नई दिल्ली/लखनऊ: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के कथित दुरुपयोग के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। इस मामले में दायर याचिकाओं पर सर्वोच्च अदालत 13 जुलाई को सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि बिना एफआईआर या किसी नियमित आपराधिक मामले के एसआईटी जांच शुरू की गई, ऐसे में पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। याचिकाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं की गहन जांच की मांग की गई है।
प्रशांत टंडन-
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भविष्यवाणी: अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावा चोरी कांड में एक पावरफुल ट्राइंगल काम कर रहा है. इस त्रिकोण की तीन बड़ी शक्तियां है मोदी – शाह, योगी आदित्यनाथ और आरएसएस.
सब जानते हैं कि योगी और दिल्ली में लंबे समय से खींचतान है. योगी गोरखधाम पीठ के महंत भी हैं. 1949 में बाबरी मस्जिद में मूर्तियां रखने से लेकर मस्जिद को गिराने और राम मंदिर बनाने के आंदोलन में गोरखधाम के तीन पीढ़ियों के महंतों की बड़ी भूमिका रही है – दिग्विजयनाथ, अवैद्यनाथ और मौजूदा महंत और यूपी के चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ.
लेकिन प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रम में मोदी ने योगी को किनारे कर दिया गया. फ्रेम में मोदी और मोहन भागवत ही रहे.
लेकिन योगी किस्मत के धनी हैं. चढ़ावा चोरी का भांडा फूटा और योगी ने SIT बनाकर FIR और गिरफ्तारियां करा कर पहला शॉट खेल दिया. SIT का दायरा बढ़ा दिया गया है जिससे बड़ी मछलियां भी जाल में आयेंगी.
ट्राइंगल के अंदर डील: चढ़ावा चोरी के सामने आने तक राम मंदिर के प्रशासन में चंपत राय के ज़रिए आरएसएस का पूरा कब्जा था. ट्रस्ट, मंदिर का मैनेजमेंट और चढ़ावा सब कुछ आरएसएस के पास था.
मामला खुला तो मोदी के खास नृपेंद्र मिश्र अयोध्या भेजे गये और “चोरी नहीं डकैती” का बयान आया जिसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला. उन्होंने सीईओ प्रणाली का सुझाव भी दिया.
ट्रस्ट की बैठक में इस सुझाव पर एक कमेटी भी बन गई. यानि एक गुप्त समझौता हो गया कि सीईओ सिस्टम के ज़रिये मोदी – शाह की दखल रहेगी और बाकी सब आरएसएस के पास जैसा पहले था.
मोदी से फोन पर बात होने के बाद ही विनय कटियार चंपत राय की गिरफ्तारी की मांग पर नरम पड़ गये.
सुप्रीम कोर्ट क्या करेगा?
इसमें सबसे बड़ी अड़चन योगी की बनाई SIT है. ट्राइंगल की दो पार्टियों में बंटवारा तभी हो सकता है जब जांच यूपी से लेकर केंद्रीय एजेंसी को दी जाये. मोदी – शाह भी यही चाहेंगे.
अब तक के ट्रेंड्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर चढ़ावा घोटाले पर सीबीआई जांच के आदेश देकर सीन से योगी आदित्यनाथ को हटा देगा.



