सुजीत सिंह प्रिंस-
गाज़ीपुर। बेसिक शिक्षा विभाग के करण्डा ब्लॉक से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां के खंड शिक्षा अधिकारी रवीन्द्र सिंह पटेल पर रिश्वत लेकर बाल्य देखभाल अवकाश (सीसीएल) की फाइलें खुद ही स्वीकृत करने का आरोप है — जबकि यह अधिकार केवल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को प्राप्त है।

कैसे होती है स्वीकृति की प्रक्रिया?
शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, किसी शिक्षिका द्वारा सीसीएल के लिए आवेदन सबसे पहले प्रधानाध्यापक के पोर्टल पर किया जाता है। इसके बाद प्रधानाध्यापक उस आवेदन को खंड शिक्षा अधिकारी को अग्रसारित करते हैं। खंड शिक्षा अधिकारी आवेदन की जांच कर उसे बीएसए को अंतिम स्वीकृति के लिए भेजते हैं।
लेकिन करण्डा (ग़ाज़ीपुर) में क्या हो रहा है?
सूत्रों के मुताबिक, एक शिक्षिका द्वारा जब सीसीएल के लिए 20 जनवरी को आवेदन किया गया, तो खंड शिक्षा अधिकारी रवीन्द्र सिंह पटेल ने यह कहकर आवेदन निरस्त कर दिया कि 25 जनवरी से परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। लेकिन जब शिक्षिका ने कथित तौर पर उन्हें रिश्वत दी, तो पटेल ने नियमों को ताक पर रखकर 22 जनवरी को पुनः आवेदन मंगवाया और अपने स्तर से ही अवकाश स्वीकृत कर दिया।
क्या यह एकमात्र मामला है?
स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि यदि खंड शिक्षा अधिकारी करंडा के पोर्टल का ऑडिट कराया जाए, तो ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं, जहां पहले अवकाश आवेदन को अस्वीकृत किया गया और बाद में रिश्वत मिलने पर उसे स्वीकृत कर दिया गया। आरोप यह भी है कि वे स्वयं विद्यालय पहुंचकर शिक्षिकाओं से अवकाश के बदले पैसों की मांग करते हैं।
BSA हेमंत राव ने क्या कहा?
सीसीएल अवकाश को लेकर पूछे गए सवाल पर बीएसए हेमंत राव ने कहा कि इस प्रकार की छुट्टियों की अनुमति देने का अधिकार बीएसए के पास होता है। हालांकि, रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित एबीएसए रविन्द्र पटेल ने ही स्वयं सीसीएल (चाइल्ड केयर लीव) की अनुमति प्रदान की है। इस विसंगति पर जब बीएसए से पुनः सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की गई है।
खबर का असर
भड़ास4मीडिया पर खंड शिक्षा अधिकारी रविंद्र सिंह पटेल के कारनामों की खबर के प्रकाशन के बाद विभागीय अधिकारियों में खलबली मच गई है। सूत्रों का दावा है कि अब बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी, पुरानी और मनगढ़ंत शिकायतों के सहारे शिक्षक महासंघ के पदाधिकारियों पर कार्रवाई की योजना बना रहे हैं, ताकि आवाज़ उठाने वालों का मनोबल तोड़ा जा सके।
देखें छुट्टी की स्वीकृति….


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