Connect with us

Hi, what are you looking for?

सियासत

पेपर लीक, टूटी सड़कें, मिलावटी पेट्रोल, धार्मिक स्थलों पर लूट, पुलिस की बर्बरता से लोगों में गुस्सा है!

Police officers in beige uniforms and protective gear restrain a man being dragged by his arms while onlookers watch on a city street

नीरज बधवार-

जंतर-मंतर पर पिछले दो दिनों से लोगों को जो गुस्सा दिख रहा है, उसमें साज़िश ढूंढने की बजाय आप समझिए कि ये देश के लोगों का जायज़ गुस्सा है। देश में एक बड़े वर्ग को लगता है कि सरकार ने उसको उसके हाल पर छोड़ दिया है। किसी भी शहर की कुछ-एक पॉश कॉलोनी को छोड़ दीजिए, बाकी शहर आपको नर्क का विज्ञापन लगता है।

टूटी सड़कें, मिलावटी खाना, उड़ती धूल, दूषित हवा, बिखरा कचरा, बहती नालियां, आवारा पशु, बेतरतीब ट्रैफिक, हर फुटपाथ पर अवैध कब्ज़े। सरकारी स्कूल और अस्पताल जाने लायक नहीं। प्राइवेट स्कूल और प्राइवेट अस्पताल में चले जाएं ऐसी 90 फीसदी भारतीयों की हैसियत नहीं।

ऊपर से पेपर लीक, महंगे घर, घूसखोरी, धार्मिक स्थलों पर मची लूट और पुलिस की बर्बरता अलग।

इस सबके बीच यही आम आदमी, जब देखता है कि नेता जब सड़क से गुजरता है तो पूरा ट्रैफिक रुकवा दिया जाता है, छुटभैया नेता भी दस-दस गाड़ियों के काफिले में गुज़रता। कुछ सालों में 50-100 करोड़ कमा लेता है।

महल जैसे घरों में रहता है। अपने बच्चों को पढ़ने विदेश भेज देता है, खुद छुट्टी मनाने से लेकर इलाज कराने विदेश जाता है। जिस नेता पर शिक्षा और स्वास्थ्य को ठीक करने की ज़िम्मेदारी है, वो खुद प्राइवेट स्कूल, कॉलेज और अस्पताल खोलकर बैठा है, तो ये सब देखकर आम आदमी का सीना छलनी हो जाता है।

जंतर-मंतर पर आज जो पुलिस की लाठी खाते दिख रहे हैं न ये देश के वही आम लोग हैं जिन्हें सिस्टम ने छलनी कर रखा है। इसलिए सवाल लोगों के गुस्से में साज़िश या षड्यंत्र तलाशने का नहीं, इस कड़वी हकीकत को स्वीकार करने का है। देश की हर पार्टी को अपने गिरेबान में झांककर खुद से पूछना चाहिए कि क्या किया है उन्होंने देश के लोगों के साथ।

12 घंटे खून पसीना बहाने वाले मां-बाप जब बच्चे की छोटी सी मांग भी पूरी नहीं कर पाते न तब भी खुद से पूछते हैं कि क्या मैं अपने के साथ न्याय कर पा रहा हूं या नहीं…क्या मैं एक अच्छी मां या पिता हूं या नहीं। वो सोचता है कि बच्चे के लिए और मैं क्या करूं ताकि इसे एक अच्छी ज़िंदगी दे पाऊं। लेकिन सरकार जो जनता की अभिभावक होती है उनकी ज़िंदगी संवारने या बिगाड़ने की ज़िम्मेदार होती है उनमें लेशमात्र भी ये अहसास नहीं दिखता।

बीजेपी आज सत्ता में है, तो गुस्सा उस पर निकल रहा है, लेकिन पूरी राजनीतिक जमात का चरित्र यही है। दुनिया में शायद ही कोई देश और होगा, जिसके नेताओं ने अपने देश को इस बेरहमी से लूटा हो, अपने लोगों को ऐसे छला हो।

इसलिए जनता के गुस्से को चेतावनी के रूप में लेना चाहिए। दूसरों पर लांछन लगाने से पहले अपनी अंतरात्मा टटोलिए, बशर्ते अब तक वो मर न गई हो। जिसकी पूरी आशंका है।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन