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सुख-दुख

कवरेज करते वक्त थमी धड़कन; वरिष्ठ पत्रकार विवेक कुमार अस्थाना नहीं रहे!

गोरखपुर। पत्रकारिता, रंगकर्म और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में आजीवन समर्पित रहे गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के आजीवन सदस्य, सन रोज रंगकर्मी एवं नाट्य संस्था सनरोज संस्थान के संस्थापक, वरिष्ठ पत्रकार विवेक कुमार अस्थाना जी का आकस्मिक निधन गोरखपुर ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल के पत्रकारिता जगत के लिए गहरा आघात है। कवरेज करते समय हृदयगति रुकने से उनका यूं असमय चला जाना हर संवेदनशील मन को भीतर तक झकझोर देने वाला है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज रमाडा बैंक्वेट हॉल में एक कार्यक्रम की कवरेज के दौरान अचानक अस्थाना जी की तबीयत बिगड़ गई। कुछ ही पलों में वह असहज हो गए और वहीं गिर पड़े। मौके पर मौजूद पत्रकार साथियों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तुरंत आनंद लोक हॉस्पिटल, गोरखनाथ पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों की टीम ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन नियति को कुछ और ही स्वीकार था। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में सन्नाटा पसर गया और हर आंख नम हो गई।

विवेक अस्थाना जी

अस्थाना जी की तबीयत खराब होने की सूचना मिलते ही गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के अध्यक्ष रितेश मिश्रा पूरी कार्यकारिणी के साथ तथा बड़ी संख्या में पत्रकार साथी आनंद लोक हॉस्पिटल पहुंच गए। हर कोई अपने प्रिय साथी, अपने भाई समान विवेक अस्थाना जी को देखने को व्याकुल था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वह हम सबको छोड़कर हमेशा के लिए इस दुनिया से विदा ले चुके थे।

इस कठिन और शोकपूर्ण समय में गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब की कार्यकारिणी ने संवेदनशीलता, एकजुटता और जिम्मेदारी का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जो पत्रकारिता जगत में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। अस्पताल से एंबुलेंस की व्यवस्था, पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक घर और फिर अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाने, दाह संस्कार एवं उससे जुड़े समस्त खर्चों का पूरा वहन करते हुए प्रेस क्लब ने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक परिवार है। अध्यक्ष रितेश मिश्रा ने मुखिया होने के नाते मानवीय दायित्व निभाकर सभी का दिल जीत लिया।

श्री अस्थाना जी का अंतिम संस्कार राजघाट स्थित सहारा मुक्ति स्थल पर पूरे विधि-विधान से संपन्न हुआ। इस अत्यंत भावुक क्षण में उनके बड़े पुत्र ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। वह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों को नम कर गया। जिस उम्र में बच्चे को पिता का सहारा चाहिए होता है, उसी उम्र में पिता को अग्नि देने का दायित्व निभाना किसी भी पुत्र के लिए असहनीय पीड़ा से कम नहीं था।

अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में पत्रकार, रंगकर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस दौरान महापौर सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने भी पहुंचकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। हर चेहरा गमगीन था, हर मन भारी। सभी ने एक स्वर में कहा कि विवेक कुमार अस्थाना जी का जाना पत्रकारिता और रंगमंच दोनों के लिए अपूरणीय क्षति है।

सबसे अधिक हृदयविदारक पहलू यह है कि अस्थाना जी अपने पीछे पत्नी और दो मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं। बड़ा पुत्र 14 वर्ष का और छोटा बच्चा मात्र 12 वर्ष का है। जिन नाजुक वर्षों में बच्चों को पिता का मार्गदर्शन, संरक्षण और स्नेह चाहिए होता है, उन्हीं वर्षों में उनके सिर से पिता का साया उठ जाना पूरे समाज को मर्माहत कर गया। अंतिम संस्कार स्थल पर जब दोनों बच्चे अपने पिता को अंतिम विदाई दे रहे थे, तब वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।

अस्थाना जी न केवल एक निर्भीक और ईमानदार पत्रकार थे, बल्कि एक संवेदनशील पिता और जिम्मेदार परिवारजन भी थे। सीमित संसाधनों और व्यस्त जीवन के बावजूद वह बच्चों की शिक्षा, संस्कार और भविष्य को लेकर सदैव चिंतित रहते थे। पत्रकारिता के साथ-साथ रंगमंच के माध्यम से समाज को जागरूक करना उनका जीवन उद्देश्य था। सनरोज संस्थान के जरिए उन्होंने अनेक युवाओं को मंच दिया और सामाजिक सरोकारों से जुड़े नाटकों के माध्यम से जनचेतना का कार्य किया।

इस दुखद घड़ी में गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के पदाधिकारियों एवं पत्रकार साथियों ने अस्थाना जी की पत्नी और बच्चों को ढांढस बंधाते हुए यह भरोसा दिलाया कि यह पत्रकारिता परिवार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा रहेगा। विवेक अस्थाना जी भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से न हों, लेकिन उनकी ईमानदारी, संघर्ष, संवेदनशीलता और कर्मठता सदैव स्मृतियों में जीवित रहेगी। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार, विशेषकर उनके दोनों मासूम बच्चों को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। विवेक कुमार अस्थाना जी, आप सदैव याद किए जाएंगे।

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