औरैया। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ राजनीतिक नेता कमलेश पाठक ने अमर उजाला में अपने खिलाफ प्रकाशित खबर को लेकर कानूनी नोटिस भेजा है। उनके अधिवक्ता सौरभ पांडेय की ओर से 22 अगस्त 2026 को जारी नोटिस में अखबार पर कथित तौर पर मानहानिकारक, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण आरोप प्रकाशित करने का आरोप लगाया गया है।
नोटिस अमर उजाला के प्रधान संपादक/एडिटर-इन-चीफ, कानपुर क्षेत्र के जोनल/रीजनल एडिटर और औरैया ब्यूरो के संबंधित रिपोर्टर/ब्यूरो चीफ को भेजा गया है। नोटिस का विषय 20 और 21 अगस्त 2026 के औरैया संस्करण में प्रकाशित खबरों में कमलेश पाठक को कथित डकैत गिरोहों और हथियारों की सप्लाई से जोड़ने से संबंधित है।
अधिवक्ता ने नोटिस में कहा है कि उनके मुवक्किल कमलेश पाठक उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ राजनीतिक नेता हैं और उनका सार्वजनिक जीवन चार दशक से अधिक का रहा है। नोटिस के मुताबिक वह 1985 में औरैया विधानसभा क्षेत्र और 2002 में डेरापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। इसके अलावा वह 1991 और 2016 में विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए तथा 1991 और 2013 में राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
नोटिस में अमर उजाला के कानपुर क्षेत्र के संपादकीय प्रभारी को औरैया जिले से प्रकाशित होने वाली खबरों के चयन, सत्यापन, संपादन और प्रकाशन की जिम्मेदारी वाला अधिकारी बताते हुए कहा गया है कि बिना उचित जांच-पड़ताल के कथित रूप से अपुष्ट और मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने की जिम्मेदारी संबंधित लोगों की है।
कमलेश पाठक की ओर से जारी कानूनी नोटिस में 20 अगस्त 2026 के औरैया संस्करण में प्रकाशित खबर का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। अधिवक्ता ने खबर में लगाए गए आरोपों को लेकर आपत्ति जताते हुए इसे उनके मुवक्किल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है।
नोटिस में आगे की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी और संबंधित खबरों को लेकर अखबार से जवाबदेही तय करने की मांग किए जाने की बात सामने आती है। हालांकि, उपलब्ध दोनों पन्नों में नोटिस का शुरुआती हिस्सा ही स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पूरे नोटिस के बाकी पन्ने उपलब्ध हों तो उसमें की गई मांगों, कथित आरोपों और अमर उजाला को दी गई समय-सीमा को भी खबर में शामिल किया जा सकता है।
इस पूरे मामले में अधिवक्ता सौरभ पांडेय ने भड़ास से हुई बातचीत में कहा कि नोटिस का जवाब अमर उजाला ने अभी तक नहीं दिया है। 10 सितंबर को जवाब की अवधि भी पूरी हो चुकी है। उधर कमलेश पाठक के पुत्र हाईकोर्ट गए हुए हैं। उनकी वापसी के बाद विधिक कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।
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