नई दिल्ली: वरिष्ठ पत्रकार और भड़ास4मीडिया के संस्थापक-संपादक यशवंत सिंह का लंबा और बेबाक इंटरव्यू ‘मेरा रंग’ यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किया गया है। शालिनी श्रीनेत के साथ हुई इस बातचीत में उन्होंने अपने पत्रकारिता सफर, भड़ास4मीडिया की स्थापना, जेल जाने की परिस्थितियों और भारतीय मीडिया की कार्यप्रणाली से जुड़े कई सवालों के विस्तार से जवाब दिए।
इंटरव्यू में यशवंत सिंह ने बताया कि भड़ास4मीडिया की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई और इस मंच का मूल उद्देश्य क्या था। उन्होंने मीडिया संस्थानों के भीतर की कार्यसंस्कृति, पत्रकारों के सामने आने वाली चुनौतियों और मीडिया जगत की उन हकीकतों पर भी खुलकर चर्चा की, जिन पर आमतौर पर सार्वजनिक मंचों पर कम बात होती है।
बातचीत के दौरान उन्होंने अपने जेल जाने के अनुभव, मीडिया में सत्ता, प्रबंधन और पत्रकारों के रिश्तों समेत कई संवेदनशील विषयों पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी। इंटरव्यू को बिना लाग-लपेट और स्पष्ट संवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यशवंत सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से दर्शकों से इस इंटरव्यू को देखने की अपील करते हुए कहा कि इसमें उनकी निजी और पेशेवर यात्रा से जुड़े कई ऐसे पहलुओं पर चर्चा हुई है, जिनके बारे में लोग अक्सर जानना चाहते हैं।
पूरा वीडियो-
Shalini Shrinet कौन हैं? कोई ये सवाल वर्षों पहले पूछता तो मेरा जवाब होता – Dinesh Shrinet जी की पत्नी हैं!
लेकिन शालिनी जी का अब अपना ख़ुद का परिचय है। एक विनम्र लेकिन निडर महिला एक्टिविस्ट जो समाजसेवा से लेकर मीडिया और साहित्य तक में एकसाथ सक्रिय हैं। मैंने ख़ुद उनकी असहायों- शोषितों के लिए लड़ी जाने वाली लड़ाइयों को लाइव देखा है। ग़ाज़ियाबाद के वसुंधरा अपार्टमेंट में क़ैद लड़की से लेकर ग़ाज़ीपुर के जांगीपुर में सामाजिक पारिवारिक उत्पीड़न झेल रही लड़की को रेस्क्यू कराने तक की लड़ाइयाँ!
शालिनी जी “मेरा रंग” के बैनर तले ऑनलाइन ऑफलाइन सक्रियता ख़ूब बनाये रखती हैं। “मेरा रंग” चैनल के लिए वे इंटरव्यू भी करती हैं तो इसी क्रम में पिछले दिनों उनका बुलावा मुझे मिला। मैं बहुत बोल गया। बक बक बक बक। सब बतिया गया। लंबी बातचीत है लेकिन ज़िन्दगी के बहुत सारे रंग समेटे है। मैं बोलने में अच्छा नहीं हूँ। तेज तेज बोलता हूँ। जैसे लगता है हड़बड़ी में बोल रहा हूँ, ट्रेन छूटने वाली है। व्याकरण और वाक्य विन्यास की दृष्टि से शुद्ध नहीं बोलता हूँ। इन सब कमियों को इग्नोर करियेगा।
-यशवंत सिंह


