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आज के अखबार : कई खबरें छोड़ कर शिक्षा मंत्रालय में प्रधान मंत्री की लीपा-पोती को ही लीड बनाया है

Hindi newspaper clipping with bold headlines and body text about a political figure's cricket-related status and related commentary, including attributed remarks (no visual focus on identities).

नीरव मोदी के भारत से फरार होने से पहले की फोटो नरेन्द्र मोदी के साथ भी थी। भारत से करोड़ों लेकर फरार है आज तक वापस नहीं लाया जा सकता है। खबर भी नहीं छपती है। हालांकि वापस तो मेहुल चोकसी को भी नहीं लाया जा सका है। पर सब चंगा सी।  

संजय कुमार सिंह

धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री ने परीक्षा सुधार पर हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की है। अभी यह देखना बाकी है कि बड़े-बड़े नाम वाली यह कमेटी क्या कर पाएगी जब शिक्षा मंत्रालय के काम शिक्षा मंत्री ही नहीं कर पाते रहे हैं। ऐसे में आज कई दूसरी खबरें हैं जो लीड बन सकती थीं और इस सरकार प्रचार से बचा जा सकता है। द टेलीग्राफ में प्रस्तुति थोड़ी अलग है और यह सरकार के खिलाफ मानी जा सकती है भले ही है, खबर या खबर का भाग ही। द टाइम्स ऑफ इंडिया की प्रस्तुति भी अलग है लेकिन इसमें बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री आधार वाले नीलेकणि को परीक्षा सुधार के लिए ले आए। आप उम्मीद कर सकते हैं कि नीलेकणि क्रांति कर देंगे पर सूचना क्रांति नहीं है और सूचना के साथ खबर है कि प्रधानमंत्री ने यह जानकारी इंस्टाग्राम वीडियो में दी है। जाहिर है, इतने दबाव में, इतने बड़े आंदोलन के बाद जो कार्रवाई की गई है उसकी घोषणा नए शिक्षा मंत्री ने नहीं की। यह निर्णय प्रधानमंत्री को ही करना था तो शिक्षा मंत्री को क्यों हटाया गया या नहीं हटाने का कारण यही था – खबरों से पता नहीं चल रहा है। चलेगा भी नहीं क्योंकि प्रधानमंत्री अपने मतदाताओं से सीधे संवाद करते हैं और अब खबर यह भी है कि प्रधानमंत्री इंस्टाग्राम पर बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया भी लाखों में है। लेकिन मुद्दा यह है कि नीट पेपर लीक 2024 में हुआ था, तब कार्रवाई नहीं हुई या जो हुई उसके बावजूद 2025 और फिर 2026 में हो गया। लीक में शामिल लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई, जिसे मास्टर माइंड कहा गया उसे छोड़ दिया गया और भाजपा के लोग भी शामिल मिले। फिर भी पुनर्परीक्षा में लीक न हो इसे रोकने के लिए सेना लगाई गई उसके बावजूद लीक हुआ हो या नहीं, टेलीग्राम ऐप्प बैन कर दिया गया और इस तरह यह बताने की कोशिश की गई कि लीक के कारण सरकार की नाकामी नहीं, गलत तरीकों का इस्तेमाल रहा है। जैसे प्रश्नपत्र पहुंचाने का तरीका और फिर वायु सेना को लगाना।

इसी तरह, प्रश्नपत्र लीक करने के आरोप में प्रश्न पत्र बनाने वालों को गिरफ्तार किया गया। यह दलील भी दी गई कि बनाने वाला ही लीक कर दे तो क्या किया जा सकता है? जरूर किया जा सकता है और कार्रवाई उसके भी खिलाफ होनी चाहिए जो प्रश्नपत्र बनाने वालों का चयन करता है। इसी तरह प्रश्नपत्र अगर प्रेस से लीक हो जाए तो यह नहीं कहा जा सकता है कि एक दो कॉपी ज्यादा छापकर या कुछ पहले छापकर लीक कर दे या व्हाट्सऐप्प कर दे तो व्हाट्सऐप्प पर प्रतिबंध लगाना पड़ेगा। सवाल तो उससे होना चाहिए जिसने प्रश्न पत्र छापने का ठेका दिया, शर्तें बनाईं। वैसे भी, इस तरह के काम करने वाली प्रेस अलग होती है और दूसरी परीक्षाओं के पेपर लीक नहीं होते हैं तो कोई खास क्यों लीक हुआ या अगर किसी प्रेस में छपने वाले प्रश्नपत्र लीक हो जाते हैं तो गड़बड़ी प्रेस में है। कई कारण हो सकते हैं और सब अलग लोगों की जिम्मेदारी है और उनको देखना, उनके खिलाफ कार्रवाई शिक्षा मंत्री को करनी है और शिक्षा मंत्री नहीं कर पाए तो प्रधानमंत्री को उसे हटा देना चाहिए। मांग करने की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए। लेकिन मांग करने पर हटाया नहीं गया और हटाया गया तो नए तरीके आजमाए जा रहे हैं। दिलचस्प यह भी है कि इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री ने नहीं प्रधानमंत्री ने की। जाहिर है, आईडिया भी उन्हीं का होगा और अगर इसमें कोई कमी या खराबी हो तो कौन बोलेगा? जब कोई बोल ही नहीं पाएगा तो चलता रहेगा और फिर 22 या ज्यादा बच्चों की आत्महत्या के बाद आंदोलन होगा तो प्रधानमंत्री का इस्तीफा हो जाएगा। इस लिहाज से टास्क फोर्स बनाने की खबर इतनी बड़ी खबर नहीं है यह सरकार का प्रचार है कि वह बहुत गंभीर दिखने की कोशिश में है। गड़बड़ी यह कि इसे भी सीधे नहीं कहा जा रहा है। फिर भी यह प्रचार आज मेरे 10 में से नौ अखबारों की लीड है।

देशबन्धु की लीड राहुल गांधी का यह सवाल है कि, छात्रों पर पैलेट गन चलाने की मंजूरी किसने दी?  यह सवाल उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से पूछा है। राहुल गांधी को पहले पन्ने पर इतनी आसानी से जगह नहीं मिलती रही है। इसलिए आज यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है लेकिन लीड भी नहीं है। टास्क फोर्स वाली खबर अलग अखबारों में अलग तरीके से है। उदाहरण के लिए द टेलीग्राफ में यह दो कॉलम की लीड है और फ्लैग शीर्षक में बताया गया है कि प्रधानमंत्री ने घोषणा तो की लेकिन प्रधान के इस्तीफे और छात्रों के आंदोलन पर मौन रहे। सरकार की तारीफ में कुछ अखबारों ने बताया है कि नीलेकणि वही हैं जिन्होंने आधार तैयार किया था। तथ्य यह है कि उनका बनाया आधार मतदाता सूची में नाम के लिए बेकार है। मतदाता सूची में लॉजिकल डिसक्रिपेंसी पकड़ने या निकालने वाले सॉफ्टवेयर या उसे बनाने वाले का नाम ही नहीं बताया गया फिर भी उसके आधार पर वोट नहीं दे सकने वालों से कहा जा चुका है कि अगली बार वोट दे लेना और यह सब जिनके भारत का मुख्य न्यायाधीश रहते हुआ है वे दो बार ऐसी बातें कह चुके हैं जिसका उन्हें स्पष्टीकरण देना पड़ा है अपने ही फैसले में सुधार करना पड़ा है। अब तो अदालत की कार्यवाही के प्रसारण की कॉपी के प्रसारण पर प्रतिबंधित लगा दिया गया है तो नीलेकणि महान या मुख्य न्यायाधीश और अगर दोनों हों तो भी जनता को क्या लाभ जब बंगाल में भाजपा जबरन चुनाव जीत गई। इसके बावजूद टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने परीक्षा में सुधार के लिए आधार के आर्किटेक्ट को चुना। आप जानते हैं कि कॉपी जांचने के लिए जिस कंपनी को चुना गया था उसे टेंडर की शर्तों के योग्य बनाने के लिए शर्तें तीन बार बदली गई थीं और इसका खुलासा 12वीं के बच्चे ने किया था। ऐसे में खबर क्या है और क्यों है समझना मुश्किल नहीं है। उदाहरण के लिए, दो दिन पहले खबर थी कि सड़क किनारे कीचड़ और नाला खुला होने के कारण कार गिर गई और उसे चला रहे युवक की मौत हो गई। आज उसी अखबार में खबर है कि जंत मंतर की सफाई हो गई। उसे सामान्य बना दिया गया है।

द हिन्दू के अनुसार, नया बना टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ और टेक्नोलॉजी पर आधारित बनाने के लिए उपाय सुझाएगा; इसके सदस्यों में इसरो के पूर्व चेयरमैन सोमनाथ और आईआईटी-एम के डायरेक्टर कामाकोटी शामिल हैं। प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पदभार संभाला और समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की लगभग अलग और दूसरी खबर है। इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एनटीए प्रमुख और शिक्षा मंत्रालय के शिखर के अधिकारियों से मुलाकात की। इस खबर का जो हिस्सा पहले पन्ने पर है उसमें यह नहीं बताया गया है कि एनटीए प्रमुख उनके कार्यालय में गए या शिक्षा मंत्री एनटीए कार्यालय में गए। दोनों संभव है, अंग्रेजी में जो लिखा है उससे पता नहीं चला और समझने के लिए मैं पहले पन्ने की पूरी खबर पढ़ गया पर उसमें इसका जिक्र नहीं है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने पैलेट गन के शिकार 25 साल के प्रशांत की आप बीती मुख्य खबर के साथ प्रकाशित की है। उसने कहा है कि शुरु में उसे लगा था कि उसका हाथ चला जाएगा।    आज की खबरों में मीराबाई को कॉमनवेल्थ गेम्स में वेट लिफ्टिंग में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक मिला शामिल है। यूक्रेन के ओडेसा में जहाज पर हमले के बाद दो भारतीय लापता जैसी खबरें होने के बावजूद सरकार का प्रचार लीड है तो आप खुद देखिए कि अखबार कैसे खबरें छोड़कर सरकारी प्रचार में हैं। मैंने कोशिश की है कि एक खबर का उल्लेख एक ही बार करूं। दूसरी बॉर तब लिखा है शीर्षक में कोई खेल था।    

देशबन्धु

1. राहुल गांधी ने अमित शाह को पत्र लिखकर पूछा – छात्रों पर पैलेट गन चलाने की मंजूरी किसने दी। सादे कपड़ों में पीटते दिखाई देने वाले पुलिसकर्मी थे या स्वयंसेवक।

2. छात्रों पर हुई बर्बर हिंसा ने लोकतंत्र को तार-तार किया

3. तेजस्वी ने बिहार सरकार को चेताया – छात्रों की रिहाई नहीं हुई तो होगा बड़ा आंदोलन

4. मणिपुर में भारी मात्रा में हथियार बरामद

5. सरकार ने चंदा चोरी की जांच के लिए एसआईटी का पुनर्गठन किया

6. दिल्ली-एनसीआर में अगले कई दिनों तक बारिश के आसार

अमर उजाला

1. मेरठ एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 29 से भारी वाहन नहीं

2. ऑनलाइन दान करते ही रामभक्तों को अब चुरंत रसीद

दैनिक भास्कर

1. कॉमनवेल्थ गेम्स के 96 साल के इतिहास में पहली बार… वेट लिफ्टिंग में लगातार तीसरा गोल्ड जीतने वाली भारतीय मीराबाई चानू ने एक दिन में तीन रिकार्ड बनाए

नवोदय टाइम्स

1. परीक्षा सुधार के लिए कार्यबल की घोषणा प्रधानमंत्री ने की लेकिन खबर है, ‘फर्स्ट डे… फुल एक्शन’ में शिक्षा मंत्री जोशी!

2. पाकिस्तान से बात केवल पाक अधिकृत कश्मीर पर : राजनाथ 

द टेलीग्राफ

1. प्रधानमंत्री ने नीलेकणि के नेतृत्व में सुधार पैनल की घोषणा की लेकिन प्रधान के इस्तीफे, छात्रों के आंदोलन पर मौन

2. प्रदर्शनकारियों के लिए विधि सहायता

3. अमित शाह से कहा गया, ‘बर्बर’

4. बंगाल भाजपा ने रैली को सांप्रदायिक पुट दिया

5. प्रहलाद जोशी की चुनौतिया :’नया क्षेत्र’, कार्यभार

दि एशियन एज

1. राहुल गांधी ने ‘छात्रों पर गोली चलाने’ के लिए कार्रवाई की मांग की, अमित शाह को पत्र लिखा। पेपर लीक विरोधी विधेयक पर चर्चा आज; विपक्ष का भिड़ना तय

2. मोदी ने करगिल के वीरों की प्रशंसा की; रक्षा, खेल और अंतरिक्ष क्षेत्र में उपलब्धियों की तारीफ की  

3. 36 दिनों के आंदोलन के बाद सीपी, जंतर मंतर पर शांति लौटी

द हिन्दू

1. केंद्र ने भारतीय नाविकों को ‘अस्थिर’ ब्लैक सी में नौकरियों को लेकर चेतावनी दी

2. ईरान ने कहा कि वह अमेरिका पर ‘जवाबी हमले’ रोक रहा है।

3. उपचुनाव से पहले भाजपा अनुचित तरीकों का इस्तेमाल कर रही है : प्रशांत किशोर

दि इंडियन एक्सप्रेस

1. यूक्रेन पोर्ट पर चार भारतीयों के साथ एक और जहाज को निशाना बनाया गया, विदेश मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी की। भारतीय दूतावास ने कहा कि दो के सुरक्षित होने की पुष्टि हो गई है, दो अन्य के बारे में सूचना का इंतजार है। करीब एक हफ्ते में ऐसी तीसरी घटना।

2. सदन में विपक्ष की योजना : प्रदर्शन पर बर्बर कार्रवाई के लिए शाह पर निशाना साधना

3. प्रदर्शनकारियों पर हमले की सीआरपीएफ की जांच, आरएएफ जवान ने पेलेट गन से 7 राउंड फायर किए, 5 प्रदर्शनकारियों को लगे : जांच 

टाइम्स ऑफ इंडिया

1. सीपीसीबी ने नए ‘हरित’ पटाखों को खतरनाक बताया कहा इसमें प्रतिबंधित रसायन के उपयोग की शिकायत है।

2. असहमति के लिए सार्वजनिक स्थान कम हो रहा है

3. धर्मेन्द्र प्रधान ने आंदोलन के पहले ही दिन इस्तीफे की पेशकश की थी – कैलाश विजयवर्गीय ने फरमाया

4. सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टैंक में सफाई कार्य कराने वाले ठेकेदार को बचाने के लिए गार्ड कूदा, दोनों मारे गए

हिन्दुस्तान टाइम्स

1. सिद्धारमैया ने चुनाव लड़ने की संभावना से इनकार किया, स्वास्थ्य और भ्रष्ट राजनीति को कारण बताया।  

अमर उजाला में आज सेकेंड लीड का शीर्षक है – मेरठ एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 29 से भारी वाहन नहीं। यह तैयारी कावड़ यात्रा के लिए है और खबर के अनुसार रुट डायवर्जन प्लान तैयार कर लिया गया है। इस खबर के साथ छपी एक खबर का शीर्षक है, हाईवे की एक लेन सिर्फ कांवड़ियों के लिए होगी। सड़क पर कुछ देर नमाज नहीं पढ़ सकते हैं लेकिन एक्सप्रेस-वे पर भारी वाहन रोके जा सकते हैं, कांवड़ियों के लिए ‘सिर्फ’ एक लेन होगी और  डायवर्जन तो हो ही सकता है। खबर में बताया गया है कि कहां से कैसे डायवर्जन होगा।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।   

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