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उत्तर प्रदेश

गाजीपुर में करंडा के एबीएसए रविन्द्र सिंह की करतूतों का काला चिट्ठा खुला — भ्रष्टाचार की हर हद पार, अब मुख्यमंत्री कार्यालय की नजर में!

सुजीत सिंह प्रिंस-

गाजीपुर। शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में भी अब भ्रष्टाचार की दीमक लग चुकी है। करंडा शिक्षा क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी (एबीएसए) रविन्द्र सिंह पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों की लंबी फेहरिस्त सामने आई है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ गाजीपुर की ओर से इनकी शिकायत सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई, जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विशेष सचिव श्री विशाल भारद्वाज ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मामला अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) को अग्रसारित कर दिया।

शिकायत में बताया गया कि रविन्द्र सिंह द्वारा शिक्षा विभाग की योजनाओं में भारी अनियमितता बरती जा रही है। विभिन्न स्कूलों को शैक्षिक सामग्री, खेल किट, फॉर्म आदि की आपूर्ति में गड़बड़ी, तथा शासनादेशों की अनदेखी कर मनमाने ढंग से आदेश पारित किए गए।

इतना ही नहीं, पूर्व में भी इनके कई विवादित फैसले शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बने। जैसे:

सीसीएल (चाइल्ड केयर लीव) की छुट्टी पर गई महिला शिक्षिका की अनुपस्थिति में ये स्वयं बीएसए (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी) बन बैठे और अवैध रूप से स्वीकृति आदेश जारी कर दिए।

एक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने शिक्षा मित्र को अनुपस्थित दिखाकर रिपोर्ट भेजी, लेकिन एबीएसए साहब ने रिपोर्ट में कांट-छांट कर उसे उपस्थिति में बदल दिया और वेतन पास कर दिया।

इन कृत्यों से शिक्षक समाज में गहरी निराशा और आक्रोश व्याप्त है। शिक्षकों का कहना है कि यदि इस पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे ईमानदार शिक्षकों का मनोबल टूटेगा और शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा डगमगा जाएगा।

अब सभी की निगाहें बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यवाही पर टिकी हैं — क्या दोषी पर गिरेगी गाज? या फिर भ्रष्टाचार को एक बार फिर सिस्टम ढक लेगा?

शिक्षा को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए यह एक अग्निपरीक्षा है।

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