हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस उस वक्त चर्चा का विषय बन गई, जब एसपी चंद्रमोहन ने पत्रकारों और यूट्यूबर्स पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “माइक नहीं, उस्तरे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पत्रकारिता के नाम पर तथ्यों की बजाय सनसनी और दबाव की राजनीति कर रहे हैं। एसपी की इस टिप्पणी के बाद मीडिया की भूमिका, यूट्यूब पत्रकारिता और जिम्मेदार रिपोर्टिंग को लेकर नई बहस छिड़ गई है। आखिर एसपी चंद्रमोहन ने ऐसा क्यों कहा और प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसा क्या हुआ कि उन्हें मीडिया पर खुलकर नाराजगी जाहिर करनी पड़ी?
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अमिताभ श्रीवास्तव-
हरियाणा में कुरुक्षेत्र के एसपी चंद्रमोहन ने प्रेस कांफ्रेस बुलाई और उसमें मीडिया को बुरी तरह रगड़ दिया। उन्होंने कहा कि ये माइक नहीं उस्तरे हैं और मानव सभ्यता में आपका विकास नहीं हुआ।
मामला लाडवा थाने का है जहां के दरोगा, एक पुलिसकर्मी और एक होमगार्ड पर थाने में एक युवक के साथ कुकर्म के आरोप लगे थे। युवक को बोन कैंसर बताया गया था। इस मामले में तीनों पुलिसकर्मी सस्पेंड कर दिए गए और फिर एसआईटी जांच हुई।
15 दिनों में जब जांच पूरी हुई तो आरोप झूठे निकले। इस पर एसपी बिफरे हुए थे। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अखबारों और यूट्यूब चैनल ने एकतरफा खबरें चलाई और पुलिस को बदनाम किया। पुलिस से बात करने की जरूरत भी नहीं समझी। यदि कोई मीडिया के लोगों पर इस तरह के आरोप मढ़े तो उन्हें कैसा लगेगा।
पुलिस के मुताबिक युवक नशे में बाइक चला रहा था। पुलिस ने उसे पकड़ा। थाने ले आई। रातभर लॉकअप में रहा जिसमें सीसीटीवी लगे थे। उसे 10 मिनट बाहर निकाला गया तो उसके साथ मारपीट हुई। इसकी वजह थी कि वो पुलिस से उलझ रहा था और परेशान कर रहा था।
उसकी मेडिकल रिपोर्ट में कोई कुकर्म साबित नहीं हुआ। पीजीआई चंडीगढ़ की रिपोर्ट के अनुसार उसे कोई कैंसर नहीं। पुलिसकर्मियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया गया जिसमें कुछ गलत नहीं निकला जबकि युवक ने लाई डिटेक्टर टेस्ट से मना कर दिया। वो तो मेडिकल कराने को भी तैयार नहीं था। आपको क्या लगता है?


