अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद और उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। विपक्ष और कई सामाजिक-राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि जिस राम मंदिर आंदोलन को भाजपा और संघ ने वर्षों तक अपनी वैचारिक और राजनीतिक प्राथमिकता बनाया, उसी मंदिर से जुड़े विवाद पर अब शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।
कृष्ण कांत-
राम मंदिर में डकैती की घटना सामने आए डेढ़ महीने हो गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अभी तक मुंह नहीं खोला है।
ये दोनों वही हैं जिन्होंने मंदिर निर्माण से लेकर उद्घाटन तक में हर जगह आगे रहे। अपना ही चेहरा चमकाया। साधु संतों और महंतों को बाहर करके मंदिर में अपने लोग बैठाये। राम मंदिर को संघ का कार्यालय बना डाला।
अब इन्हीं के लोगों ने राम मंदिर को लूट लिया। कितनी लूट हुई इसके बारे में सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है।
जमीन में लूट, निर्माण में लूट, पत्थर में लूट, चंदा में लूट, चढ़ावा में लूट… लूट का रिकॉर्ड बना दिया गया। जांच में उससे भी बड़ा घोटाला हो रहा है। जिन लोगों पर आरोप है वही लोग जांच की निगरानी और चोरी पर फैसला कर रहे हैं। 420 का आरोपी अधिकारी जांच कर रहा है और ट्रस्ट के सदस्य को ही रिपोर्ट सौंप रहा है। जिस व्यक्ति ने सारे कांड किए, जिसको असीमित अधिकार थे, जांच रिपोर्ट में उसका नाम ही नहीं है।
जिस राम मंदिर को देश की धार्मिक-सांस्कृतिक अस्मिता से जोड़ा गया, नवजागरण का प्रतीक बताया गया, खूब प्रचार किया गया, खूब फोटोबाजी हुई, वही राम मंदिर उन्हीं लोगों ने लूट लिया, जो यह सब कर रहे थे।
12 साल से प्रचारित कर रहे थे कि देश मजबूत हाथों में है। अब जनता देख रही है कि देश बहुत कमजोर, बेईमान और भ्रष्ट हाथों में है जिसने भगवान को भी नहीं छोड़ा।
अभिषेक उपाध्याय-
वो 60 करोड़ का स्कैनर! राम मंदिर की सुरक्षा ख़तरे में!! एक और महाविस्फोटक ख़ुलासा
राम मंदिर में किसने लटकाया स्कैनर लगाने का वो प्रस्ताव जो 2021-22 में ही पकड़ लेता चोरी।
बहुत बड़ी ख़बर। टॉप सीक्रेट के पास चौंकाने वाले दस्तावेज़। SSP अयोध्या की 8 मई 2026 की सनसनीख़ेज़ चिट्ठी।
संजय प्रसाद को भेजी गई 29 मई 2026 की चिट्ठी। राम मंदिर को विस्फोटक से बचाने, प्रतिबंधित सामग्री और कीमती धातु का पता लगाने के लिए मंदिर के गेट नंबर 3 पर प्रस्तावित Vehicle X-Ray Scanner आज तक नहीं लगा।
अब टाइम लाइन देखते जाइए-
साल नवंबर 2020 में यूपी के मुख्य सचिव की अगुवाई वाली बैठक में हुआ था Vehicle Scanner लगाने का फैसला।
मकसद था मंदिर को विस्फोटकों के ख़तरे से बचाना और कीमती धातु की चोरी का पता लगाना।
जगह तय की गई थी राम मंदिर का गेट नंबर 3। मार्च 2021 में इस खरीद की खातिर भारत सरकार की कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड का चयन भी हो गया।
जनवरी 2022 में गृह सचिव, भारत सरकार ने भी दी मंजूरी।
मगर हैरानी की बात ये कि लगभग 60 करोड़ की कीमत के इस बेहद जरूरी स्कैनर को अब तक वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली।
टॉप सीक्रेट के पास गृह विभाग के मुखिया संजय प्रसाद को लिखी गई एडीजी पुलिस हेडक्ववार्टर की चिट्ठी की प्रति।
इस चिट्टी के प्वाइंट नंबर 6 में साफ लिखा कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस मकसद के लिए कोई बजट प्रावधान ही नहीं।
राम मंदिर को लेकर कितनी गंभीर थी सरकार? ख़ुलासों की भरमार!!



