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ज़ी समूह का विदेशी बॉन्ड चुकाने का रास्ता साफ, RBI से मंजूरी!

नई दिल्ली। ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से बड़ी नियामकीय मंजूरी मिल गई है। आरबीआई ने कंपनी को 23.9 मिलियन डॉलर (लगभग 239 लाख डॉलर) के बकाया फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCBs) को रिडीम (भुगतान कर समाप्त) करने और 215.1 मिलियन डॉलर की अप्रयुक्त फंडिंग प्रतिबद्धता (Undrawn Commitment) को रद्द करने की अनुमति दे दी है।

कंपनी ने 13 जुलाई को शेयर बाजार को दी गई सूचना में इस मंजूरी की जानकारी दी। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि बॉन्ड रिडेम्पशन की प्रक्रिया कब पूरी होगी और क्या इसके लिए अभी कोई अन्य संविदात्मक औपचारिकताएं शेष हैं।

मार्च में बोर्ड ने लिया था फैसला

यह मंजूरी 26 मार्च 2026 को ज़ी के बोर्ड द्वारा लिए गए उस फैसले के बाद आई है, जिसमें नियामकीय और संविदात्मक मंजूरी के अधीन FCCBs को रिडीम करने और शेष प्रतिबद्धता रद्द करने का निर्णय लिया गया था।

कंपनी के अनुसार, यह फैसला बॉन्डधारकों के अनुरोध पर लिया गया था। निवेशकों ने इसके पीछे मौजूदा भूराजनैतिक परिस्थितियों (Geopolitical Situation) और अपनी पूंजी आवंटन रणनीति (Capital Allocation Strategy) को कारण बताया था। उस समय ज़ी ने कहा था कि इस कदम से कंपनी की ट्रेजरी स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, हालांकि इसका वित्तीय आकलन सार्वजनिक नहीं किया गया।

2024 में शुरू हुई थी 239 मिलियन डॉलर की योजना

ज़ी ने जुलाई 2024 में निजी प्लेसमेंट के जरिए 239 मिलियन डॉलर तक के FCCBs जारी करने की योजना को मंजूरी दी थी। यह बॉन्ड Resonance Opportunities Fund, St. John’s Wood Fund Limited और Ebisu Global Opportunities Fund को जारी किए जाने थे।

पूरी योजना को 10 चरणों (Series) में लागू किया जाना था। इन बॉन्ड्स पर 5% वार्षिक ब्याज, 10 वर्ष की परिपक्वता अवधि (Maturity) और 160.20 रुपये प्रति शेयर के कन्वर्जन प्राइस पर शेयरों में बदलने का विकल्प रखा गया था।

उस समय की विनिमय दर के अनुसार, इस पूरी योजना का मूल्य लगभग 1,997.22 करोड़ रुपये था।

सिर्फ 23.9 मिलियन डॉलर ही जुटा सकी थी कंपनी

हालांकि, कंपनी को तीनों निवेशकों से कुल 23.9 मिलियन डॉलर ही प्राप्त हुए और अगस्त 2024 में उसी राशि के बराबर FCCBs जारी किए गए। यह प्रस्तावित कुल फंडिंग का केवल 10 प्रतिशत था।

शेष 215.1 मिलियन डॉलर की राशि कभी जारी ही नहीं की गई और वह केवल एक अप्रयुक्त प्रतिबद्धता बनी रही।

क्या होगा इस मंजूरी का असर?

आरबीआई की मंजूरी के बाद ज़ी अब:

  • 23.9 मिलियन डॉलर के जारी किए गए FCCBs का भुगतान कर उन्हें समाप्त करेगी।
  • 215.1 मिलियन डॉलर की अप्रयुक्त फंडिंग सुविधा को रद्द कर देगी।

इससे कंपनी पर 5% ब्याज वाले FCCBs की देनदारी समाप्त हो जाएगी और ये बॉन्ड भविष्य में इक्विटी शेयरों में परिवर्तित नहीं हो सकेंगे।

शेयरधारकों के लिए भी राहत

यदि पूरी 239 मिलियन डॉलर की योजना लागू होती और सभी बॉन्ड 160.20 रुपये प्रति शेयर की दर से परिवर्तित होते, तो कंपनी को लगभग 12.47 करोड़ नए शेयर जारी करने पड़ते।

इनमें से केवल 23.9 मिलियन डॉलर के बॉन्ड लगभग 1.25 करोड़ शेयरों में परिवर्तित हो सकते थे, जबकि शेष 215.1 मिलियन डॉलर की अप्रयुक्त प्रतिबद्धता से लगभग 11.22 करोड़ अतिरिक्त शेयर जारी होने की संभावना थी।

अब इस प्रतिबद्धता के रद्द होने से संभावित इक्विटी डाइल्यूशन (हिस्सेदारी में कमी) का बड़ा जोखिम भी समाप्त हो जाएगा।

हालांकि, कंपनी ने अभी यह जानकारी साझा नहीं की है कि रिडेम्पशन पर कुल कितना भुगतान किया जाएगा, इसमें ब्याज सहित देनदारियां कितनी होंगी और पूरी प्रक्रिया किस तारीख तक पूरी होने की उम्मीद है।

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