नोएडा में दुर्घटना का शिकार हुए इंजीनियर युवरात मेहता मामले में योगी आदित्यनाथ ने अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को निलंबित कर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया। वहीं नोएडा की डीएम मेधा रूपम जस की तस अपने पद पर काबिज हैं। जबकि डिजास्टर मैनेजमेंट की जिम्मेदारी डीएम की होती है जो इस वक्त मेधा रूपम के पास है। बता दें मेघा रूपम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुप्ता की बेटी हैं। अब लोग इसी को लेकर सवाल जवाब कर रहे हैं। मौजूदा समय में तीन वरिष्ठ पत्रकारों ने नोएडा की घटना पर ट्वीट किया लेकिन मेधा रूपम का नाम नहीं लिखा, जिस पर यूट्यूबर अजीत अंजुम क्या लिख रहे हैं- पढ़ें
अमिताभ अग्निहोत्री-
नोएडा में इंजीनियर की मृत्यु के मामले में CEO को हटाने और जांच के लिए SIT के गठन का फैसला संतोषजनक है लेकिन जरूरी ये भी है कि दायित्व न निभाने वाले निष्ठुर अधिकारियों को जेल भी भेजा जाए — केवल स्थानांतरण की कार्रवाई कतई पर्याप्त नहीं होगी —
अजीत अंजुम- नोएडा DM के बारे में क्या ख्याल है? उनकी जिम्मेदारी पर आप जैसे पत्रकार कुछ बोल ही नहीं रहे हैं अमिताभ जी.
पंकज झा-
फायर ब्रिगेड और पुलिस वाले तो “ठंडा पानी” के बहाने तमाशबीन बने रहे. SDRF तो राहत और बचाव के लिए बनी है पर उसने भी पल्ला झाड़ लिया. जो भी टीम शुक्रवार की रात मौक़े पर गई थी, सब पर एक्शन होना चाहिए।
अखिलेश शर्मा-
इंजीनियर युवराज की मृत्यु के मामले में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को हटाना ही काफ़ी नहीं। मौक़े पर मौजूद दमकल, SDRF और पुलिस के उन निकम्मे जवानों का क्या जो पानी ठंडा होने की बात कह कर युवराज को बचाने नहीं उतरे और उनकी आँखों के सामने युवराज ने दम तोड़ दिया? क्या इन सभी को बर्खास्त नहीं कर देना चाहिए?
अजीत अंजुम- आप दोनों वरिष्ठ पत्रकारों को नोएडा के DM का नाम अब तक पता चला है कि नहीं? पता चले तो उनकी जवाबदेही के बारे में भी कुछ जानकारी दें तो बेहतर होगा. सही कह रहे हैं आप कि सब पर एक्शन होना चाहिए . नोएडा DM आपके हिसाब से इस दायरे में हैं या नहीं?



