
भोपाल : अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर शनिवार को सप्रे संग्रहालय में दुर्लभ सामग्रियों की प्रदर्शनी के साथ सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। अलंकरण समारोह में पत्रिका के संपादक महेंद्र प्रताप सिंह समेत 11 प्रतिभावान पत्रकारों को विभिन्न सम्मानों से नवाजा गया। महेंद्र प्रताप सिंह को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अटलबिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति खेमसिंह डहेरिया शामिल हुए।
समाचार पत्रों की विश्वसनीयता कायम
डहेरिया ने कहा कि आज सूचनाओं के तमाम माध्यम हैं, लेकिन इन सब के बीच समाचारपत्र की विश्वसनीयता आज भी कायम है। हम किसी और माध्यम में पढ़ी या देखी गई खबरों का सत्यापन भी समाचारपत्र के माध्यम से ही करते हैं। उन्होंने सप्रे संग्रहालय को श्रद्धालय की संज्ञा दी।
सप्रे संग्रहालय के संस्थापक विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व, जिनका समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान है उनके कृतित्व का सम्मान होना चाहिए। पत्रकारिता की विभूतियों को सम्मानित करने के पीछे यही मंशा है।
संग्रहालयों की महत्ता बढ़ी
कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के निदेशक अमिताभ पाण्डेय ने की। उन्होंने कहा कि जब आज सोशल मीडिया के दौर में मनुष्य एकाकी होता जा रहा है, ऐसे समय में संग्रहालयों की महत्ता बढ़ी है। इसका जीता-जागता प्रमाण सप्रे संग्रहालय है। यहां से एक हजार से ज्यादा शोधार्थियों ने अपना शोध कार्य पूरा किया है। विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक चन्द्र चारु त्रिपाठी उपस्थित थे।
इनका हुआ सम्मान
समारोह में इंदौर के कीर्ति राणा को हुक्मचंद नारद सम्मान, भोपाल के डॉ संजीव गुप्ता को मीडिया शिक्षा सम्मान, जीएस वाधवा को संतोष कुमार शुक्ल पुरस्कार, संजय मिश्र को लाल बलदेव सिंह पुरस्कार, भीमसिंह मीणा को जगत पाठक पुरस्कार, डॉ घनश्याम बटवाल को रामेश्वर गुरु पुरस्कार, पल्लवी वाघेला को जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी पुरस्कार, रंजना दुबे को झाबरमल्ल शर्मा पुरस्कार, अजीत द्विवेदी को सुरेश खरे पुरस्कार और राकेश सैनी को होमी ब्यारावाला पुरस्कार से अलंकृत किया गया।



