नई दिल्ली। केंद्र सरकार की E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे विवाद के बीच नागपुर साइबर पुलिस ने चार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें मनीष कश्यप, देसी बॉयसर (Desi Boyser), हर्षित राठी और अंकलेश इनवाते शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, मामला भाजपा के सोशल मीडिया पदाधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन कंटेंट क्रिएटर्स ने यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर E20 ईंधन और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से जुड़े ऐसे वीडियो और पोस्ट साझा किए, जिनमें कथित रूप से भ्रामक और तथ्यहीन जानकारी प्रसारित की गई। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज है। हाल के दिनों में यूट्यूबर मनीष कश्यप ने दावा किया था कि E20 पेट्रोल से उनकी कार खराब हो गई। हालांकि, वाहन निर्माता टोयोटा की जांच में कंपनी ने कहा कि वाहन में खराबी का कारण E20 पेट्रोल नहीं, बल्कि फ्यूल टैंक में पानी की मौजूदगी थी। इसके बाद कंपनी ने मनीष कश्यप के खिलाफ अलग से एफआईआर भी दर्ज कराई थी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि जांच में E20 पेट्रोल को दोषी नहीं पाया गया।
एफआईआर दर्ज होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि यदि किसी वीडियो में गलत या भ्रामक जानकारी प्रसारित की गई है तो उसकी जांच होना स्वाभाविक है। फिलहाल, पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है और आरोपों की सत्यता की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कल गडकरी जी की धमकी, आज FIR! क्या इस देश में लोकतंत्र सचमुच ख़त्म हो गया? जनता की करोड़ों की गाड़ियाँ कबाड़ हो जाएँ, मिडिल क्लास खून-पसीने की कमाई रोए… लेकिन खबरदार! अगर सरकार की नीति पर सवाल उठाया तो सीधे जेल जाओगे! नागपुर से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बीजेपी के सोशल मीडिया सेल की शिकायत पर नागपुर साइबर पुलिस ने देश के 4 बड़े इन्फ्लुएंसर्स—मनीष कश्यप, देसी बॉयज़र (Desi Boyser), हर्षित राठी और अंकलेश इनवाते के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इनका गुनाह? सिर्फ इतना कि इन्होंने यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर वीडियो बनाकर केंद्र सरकार की E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिक्स) नीति और उससे जनता को होने वाली दिक्कतों पर सवाल उठाए थे।
-घनश्याम लोधी
संजय कुमार सिंह-
सरकार ई10 के बावजूद जबरन ई20 क्यों थोप रही है। नितिन गडकरी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा है, सभी ई10 अनुकूल वाहन ई20 ईंधन का उपयोग करने के लिए फिट हैं। इसका कोई आधार नहीं है लेकिन वे दावा कर रहे हैं कि कोई शिकायत नहीं है और जो शिकायतें हैं वह उन्हें और सरकार को निशाना बनाने के लिए है। उन्हें निशाना बनाए जाने का कारण यही हो सकता है कि उनका बेटा इथेनॉल का कारोबार करता है। वरना वे परिवहन मंत्री हैं, इथेनॉल के बारे में बोलना ही नहीं चाहिए। खुद कह चुके हैं कि यह काम पेट्रोलियम मंत्रालय का है।

अगर ऐसा है और पेट्रोलियम मंत्रालय या सरकार जबरदस्ती करेगी तो बोला ही जाएगा लेकिन परेशानी नितिन गडकरी को है। परिवहन मंत्री जी इसे अपने और सरकार के खिलाफ साजिश बता रहे हैं। ई10 से शिकायत नहीं थी और ई20 से है, मंत्री जी नहीं मान रहे हैं, एक भी शिकायत लाने की बात कर रहे थे फिर कंपनियों के दावों की बात करने लगे, मानहानि के दावे की धमकी दी और बीजेपी आईटी सेल ने एफआईआर लिखा दी। जाहिर है, सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है। तहसीन पूना वाला से मिल नहीं रहे हैं औऱ टाइम्स ऑफ इंडिया से दावा कर दिया कि कोई शिकायत नहीं है।
शिकायत हो या नहीं, उसे छोड़ भी दें तो तथ्य है कि देश में ई10 बंद कर ई20 बेचने से इथेनॉल की खपत मोटा मोटी दूनी हो जाएगी। इससे किसी को नुकसान हो या नहीं, फायदा ही हो तो किसके फायदे के लिए इथेनॉल की बिक्री बढ़ाई जा रही है? जब इससे माइलेज कम होता है और माइलेज कम होगा तो इथेनॉल मिलाने से पेट्रोल आयात का बिल कम नहीं होने वाला है, बढ़ेगा ही। इस पर बात करने की बजाय सरकार और सरकारी दल के प्रचारक भ्रम फैला रहे हैं। जबरदस्ती तो कर ही रहे हैं। धमकी ऊपर से।
कार कंपनियों ने अगर कहा कि शिकायत नहीं है तो वह दिखावा है, मजबूरी में, दबाव में कहा गया लगता है, उसमें शब्दों का खेल साफ समझा जा सकता है। जैसे मनीष कश्यप के मामले में टोयोटा के कहा है कि खराबी मिलावटी पेट्रोल के कारण आई। सवाल है कि मिलावटी पेट्रोल आया कहां से? इथेनॉल या पेट्रोल अलग या मिला हुआ खुले बाजार में मिलता नहीं है, पानी कोई क्यों मिलाएगा और मिला हुआ पाया गया है तो वह वाष्प से हो सकता है। इथेनॉल मिले पेट्रोल की खासियत होती है कि पानी या वाष्प हुआ तो इथेनॉल पेट्रोल से अलग हो जाता है।
मूल बात यह है कि मामला इथेनॉल और पेट्रोल का नहीं, ई10 और ई20 का है। ई20 से देश में इथेनॉल की खबर ई10 के मुकाबले मोटे तौर पर दूनी हो जाएगी। इसलिए जबरदस्ती है। वरना ई10 में क्या बुराई है, ई20 की जल्दी क्यों? दोनों क्यों नहीं? जैसे तमाम सवालों का जवाब नहीं है। माइलेज नापने का नया तरीका है, विज्ञान है और भी न जाने क्या-क्या है।



