विष्णु नागर-
आज द इंडियन एक्सप्रेस ने एक दिलचस्प स्टोरी प्रकाशित की है, जो मध्यवर्ग को उसकी लालची और चोर प्रवृत्ति का आइना दिखाती है। एक्सप्रेस ने रेलवे के एसी डिब्बों में बेडशीट ,कंबल, तकियों , तकियों के कवर और मुंह पोंछने के टावेल की हर साल बढ़ती चोरी के आंकड़े सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्राप्त किए,जिनसे यह साबित होता है कि मध्यवर्ग के लोग भी चोरी – चकारी में पीछे नहीं हैं और हर साल ऐसे चोरों की तादाद बढ़ती ही जा रही है।
पिछले चार साल और इस वर्ष के आंशिक आंकड़े बताते हैं कि हर साल एसी डिब्बों में इस तरह की चोरियां बढ़ने का खामियाजा भले ही गरीब रेलवे के अटेंडेंट को भुगतना पड़ता हो , जिसकी मासिक तनख्वाह में से चोरी गए माल का पैसा हर महीने काट लिया जाता है। इन वर्षों में 46.54 लाख टावेल,41.13 लाख बेडशीट, 23.59 तकिये के कवर, 12.95 कंबल और 2.76 लाख तकिये पार किए जा चुके हैं।
जो इतने समर्थ हैं कि एसी डिब्बों में सफर करते हैं उनकी नीयत भी कितनी खराब है, इससे भी संकेत मिलता है। मौका मिले तो किसी भी तरह की छोटी से छोटी चोरी भी वे कर सकते हैं, यह इसका प्रमाण है।
मध्यवर्ग ही क्यों देश का अमीर वर्ग भी कम चोर नहीं है। हिंदुजा परिवार किस तरह अपने साधारण घरेलू कर्मियों का शोषण करता है, यह स्टोरी आ चुकी है। इस वर्ग ने तो लूट ही मचा रखी है। सार यह है कि जिसके हाथ जो लग रहा है , चुरा रहा है या डाका डाल रहा है। किसी के हाथ मुंह पोंछने का तौलिया लग रहा है तो वह उसकी चोरी कर रहा है तो कोई सरकार से मिलकर पूरा जंगल का जंगल चोर रहा है। पहाड़ चोर रहा है, पानी चोर रहा है। कोई समुद्र चुराने की फिराक में है और सफल है और कोई उसे चोर डाकू नहीं कहता। कोई सांसद चुरा कर सीना तान रहा है, कोई मंदिर में बैठकर डाका डाल रहा है।
वैसे रेलवे के एसी कोच में यात्रा करनेवालों के बारे में राहत की बात यह है कि उनमें एक हजार में औसतन एक चोर है। राजनीतिक और पूंजीपति वर्ग में यह प्रतिशत बहुत अधिक है। वहां मुश्किल से 1000 में एक ईमानदार मिले तो मिले!
RTI से खुलासा: चादर, कंबल, तकिया और तौलियों की चोरी से ₹104 करोड़ से अधिक का नुकसान; रेलवे ने इसे गंभीर चिंता का विषय माना
भारतीय रेलवे की एसी ट्रेनों में यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले बेडरोल की बड़े पैमाने पर चोरी का मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच रेलवे के एसी कोचों से 1.27 करोड़ से अधिक बेडरोल आइटम गायब हो गए। इनमें सबसे अधिक फेस टॉवेल, उसके बाद बेडशीट, तकिया कवर, कंबल और तकिए शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में बेडरोल चोरी की घटनाओं में 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अनुमान है कि इन चोरियों के कारण बेडरोल उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों को करीब ₹104.5 करोड़ का नुकसान हुआ। कई मामलों में चोरी हुए सामान की कीमत संबंधित ठेकेदार अपने कर्मचारियों और कोच अटेंडेंट के भुगतान से वसूलते हैं।
RTI के जवाबों के विश्लेषण में सामने आया कि सबसे अधिक चोरी 46.54 लाख तौलियों की हुई। इसके बाद 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख तकिया कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए गायब पाए गए।
रेलवे के विभिन्न मंडलों में बीकानेर मंडल सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां अकेले 25.76 लाख बेडरोल आइटम चोरी होने की जानकारी मिली। इसके बाद रांची, दिल्ली, मुंबई, जोधपुर, अहमदाबाद और दानापुर जैसे मंडलों का स्थान रहा। वहीं दिल्ली मंडल ने चोरी की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है।
रेल मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस पूरे मामले को “गंभीर चिंता का विषय” बताया है। मंत्रालय का कहना है कि लिनेन चोरी रोकने के लिए सीसीटीवी निगरानी, कोच मित्र (Coach Mitra) ऐप, स्टाफ की काउंसिलिंग और यात्रियों से यात्रा समाप्त होने से पहले लिनेन वापस लेने जैसी व्यवस्थाओं को लागू किया जा रहा है। हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा कि अब तक कर्मचारियों की मिलीभगत का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बेडरोल की चोरी के कारण अतिरिक्त लिनेन सेट खरीदने पड़ते हैं, जिससे परिचालन लागत बढ़ती है और अंततः इसका बोझ रेलवे व्यवस्था पर पड़ता है।
हर रात, भारतीय रेलवे नेटवर्क पर लगभग 8 लाख एसी यात्री लिनेन के बेडरोल में सोते हैं, जिसमें आमतौर पर दो चादरें, एक कंबल, एक तकिया, एक तकिया कवर और एक चेहरा पोंछने वाला तौलिया होता है – यह सेवा टिकट के साथ ही मिलती है। और हर यात्रा समाप्त होने पर, उनमें से कुछ, लगभग हर 1,000 यात्रियों में से एक, कम से कम एक बेडरोल आइटम अपने साथ ले जाते हैं, यह बात इंडियन एक्सप्रेस की एक पड़ताल से सामने आई है।
अखबार ने भारतीय रेलवे के सभी 69 डिवीजनों के साथ सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन दायर किए। 18 रेलवे जोन में से 16 जोन के 54 डिवीजनों से जवाब प्राप्त हुए, जिनमें से कुछ ने आंशिक जानकारी साझा की। अधिकारियों ने बताया कि इन रिकॉर्डों से पता चलता है कि जनवरी 2022 से, जब महामारी के बाद बेडरोल सेवाएं पूरी तरह से फिर से शुरू हुईं , मई 2026 तक कम से कम 1.27 करोड़ बेडरोल चोरी हुए – मुख्य रूप से यात्रियों द्वारा। आंकड़ों को वर्षवार संकलित करने पर पता चलता है कि 2022 से 2025 तक ऐसी चोरियों में 56% की वृद्धि हुई है।
रेलवे द्वारा प्रतिदिन बांटे जाने वाले भारी जुर्माने के मुकाबले यह आंकड़ा नगण्य है। लेकिन यही बात इन आंकड़ों को दिलचस्प बनाती है: इसे चोरी कहें या लालच, ये आंकड़े कर्मचारियों की कमियों को उजागर करने के बजाय यात्रियों के व्यवहार की एक झलक पेश करते हैं।
आरटीआई डेटा से पता चलता है कि चोरी के कारण बेडरोल ठेकेदारों को चार साल से अधिक की अवधि में अनुमानित 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है – ठेकेदारों द्वारा नियोजित कोच परिचारकों का कहना है कि यह पैसा ज्यादातर उनके वेतन से वसूल किया जाता है।
-प्रमोद जोशी


