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दिल्ली

दिल्ली में पहली बार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन और शॉक बैटन का इस्तेमाल!

Close-up of a bruised chest with many small pellet wounds from police clashes in Delhi (news thumbnail).

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन में घायल कम से कम एक व्यक्ति को पैलेट गन (Pellet Gun) से चोट लगने की आशंका है। यदि इसकी पुष्टि होती है, तो यह दिल्ली में किसी नागरिक के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल का पहला ज्ञात मामला होगा। वहीं, एक महिला को कथित तौर पर शॉक बैटन (Shock Baton) से झटका दिए जाने का वीडियो भी सामने आया है।

अंग्रेजी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी को कनॉट प्लेस स्थित पालिका बाजार के पास रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान द्वारा गोली मारे जाने का आरोप लगाया गया है। मंसूरी का इलाज लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। अस्पताल के एक सूत्र ने बताया कि उनके चेहरे और शरीर के ऊपरी हिस्से में धंसे पैलेट निकालने के लिए सर्जरी की गई। आंखों के नीचे फंसे पैलेट निकाल दिए गए, लेकिन गर्दन के पास रक्त वाहिका के करीब फंसा एक पैलेट नहीं निकाला जा सका। इसके लिए दूसरी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, शाम तक घायलों की संख्या बढ़कर 83 हो गई, जिनमें प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी दोनों शामिल हैं। एक अन्य घायल प्रदर्शनकारी को आंख में गंभीर चोट के कारण एम्स रेफर किया गया, जबकि 15 वर्षीय एक घायल को कलावती सरन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल भेजा गया।

इसी दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अस्पताल पहुंचकर मंसूरी से मुलाकात की। मंसूरी के एक मित्र के अनुसार, उन्होंने मंत्री से कहा कि वह शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

हालांकि, पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को नई दिल्ली जिला पुलिस ने खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो के जवाब में पुलिस ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल के दावे पूरी तरह झूठे और भ्रामक हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे अपुष्ट सामग्री साझा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से तथ्यों की पुष्टि करें।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पैलेट गन और शॉक बैटन, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की दंगा-रोधी इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के मानक उपकरणों का हिस्सा हैं। इससे पहले 2024 के किसान आंदोलन, 2023 के मणिपुर हिंसा और 2016 के जम्मू-कश्मीर अशांति के दौरान भी पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं।

वहीं, 21 वर्षीय साक्षी नामक एक महिला प्रदर्शनकारी, जो पुलिस कार्रवाई में गंभीर रूप से घायल हुई थीं, का इलाज राम मनोहर लोहिया अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है। उनके परिजनों के अनुसार, उनकी हालत पहले से बेहतर है, हालांकि डॉक्टरों ने उनकी चोटों के बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।


Newspaper article headline: 'Protester suffers injuries from pellet guns; shock batons used' with a photo of a injured protester’s chest and face.

20 जुलाई के छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस ने पेलेट गन और शॉक बेटन (करेंट मारने का डंडा) का इस्तेमाल किया है. द हिंदू ने इस पर विस्तार से रिर्पोट की है. कुछ छात्रों की आंख में भी छर्रे लगे हैं.
दिल्ली पुलिस पेलेट गन के इस्तेमाल इस इंकार कर रही है लेकिन तस्वीर झूठ नहीं बोलती.
कहां है सुप्रीम कोर्ट, NHRC?
-प्रशांत टंडन, वरिष्ठ पत्रकार


शीतल पी सिंह-

दिल्ली में पहली बार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन और शॉक बैटन का इस्तेमाल?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी (Cockroach Janta Party) के “चलो संसद” मार्च के दौरान पुलिस और आरएएफ (रैपिड एक्शन फोर्स) की कार्रवाई में विवाद हो गया है। कुछ प्रदर्शनकारियों और संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास के आरोप हैं कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन और शॉक बैटन (इलेक्ट्रिक शॉक देने वाले डंडे) का इस्तेमाल किया गया। कुल अस्सी घायलों में (जो अस्पताल पहुँचे)से एक के शरीर से पैलेट गन के छर्रे डाक्टरों द्वारा निकाले जाने की ख़बर द हिंदू में प्रकाशित हुई है ।

यह दिल्ली में पहली बार होने का दावा किया जा रहा है। आरएएफ की भीड़ नियंत्रण की किट में यह उपकरण शामिल हैं। इससे पहले पेलेट गन का इस्तेमाल हरियाणा में 2024 के किसान आंदोलन, मणिपुर (2023) और कश्मीर (2016) में हुआ था। पेलेट गन से कई गोली जैसी छोटी-छोटी धातु की गेंदें निकलती हैं, जो निशाने को घायल कर सकती हैं और आंखों में लगने पर अंधापन भी पैदा कर सकती हैं।

प्रदर्शन के दौरान करीब 60 से 80 प्रदर्शनकारी घायल बताए गए (कुछ रिपोर्ट्स में ज्यादा)। एक प्रदर्शनकारी का इलाज सरकारी अस्पताल में हुआ, जहां उसके आंख के नीचे और गर्दन से पेलेट निकाले गए। ऑपरेशन की खबर सोशल मीडिया और सीजेपी के दावों में फैली।

हालाँकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि पेलेट गन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं हुआ। पीआईबी फैक्ट चेक और पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट को फेक न्यूज बताया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारों ने बैरिकेड तोड़े, पत्थरबाजी की और 118 पुलिसकर्मी घायल हुए। लाठीचार्ज, आंसू गैस और सामान्य बल का इस्तेमाल किया गया। कुछ वीडियो में नाखून वाले बैटन की भी बात आई, लेकिन पुलिस ने उसे भी पुराना या असंबंधित बताया।

इस घटना पर दोनों तरफ के दावे हैं। पुलिस ज़्यादती के असंख्य वायरल वीडियोज ने दुनियां भर में फैले भारतीय समुदाय में विक्षोभ पैदा कर दिया है । प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अत्यधिक बल का इस्तेमाल हुआ, पेलेट जैसी चीजों का इस्तेमाल हमेशा विवादास्पद रहता है क्योंकि ये स्थायी चोट पहुंचा सकती हैं।

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