सिर्फ उसके खिलाफ नहीं है बल्कि सांप्रदायिक, नस्लवादी और जातिवादी भी है.
ट्रंप ने टिक टॉक का भरपूर इस्तेमाल किया युवाओं तक पहुंचने के लिये, न्यू मीडिया को एक्सेस दिया.
न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट, सीएनएन, सीबीएस अपना काम करते रहे और ट्रंप अपना.
विपक्ष के नेता अभी ‘क्लास’ से बाहर नहीं निकल पाये हैं. वो उसी मीडिया को एक्सेस देते हैं जिनका ऑडियन्स उनका है ही नहीं.
राजीव निगम-
शायद एक बार राहुल गाँधी ने इनको ही भगाया था, आज इनकी हरकत देख कर लग रहा है सही भगाया गया था, पीछा करके घटिया प्रोपेगंडा वाले घटिया सवाल पूंछना, कभी किसी सत्ता धारी नेता के पीछे भागी है ऐसे सवाल करने के लिए.. Really shame
आवेश तिवारी-
आज मौसमी सिंह को शमा मोहम्मद से सवाल करते देखा तो मुझे अजीत अंजुम याद आ गए।
अजीत जी ने 6 जून 2024 को एक ट्वीट किया था “मैं मौसमी सिंह को ऐसे रिपोर्टर के तौर पर जानता हूं, जो चैनल में काम करते हुए भी गोदी मीडिया का हिस्सा नहीं बनी है। वाजिब सवाल करती है और मोदी की सत्ता के सामने बिना झुके अपनी आवाज़ बुलंद रखती है”
अजीत अंजुम आगे कहते हैं कि राहुल गांधी को ऐसे रिपोर्टर के सवाल का जवाब देना चाहिए, न कि उसे बीजेपी से जोड़कर मखौल उड़ाना चाहिए।
राहुल गांधी पहले भी कुछ पत्रकार के साथ ऐसे पेश आ चुके हैं. उन्हें सही पत्रकारों के बारे में समझदारी विकसित करनी चाहिए।”
1-अजीत जी इस वीडियो में मौसमी जिस तरह से शमा मोहम्मद का शिकार कर रही हैं क्या आप उसे जायज मानते हैं?
2-क्या शमा मोहम्मद से पाकिस्तान वाला सवाल इसलिए नहीं किया जा रहा क्योंकि वह मुसलमान हैं?
3-क्या आप अब भी मौसमी सिंह को एक सही पत्रकार मानते हैं?
4- क्या एक खिलाड़ी को मोटा कहना अपराध या अशोभनीय है जबकि उस खेल में फिटनेस जरूरी हो?
5 – क्या आपको यह वीडियो देखकर रिया चक्रवर्ती की चेजिंग याद नहीं आई?
देखें वीडियो…
श्याम मीरा सिंह-
आज तक की रिपोर्टर- मौसमी ने जब राहुल गांधी को पूछा था कि- संसद में विपक्ष के कारण जनता का पैसा waste हो जाता है। इस पर राहुल गांधी ने कहा था कि- ये बीजेपी की लाइन है। सीधे भाजपा की टीशर्ट ही पहन लो।
उस समय मैंने और कई पत्रकारों ने राहुल गांधी का विरोध किया और मौसमी का साथ दिया। लेकिन हम ग़लत थे। गोदी मीडिया इस देश का सबसे बड़ा दुश्मन है। जिस तरह मौसमी सिंह सुपारी पत्रकारिता कर रही हैं उन्हें @RahulGandhi ने पहले ही पहचान लिया था। गोदी मीडिया को जितना बेइज्जत किया जाए उतना कम है। ये लोग दलाली कर करके पत्रकारिता जैसे प्रोफ़ेशन को बदनाम कर चुके हैं। इनको ऐसे ही जवाब देना चाहिए। हम लोग ग़लत थे जो इनका सपोर्ट किए।



