सुभाष सिंह सुमन-
गन्नाकरी उर्फ गंदा गैंडा ब्रो ने अपने लौंडे की कंपनी पर सवाल उठाने वालों को कोर्ट में घसीटने की धमकी दी है। इस धमकी से पब्लिक को इतना डर लग रहा है कि कल से जहाँ जगह दिख रहा, इस भाई को गरियाये पड़ी है। मैंने अब सार्वजनिक मंचों पर गरियाना कम कर दिया है, लेकिन कोर्ट देखने का मन भी बहुत हो रहा है। तो कुछ आंकड़े खोद लाया हूँ।
गन्नाकरी ब्रो का कहना है कि उसके एक लौंडे की कंपनी सियान एग्रो (जो शेयर बाजार में लिस्टेड है) का बिजनेस सिर्फ इथेनॉल का नहीं है। यह बात सच है। कायदे से यह FMCG कंपनी है। 2-4 प्रोडक्ट भी हैं इसके, जिनका बाजार महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ इलाके तक सीमित है।
लेकिन मैंने गन्नाकरी ब्रो की बातों का संज्ञान लिया। सियान के समतुल्य प्रोडक्ट पोर्टफोलियो वाली कुछ लिस्टेड कंपनियों के साथ उसकी तुलना की।
गन्नाकरी के लौंडे की कंपनी का शेयर बीते 3 सालों में ऑलमोस्ट 4,500% चढ़ा है। सेकेंड परफॉर्मर गोकुल एग्रो है, लेकिन 3 साल में 300% से कम ही रह जा रहा उसका मामला। बाकियों ने तो पैसे ही डूबाया है।
अब पूछना है कि बीते 3 सालों में E20 और बाप कनेक्शन के अलावा ऐसा क्या चमत्कार हुआ है, जिसके दम पर सियान का शेयर 4,500% चढ़ गया है?

गन्नाकरी ब्रो से दरख्वास्त रहेगी कि मेरे साथ कोटक बैंक, BSE और NSE पर भी मानहानि का केस डाले। मैं जो डेटा यूज कर रहा हूँ, कोटक का ट्रेडिंग ऐप दिखा रहा है और वो BSE-NSE से डेटा ले रहा है।
गन्नाकरी ब्रो के लौंडे की कंपनी सिआन एग्रो की थोड़ी और खुदाई करते हैं। आज (14 जुलाई को) बाजार बंद होने के बाद इसके एक शेयर का भाव रहा 1,548.95 रुपये। साल भर पीछे चलते हैं। 14 जुलाई 2025 को इसका एक शेयर था 455.85 रुपये का। मतलब एक साल का रिटर्न बन रहा है 240% का। अब ऐसे डेट-टू-डेट देखने पर पूरी फिलम नहीं दिख पा रही है, इसलिए थोड़ा और तोड़ते हैं। भाव अभी आया है 1,500 के पास। इससे पहले यह 3,600 के भी पार जा चुका है। पिछले साल अक्टूबर में इसने 3,633.15 रुपये का हाई बनाया था। कारणों की चीर-फाड़ आगे करेंगे। अभी कुछ और आँकड़े। पहले इसका नाम था Umred Agro Complex, जिसे बदलकर CIAN Agro Industries & Infrastructure किया गया दिसंबर 2015 में। अगर आपकी याद्दाश्त सही हो, तो याद होगा कुछ साल पहले पूर्ति घोटाले की बड़ी चर्चा हुई थी। यह अमृतलाल की सरकार बनने से पहले की बात है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 2013 में इसकी जाँच भी शुरू की थी। फिर कुछ ही समय में अमृतलाल ब्रो की सरकार बन गयी। आगे कुछ कहने की जरूरत नहीं। उस मामले में जिस पूर्ति एग्रोटेक का नाम आया था, वह पूर्ति एग्रोटेक अब सिआन एग्रो की सब्सिडियरी मने सहयोगी कंपनी है।
बीएसई पर मैं खोदते-खोदते पहुँचा हूँ 19 मार्च 2003 तक। इसका भाव तब दिख रहा है 1.65 रुपया। 09 अगस्त 2024 को इसका भाव दिख रहा है 41 रुपया। 08 अगस्त 2025 को है 399.50 रुपया। 52-वीक लो है 385.10 रुपया। 52-वीक हाई ऊपर बता ही चुका हूँ 3,633.15 रुपया। मतलब यह शेयर अभी अपने हाई के आधे से भी कम हो गया है, फिर भी इसका शुरू से अब तक का रिटर्न बन रहा है 95,548.48%। अगर शुरू से हाई को कंपेयर करें, तो एक समय यह 2,20,190% तक रिटर्न दे चुका है। अगस्त 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच में इसका रिटर्न बन रहा है 8,761%। इसको समझने के लिए और आसान गणित करते हैं। अगर किसी ने गन्नाकरी ब्रो की इस खानदानी कंपनी में मार्च 2023 में सिर्फ 100 रुपये लगाये होते और उसे अक्टूबर 2025 में बेचा होता, तो भाई को प्रॉफिट मिलता 2,20,090 रुपये का। अगर 5,000 रुपये लगा देता, तो करोड़पति ही बन जाता।
ऐसे परफॉर्मेंस के लिए ही वर्ड यूज होता है एस्ट्रोनॉमिकल। मुझे अपने पोर्टफोलियो में 1,140% तक पीक रिटर्न देने वाला शेयर तो मिला है, लेकिन 1-2 लाख पर्सेंट वालों की कहानियाँ सिर्फ लिखने को मिली हैं।
अब हम भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देखते हैं। पीआईबी पर उपलब्ध एकदम ताजा सरकारी विज्ञप्ति (10 जुलाई) बता रही है कि वैसे तो इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम भारत में भी बहुत पुराना है, लेकिन 2014 तक पेट्रोल में बस 1.5% ही इथेनॉल मिलाया जा रहा था। फिर मई 2018 में अमृतलाल सरकार नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स लेकर आयी। फिर जून 2021 में नीति आयोग ने विस्तृत रोडमैप जारी किया। फिर अगस्त 2021 में सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपी ने प्राइवेट इथेनॉल प्लांट का टेंडर जारी किया, जिसके साथ इथेनॉल खरीदने और बैंक से फाइनेंस कराने की गारंटी दी गयी। उसके बाद पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा दनादन बढ़ती गयी। पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट 20% तक बढ़ाने के लिए 2030 का टारगेट रखा गया था, लेकिन इसे 5 साल पहले यानी 2025 में ही अचीव कर लिया गया। उसके बाद 01 अप्रैल 2026 से पेट्रोल में 20% इथेनॉल को पूरे देश में अनिवार्य करने की अधिसूचना जारी कर दी गयी।
इथेनॉल ब्लेंडिंग कायदे से पेट्रोलियम मंत्रालय का काम है। पेट्रोलियम मंत्रालय है एप्सटीन फाइल्स वाले भाई के पास। लेकिन इथेनॉल पर शुरू से हल्ला करते आया है गन्नाकरी ब्रो। अभी कुछ दिन पहले ही 100% इथेनॉल वाली फाइल पर साइन करने का दावा कर रहा था। पता नहीं किस हैसियत से!
गडकरी के इथेनॉल वाले स्टेटमेंट के हिसाब से सिआन एग्रो के शेयर चढ़े हैं। मजेदार है कि सिर्फ सिआन एग्रो के ही शेयर चढ़े हैं। आज ही पीछे एक पोस्ट में मैंने इसके जैसे बिजनेस वाले शेयरों से कंपेयर किया था। थोड़ा सा डेटा यहाँ भी रख देता हूँ। पिछले 3 साल में सिआन एग्रो का रिटर्न दिख रहा है 4,472%। सेकेंड बेस्ट परफॉर्मर है गोकुल एग्रो ऑलमोस्ट 300% के साथ। बाकी सब 5% से मायनस 50% के बीच हैं। पिछले साल अक्टूबर के बाद सिआन का भाव कुछ गिरा है, क्योंकि तब से इसपर बातें होने लगीं। कई लोग सोशल मीडिया पर गन्नाकरी ब्रो की कुंडली खोलने लग गये। अभी जब पूरे इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर ही दबाव बन आया है, इस सेक्टर में बुखार भी अकेले सिआन एग्रो को ही आया हुआ है। बाकी सबकी चढ़ाई और गिरावट दोनों साइक्लिकल और सेक्टोरल ट्रेंड पर फिट हैं। सिआन की न तो एस्ट्रोनॉमिकल चढ़ाई सामान्य है, न अभी वाला ताजा बुखार। 3,600 प्लस वाले शेयर का 1,550 से नीचे आ जाना भी एक कारण है, जिसके चलते गन्नाकरी बौखलाया हुआ है। अब गन्नाकरी केस करने की सिर्फ धमकी ही नहीं दे रहा, बल्कि केस करने भी लगा है। आज ही की खबर है। नागपुर पुलिस ने 4 लोगों के खिलाफ केस रजिस्टर किया है, जो ई20 पर लिख-बोल रहे थे।
यहाँ एक बात दोहराना जरूरी है। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने वाले कार्यक्रम का मुख्य सूत्रधार गन्नाकरी नहीं है। यह भाई के मंत्रालय का मामला कभी था ही नहीं। यह ट्रंप का दूसरा कार्यकाल शुरू होने तक सामान्य प्रोग्राम था। ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए कुछ विकल्प खोजना जरूरी था भी। तभी अटल सरकार में ही इसपर काम शुरू हो गया था और मनमोहन सरकार ने भी इसे आगे बढ़ाया था। अमृतलाल ब्रो की सरकार भी लगभग उसी गति से आगे बढ़ रही थी। 2018 की नेशनल पॉलिसी में ब्लेंड को 20% ले जाने के लिए 2030 का टारगेट सेट किया गया था। वाहन कंपनियाँ निर्देश पाने के बाद 2023 से सिर्फ ई20 कारें बेचने लगीं। इस हिसाब से 2035 तक ई10 पेट्रोल का भी विकल्प मिलते रहता। लेकिन उससे पहले ट्रंप2.0 हो गया। एप्सटीन आइलैंड के कारनामे खुलने लगे। नाच-गान का कार्यक्रम उठक-बैठक तक पहुँचने की नौबत आयी। अमृतलाल ब्रो पूरा ही लेट गया और करोड़ों देशवासियों के पिछवाड़े में गन्ना बो दिया गया। गन्नाकरी ब्रो बस ऐसी स्थिति में था कि वह अमृतलाल के ट्रंपदास हो जाने की परिस्थितियों का भरपूर फायदा उठा सकता था। उसने बस इतना ही किया। यही कारण है कि गन्नाकरी अपने मंत्रालय से बाहर की बात होने पर भी लगातार इथेनॉल पर बयानबाजी की। वैसे अच्छा ही है सब। वो बयानबाजियाँ भी अच्छी थीं। अब धमकियाँ और प्राथमिकियाँ भी अच्छी हैं। इतिहास बताता है कि मनबढ़ हो जाने वाली सरकारों के पतन की एक गति ऐसी भी होती है। नजदीकी उदाहरण यूपीए-दो।
(सारे आँकड़े बीएसई से उठाये हैं। पूर्ति घोटाला प्रकरण की कहानी आजतक की वेबसाइट से, जहाँ तक पहुँचाया मुझे गूगल ने। गन्नाकरी ब्रो से अपील रहेगी कि एक केस मेरे साथ-साथ बीएसई, आजतक और गूगल पर भी करे। जो भी मित्र गन्नाकरी ब्रो के साथ केस-केस खेलना चाहते हैं, इस पोस्ट को अवश्य कॉपी-पेस्ट-शेयर करें। मुझे क्रेडिट देना या न देना आपकी श्रद्धा। मेरी ओर से ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। पोस्ट का पोस्टर वाया चैटजीपीटी।)
मोदीजी के घर छोड़कर हमेशा विदेश ही घूमने का फायदा उठाते हुए चित्रा त्रिपाठी एवं सुधीर चौधरी ने गड़करी के चेहरे हूबहू मिलते अमित मालवीय को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री बना दिया है. इस मंत्रिमंडल बदलाव में ऐसा लग रहा है कि मोदी ही नहीं, अमित शाह को भी भरोसे में नहीं लिया गया है. एबीपी ने खुद ही मंत्रिमंडल में छोटा बदलाव कर दिया है. बड़ा विस्तार बाद में हो सकता है.
बिना उनके सलाह मशविरा के ही एबीपी ने बदलाव की सूचना डाल दी है. माना जा रहा है कि एबीपी ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाये जाने के फैसले से नाराज होकर यह कदम उठाया है. इन लोगों ने पेट्रोलियम मंत्री को बख्श दिया है. कमान संभालते ही अमित मालवीय ने चेतावनी दी कि उनके लौंडे की कंपनी को लेकर कोई झूठे आंकड़े दोहराये गये तो वह मानहानि का केस तो करेंगे ही, बंदे को कोर्ट तक भी घसीटते हुए ले जायेंगे.
-अनिल कुमार, वरिष्ठ पत्रकार



