ज्ञानेंद्र शुक्ला-
…..तो मासूम सी ग़लतफ़हमी में मुकदमा दर्ज हुआ, जांच-जांच की कबड्डी खेली गई, आईएएस सस्पेंड हुआ! अब मुकदमा रद्द। समरथ को नहीं दोष गुसाईं!!! जब मामला सुर्ख़ियों में था तब चर्चा थी कि ‘बड़के वाले’ बाबूओं की गैंगवार का नतीजा था ये प्रकरण।
-कोर्ट के सामने शिकायतकर्ता ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि उसने शिकायत गलतफहमी के आधार पर दर्ज कराई थी।
-एक करोड़ की रिश्वत मांगने के हाई-प्रोफाइल केस में आरोपी निकांत जैन कोअब महा राहत मिल गई है। लखनऊ हाईकोर्ट ने अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है।

-यूपी की नौकरशाही में भूचाल लाने वाले इस मामले में आरोप था कि सोलर उपकरण बनाने वाली कंपनी से मोटी रकम की मांग की गई थी। आईएएस अभिषेक प्रकाश सस्पेंड किए गए। एसटीएफ़ जांच भी हुई।
-फ़िलहाल बिचौलिये नितांत जैन को राहत की ऑक्सीजन मिली है तो आईएएस की बहाली का रास्ता साफ़ हो गया है!
-वैसे इन आईएएस महोदय पर डिफेंस कॉरिडोर की ज़मीन संबंधी अनियमितता के भी आरोप हैं अभी।
विवेक त्रिपाठी-
350 करोड़ रुपए की घूसखोरी का मामला खत्म..इन्वेस्ट यूपी के सीईओ आईएएस अभिषेक प्रकाश के करीबी निकांत जैन पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए एफआईआर करने वाला पीछे हटा..
शिकायत करने वाले एसएईएल सोलर पॉवर कंपनी के अधिकारी विश्वजीत दत्ता ने हाईकोर्ट में कहा कि उसने गलतफहमी में एफआईआर दर्ज कर दी थी..विश्वजीत दत्ता ने सोलर प्लांट लगाने के लिए इन्वेस्ट यूपी में संपर्क किया था. 7000 करोड़ रुपए की लागत वाले प्लांट की अनुमति देने के लिए उससे 5 प्रतिशत यानि लगभग 350 करोड़ रुपए रिश्वत मांगी गई.
शिकायतकर्ता का कहना था कि उसने निकांत जैन को एक करोड़ रूपया एडवांस भी दिया था. मामला सीएम योगी के संज्ञान में आया तो निकांत जैन के खिलाफ गोमतीनगर थाना में एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया..
आईएएस अभिषेक प्रकाश को सीएम ने सस्पेंड कर दिया. पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई.. अभिषेक प्रकाश से नियुक्ति विभाग ने जवाब-तलब किया.. अभिषेक प्रकाश को चार्जशीट सौंपते हुए उनसे जवाब मांगा गया..
इसी बीच बीते दिनों शिकायतकर्ता के बयान के बाद हाईकोर्ट ने आईएएस अभिषेक प्रकाश के करीबी निकांत जैन पर दर्ज एफआईआर रद्द करने का आदेश दे दिया..
यूपी की ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मचाने वाले इस मामले का फिलहाल पटाक्षेप हो गया है..अब अभिषेक प्रकाश की जल्द बहाली होगी..
मो. कामरान-
बड़े लोग बड़ी बड़ी बातें, अभिषेक प्रकाश का कुछ होगा नहीं, जब हमने कहा तो लोगों ने यकीन नहीं किया, आज हर तरफ यही चर्चा है,, जिसने आरोप लगाया 350 करोड़ की घूसखोरी का वही बयान से पलटा,
माननीय उच्च न्यायालय का भी उच्च निर्णय आया, सभी आरोप सिरे से खारिज, मामला भी निस्तारित, फिलहाल इस मामले पर पटाक्षेप हो गया है और आईएएस अभिषेक प्रकाश की जल्द बहाली के संकेत हैं।

रंजीत यादव-
अभिषेक प्रकाश केस में FIR रद्द भले हो गई, लेकिन सवाल ज़िंदा रहेंगे … इन्वेस्ट यूपी के निलंबित CEO रहे IAS अभिषेक प्रकाश से जुड़े मामले में नया मोड़ आया है।
उनके करीबी बताए जा रहे निकांत जैन की FIR हाईकोर्ट में वादी के गलतफहमी में शिकायत हुई थी के बयान के आधार पर FIR रद्द हो गई। लेकिन सवाल ये है-
- क्या FIR रद्द होना,आरोपों का अंत होता है?
- या फिर सिस्टम की किसी गहरी कहानी की शुरुआत?
खबरों की माने तो ias अभिषेक प्रकाश जहां-जहां तैनात रहे, वहां अकूत संपत्ति खड़ी करने की चर्चाएं रही हैं। लखीमपुर और बरेली में 700 बीघा ज़मीन, लखनऊ में कई बंगले,और ब्रह्मोस मिसाइल फैक्ट्री के नाम पर कथित 20 करोड़ के घोटाले जैसे गंभीर आरोप हैं।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रहते हुए अभिषेक प्रकाश पर कई बिल्डरों को फायदा पहुंचाने और मनमाने तरीके से सीलिंग व लाइसेंस जारी करने के आरोप लगे थे।
ये सब सवाल बनकर आज भी खड़े हैं। आज FIR रद्द हुई है, कल बहाली की चर्चाएं हैं, लेकिन जवाबदेही का क्या? अब लोग कहेंगे पैसे हैं तो देश में कुछ भी संभव है।


