संजय कुमार सिंह-
गडकरी जी, ई10 में क्या बुराई है, ई20 की जल्दी क्यों? दोनों क्यों नहीं? पूरी कोशिश के बावजूद मैं इस इंटरव्यू को एक बार में पूरा नहीं देख पाया। हालांकि, कई बार में देख ही गया। वे रिपोर्टर की बात नहीं मानते हैं और उनका जवाब या तो बेमतलब है, सब जानते हैं या जबरदस्ती का ज्ञान है। इसमें माइलेज नापने का नया तरीका सबसे हास्यास्पद है। कह रहे हैं कि मशीन से ही चेक होता है। मशीन किसी के घर पर नहीं होती है। यह सब तब चुनौती दी थी कि एक भी, जी हां एक भी शिकायत ले आइए। फिर तहसीन पूना वाला ने कहा कि वे ऐसे लोगों के साथ मिलना चाहते हैं पर दिल्ली पुलिस मना कर रही है।
एबीपी न्यूज चैनल की मेघा प्रसाद के इस इंटरव्यू के साथ टाइम्स ऑफ इंडिया में भी नितिन गडकरी ने खुद को सही साबित करने की कोशिश की है। हालांकि वहां भी यह सब है। वे ई20 का विरोध करने वालों को डरा-धमका रहे हैं। गधा कह चुके हैं। मूल बात यह है कि ई10 से शिकायत नहीं थी, शिकायतें ई20 के बाद बढ़ी हैं। नितिन गडकरी मानने को तैयार नहीं है। बचाव कर रहे हैं लेकिन फंस जाएं तो कहते हैं कि वे परिवहन मंत्री हैं, पेट्रोलियम मंत्री से पूछिए। लेकिन पेट्रोलियम मंत्री नहीं हैं तो ई20 का बचाव क्यों कर रहे हैं?
भाजपाई प्रचारक कह रहे हैं कि तमाम अच्छाइयों के लिए पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना जरूरी और जायज है। इसे बढ़ाते-हुए 100 प्रतिशत तक किया जाना है। हाल में ऐसी गाड़ी आने की घोषणा और इसका श्रेय लेने की कोशिश भी की गई। कुल मिलाकर, ईंधन की जगह इथेनॉल के प्रयोग के प्रचारक, ब्रांड एम्बैसडर नितिन गडकरी ही हैं। उनका बेटा इथैनॉल का कारोबार करता है इसलिए इसे बेटा बढ़ाओ योजना कहा जाता है पर नितिन गडकरी कहते हैं कि व्यापार ‘बहुत कम’ है। उसपर लिखा, गूगल से भी डाटा लिया तो मैं केस करूंगा।
एक यूट्यूबर ने अपनी मर्सिडीज के मामले में शिकायत की लेकिन उसे वापस ले लिया। अब भाजपाई प्रचारकों को मौका मिल गया – कहने लगे भ्रम फैलाया जा रहा है। मेघा प्रसाद से इंटरव्यू में एक पत्रकार मित्र का उदाहरण दिया है। बाद में पता चला कि वे डीजल गाड़ी की शिकायत कर रहे थे और डीजल में तो इथेनॉल मिलाया ही नहीं जाता है। जाहिर है, उनकी परेशानी ईथेनॉल मिलाने से खराबी को लेकर है, इसीलिए वे बचाव कर रहे हैं और चाहते हैं कि इसे बेटा बढ़ाओ योजना नहीं कहा जाए। लेकिन खराबियों को टाल देना और शिकायत करने वालों को धमकाना गंभीर है।
मर्सिडीज का मामला मैं नहीं जानता लेकिन तहसीन पूना वाला जो मामला बता रहे हैं उसे क्यों नहीं सुन रहे हैं, पता नहीं है। एक ऑडी वाले ने हिसाब लगाकर बताया है कि साल में 10,000 किलोमीटर गाड़ी चलाने का उनका खर्च 64,000 रुपया बढ़ जाएगा। अन्य परेशानियां अलग।
पटना के यू ट्यूबर मनीष कश्यप का जिक्र करते हुए बताते हैं कि टोयोटा ने चेक किया पेट्रोल में पानी मिला था। टोयोटा ने कहा है मिलावटी (कंटामिनेटेड) पेट्रोल इस्तेमाल किया गया था। सवाल है कि कंटामिनेटेड पेट्रोल आया कहां से? बाजार में मिल क्यों रहा है और मिलता रहा तो गाड़ियां खराब होती रहेंगी?
खबर थी कि टोयोटा ने मनीष कश्यप पर एफआईआर करवाई है। यह भी कि नागपुर में बीजेपी सोशल मीडिया सेल के पदाधिकारी की शिकायत पर चार यूट्यूबर्स के खिलाफ एफआईआर हुई है। नितिन गडकरी मारुति का भी उदाहरण देते हैं। मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, राहुल भारती ने कहा है कि 2010 के शुरुआती मॉडल्स (जिनमें ई10 इस्तेमाल होता था), उनमें भी ई20 ईंधन डालने पर किसी तरह के नुकसान का कोई ट्रेंड सामने नहीं आया है। लेकिन ई10 में ई20 क्यों डाला जाए या क्यों डालना चाहिए या कोई फर्क नहीं है तो ई10 क्यों लिखा है, ई20 क्यों नहीं लिख दिया जाता जैसे सवालों का जवाब नहीं है।
राहुल भारती ने यह भी कहा है कि अक्सर ईंधन में पानी की मिलावट से इंजन में समस्या आती है, जिसे लोग इथेनॉल से जोड़ देते हैं। पेट्रोल में पानी कोई जानबूझकर नहीं मिलाएगा और मिला पाया गया है तो कारण यह भी हो सकता है कि इथेनॉल वाष्प की मौजूदगी में पेट्रोल से अलग होकर वाष्प या पानी से मिल जाता है। किसी एक मामले में इसे साजिश कहा जा सकता है। नितिन गडकरी ने इसे अपने और सरकार के खिलाफ साजिश कहा है लेकिन गाड़ियों के लिए यह समस्या है जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
उधर, मनीष कश्यप ने कहा है कि वे अपनी शिकायत पर कायम हैं। दूसरी ओर, नितिन गडकरी या भारत सरकार देश में ई20 ही बेचने पर आमादा है। ई10 से ठीक चल रहा था पर नहीं। यह नितिन गडकरी की कीमत पर भाजपा का हेडलाइन मैनेजमेंट भी हो सकता है। देश में ऑटोमोबाइल उद्योग को चौपट कर सकता है। कंपनियों पर सरकारी दबाव स्पष्ट है।



