नई दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा, “हमारे हरिद्वार के पास देवबंद है। मुझे 2009 में वहां आमंत्रित किया गया था। मैंने उनसे कहा था कि हमारे धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं। ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। हम सभी के पूर्वज सनातनी हिंदू आर्य-वैदिक थे। यह बात हमारे सामने ही लिखी हुई है।”
उन्होंने आगे कहा, “कुछ लोग पूछते हैं कि अगर हिंदू राष्ट्र बन गया तो मुसलमान कहां जाएंगे? मेरा कहना है कि अपने पूर्वजों की परंपराओं को अपना लीजिए। आप दाढ़ी रखें या मुंडवा लें, अपनी पसंद के कपड़े पहनें, लेकिन अपने पूर्वजों जैसा चरित्र बनाए रखें। हिंदुस्तान में मुसलमानों या ईसाइयों के लिए कोई खतरा नहीं है।”
वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने रामदेव के इस बयान पर कहा-
लाला रामदेव इस बात का जवाब नहीं देंगे कि उनके दंत मंजन में मछली की हड्डियां क्यों थी और क्यों जनता को भ्रमित किया. क्यों अदालत में पतंजलि के उत्पाद की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं? क्यों सुप्रीम कोर्ट में डॉक्टरों पर अभद्र बयान पर माफी मांगी- अगर खुद पर इतना यकीन है तो… क्यों धर्म के नाम पर राम के नाम पर चंदा चोरी-जमीन चोरी होती रही और अब तक लोगों को बचाया जा रहा है. और अब उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले काम पर लगा दिया गया है.
अभिसार के ट्वीट पर आए कुछ कमेंट्स भी पढ़िए…
राहुल भाटिया-
एक संत की विश्वसनीयता भाषणों से नहीं, अपने उत्पादों, दावों और आचरण की पारदर्शिता से तय होती है।
धर्म और राष्ट्रवाद पर बोलना आसान है; गुणवत्ता, भ्रामक प्रचार और अदालत में उठे सवालों का साफ़ जवाब देना कठिन। चुनाव के समय अचानक सक्रिय हुई आध्यात्मिकता, आस्था से अधिक राजनीति की रणनीति भी लग सकती है।
धर्म का नाम लेकर सवालों से बचा नहीं जा सकता। जो व्यक्ति राष्ट्र, संस्कृति और सत्य की बात करता है, उसे अपने उत्पादों, दावों और आचरण पर उठे सवालों का भी उतनी ही स्पष्टता से उत्तर देना चाहिए।
चुनाव से पहले सक्रिय हुई आध्यात्मिकता, कई बार साधना कम और राजनीतिक रणनीति अधिक दिखाई देती है।
1857 में सुअर की चर्बी और कारतूस,
2026 में मछलियों की हड्डी और दंत मंज़न।
क्या क्रांति होगी?
-डॉ राजेश कुमार प्रजापति



