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सुख-दुख

विनोद कापड़ी और साक्षी जोशी की तरफ़ से यशवंत पर किए गए मुकदमे हाईकोर्ट से क्वैश!

वरिष्ठ पत्रकार से फ़िल्म निर्देशक बन चुके विनोद जी को मैं अब भड़ास के संस्थापक और निर्देशक के रूप में देखता हूँ- यशवंत

Three men wearing glasses posing for a selfie outdoors, with a concrete building and trees in the background.
Two men wearing glasses take a selfie indoors; one in a patterned shirt, the other in a light blue shirt holding a pen.

यशवंत सिंह-

हमने क़िस्से को यूँ मुख्तसर कर लिया…

हाईकोर्ट से सारे केस क्वैश हो गए। इसके लिए नोएडा के लोअर कोर्ट में Vinod Kapri सर को कई बार आना पड़ा। साक्षी जोशी जी भी कई कई बार कोर्ट आईं। जज को ये बताने के लिए कि हम लोगों के बीच अब कोई झगड़ा नहीं है, ये केसेज़ ख़त्म करना चाहते हैं। हाईकोर्ट और लोअर कोर्ट के बीच मैं फुटबॉल बना रहा। लेकिन धन्य हैं हमारे दोनों वकील, नोएडा के Bhupendra Mangal जी और प्रयागराज के Ramesh Kumar जी। ये लोग एक्स्ट्रा एफर्ट कर जी-जान से जुटे रहे।

अंत भला तो सब भला!

इस प्रक्रिया के दौरान विनोद सर और मैं, दोनों लोग कई-कई घंटे तक साथ रहे, सुख-दुख बतियाए, खाए-पिए। लगा ही नहीं कि कभी हमारा विवाद हुआ था।

कुछ झगड़े सिर्फ इसलिए होते हैं कि उनका होना हमारी कुंडली / भाग्य में लिखा होता है।

अब पीछे मुड़कर देखता और सोचता हूँ तो लगता है, अरे मैं आख़िर किस बात पर लड़ता जा रहा था?

पर इस लड़ाई ने मुझे बहुत अपग्रेड किया। भड़ास की ख्याति और कुख्याति फैली, साथ ही मेरी भी। ‘जानेमन जेल’ किताब आई। चरम दुख में एक्स्ट्रा ज़ूम हो चुके जीवन के एक-एक पिक्सेल को नज़दीक से देखने-समझने का मौक़ा मिला।

एक बात पॉजिटिव टोन में कहना चाहता हूँ। एकदम सच कहूँ तो वरिष्ठ पत्रकार से फ़िल्म निर्देशक बन चुके विनोद जी को मैं अब भड़ास के संस्थापक और निर्देशक के रूप में देखता हूँ, जिनके चलते भड़ास पैदा हुआ, फला फूला, नामवर होता गया।

बुजुर्ग पिता जो उम्र जनित कई क़िस्म की व्याधियों से दो-चार हैं, गंभीर बीमारी से जूझ रहे चाचाजी, अंधेपन समेत कई किस्म की उम्र जनित बीमारियों का शिकार डॉगी… इनके बीच विनोद कापड़ी जी, इन सबके जीवन को सरस और स्वस्थ बनाने की कोशिश करते हुए। नारियल समान हृदय वाला आदमी जो बाहर से फौलादी और अंदर से एकदम तरल। ऐसे विनोद कापड़ी जी के साथ मुझे एकदिन बैठना है। जिस चीज के सेवन के बाद उसके असर में झगड़ा शुरू हुआ था, उसी चीज के सामूहिक सेवन के बाद उसके असर में झगड़ा खत्म होने का जश्न मनाना है। तो कब कहाँ बैठा जाए विनोद सर!

पहली तस्वीर – नोएडा कोर्ट में कंप्लेनेंट विनोद कापड़ी जी और वकील भूपेन्द्र मंगल जी के साथ अभियुक्त यशवंत सिंह सेल्फी लेते हुए। ऐसी सेल्फियाँ कचहरियों में आम नहीं होतीं!

दूसरी तस्वीर – प्रयागराज में अभियुक्त यशवंत का ग़म धुवें के ज़रिए बाँटते वरिष्ठ वकील कामरेड रमेश कुमार जी!

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