रवीन्द्र पटवाल-
बीजेपी चाहती तो 2014-2024 के बीच कभी भी वक्फ़ बिल को अपने दम पर पारिपारित करा सकती थी. लेकिन उसने इसे 2 अप्रैल की रात ही कराया…
नितीश कुमार पर तो डायरेक्ट सर्जिकल स्ट्राइक की, और जो 2020 में कमर तोड़ी थी, अब मरणासन्न कर दिया है. जेडीयू के टुकड़े अब होंगे हजार, कोई इधर गिरेगा, कोई उधर.
लेकिन इसके साथ ही एनडीए के बाकी घटक दलों का भी बेड़ा गर्क करना था. जयंत चौधरी जी की पार्टी हो या अजित पवार की, इनका बीजेपी में विलय होना है. जीतन राम मांझी, चिराग पासवान सबकी बत्ती गुल होने वाली है, क्योंकि इनका मतदाता अब जान चुका है कि इन्हें गुलामी में ही सारी मलाई मिल रही है.
टीडीपी के पास अभी काफी वक्त है. अभी तो दक्षिण बनाम उत्तर की लड़ाई अगले साल से तेजी पकड़ेगी. वक्फ़ बिल का सबसे अधिक दोहन यूपी में लेने की तैयारी हो रही है. नोटबंदी की तरह क्या इस बार भी गरीब आम आदमी इस झांसे में आयेगा कि रसूखदार मुसलमान से संपत्ति छीनकर उसमें से छोटा सा टुकड़ा उसे मिलेगा? अगर ऐसी कोई उम्मीद उसे है तो वो अपने जनधन खाते, उज्ज्वला सिलिंडर, 2 करोड़ नौकरी….या जेब में रखे आयुष्मान कार्ड को ही देख ले.
सबका साथ, सबका विकास हर बार क्रोनी का साथ, क्रोनी मित्रों के और विकास के साथ ही क्यों जुड़ जाता है? धारा 370 हटी तो कितने कश्मीरी पंडित कश्मीर में वापस लौट पाए?
किसी ने कश्मीर में प्लाट लिया हो, उसका नाम बता सकते हैं?
नहीं न! लेकिन कुछ लोगों ने वाकई कश्मीर और जम्मू में खूब प्रॉपर्टी ली हैं, लेकिन ये वे लोग हैं, जो मुंबई के धन्नासेठ हैं, और कुछ तो वक्फ़ की विवादित जमीन पर ही अरबों रूपये का आलीशान घर बना चुके हैं…
आपको तो सिर्फ ट्रंप का टैरिफ का दंश भोगने के लिए मुसलमानों की हाय-तौबा से बहलाने का प्रबंध किया गया है.
लेकिन हमारे साथ साथ जेडीयू, टीडीपी, आरएलडी और एलजेपी का भी जहाज हमेशा के लिए डूब रहा. जेपी नड्डा ने पिछले साल कहा था, क्षेत्रीय पार्टियों का भविष्य खत्म हो रहा है.
JDU : 12 seats
TDP : 16 seats
RLD : 02 seats
LJP : 05 seats
232+35 = 267 (INDIA)
288-35 = 253 (BJP )



