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अनंत अंबानी के चीखने-मुट्ठी भांजने वाला वीडियो और इससे संबंधित खबर हर जगह से गायब….

Mukesh Kumar : ये भी आतंक का एक रूप है। आप इसे कार्पोरेट आतंकवाद कह सकते हैं। अंबानी के बेटे अनंत अंबानी का एक वीडियो आया जिसमें वे एक मनोरोगी की तरह चीखते और हवा में मुट्ठी भाँजते दिख रहे थे। मौक़ा रिलायंस के चालीसवें वर्ष के समारोह का था।

Mukesh Kumar : ये भी आतंक का एक रूप है। आप इसे कार्पोरेट आतंकवाद कह सकते हैं। अंबानी के बेटे अनंत अंबानी का एक वीडियो आया जिसमें वे एक मनोरोगी की तरह चीखते और हवा में मुट्ठी भाँजते दिख रहे थे। मौक़ा रिलायंस के चालीसवें वर्ष के समारोह का था।

अनंत अंबानी की इन हरकतों का हर तरफ मज़ाक उड़ रहा था। जाहिर है कि कार्पोरेट की दुनिया के मोगांबो को कैसे बर्दाश्त होता और उसने अपनी भृकुटियाँ टेढ़ी कर दीं। बस क्या था, धड़ाधड़ हर जगह से ख़बर उतरने लगी। फिर भी लोग यही कहेंगे, मीडिया स्वतंत्र है। Devpriya Awasthi जी सच कहते हैं- अंबानी के एक प्रोडक्ट के विज्ञापन की पंचलाइन थी- ”कर लो दुनिया मुट्ठी में”. दुनिया मुट्ठी में हुई हो या नहीं, मीडिया इंडस्ट्री तो मुट्ठी में हो ही गयी है.

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की एफबी वॉल से.

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