उर्मिलेश-
अभिजीत दीपके और कॉक्रोच जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं-कार्यकर्ताओं से अनुरोध करना चाहता हूँ कि अपने मंच पर किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं, प्रतिनिधियों को आने से रोकिए। आप उनके समर्थन को स्वीकार कीजिए, धन्यवाद दीजिए लेकिन इस विनम्र निवेदन के साथ कि वे अपना समर्थन बाहर से करें।
जंतर-मंतर के धरना स्थल पर जितने राजनीतिक लोग आएँगे, दिखेंगे उतना इस आंदोलन के भटकने, बिखरने, ग़लत हाथों में चले जाने, अपनी-अपनी राजनीति के लिए इस्तेमाल कर लिए जाने का जोखिम बढ़ता जाएगा। आम नागरिकों में विश्वसनीयता और प्रामाणिकता संदिग्ध होते जाएँगे। इस जगह और इस आंदोलन के जैविक, नागरिक और स्वतःस्फूर्त चरित्र को आप जब तक बचा सकते हों बचाइए।
अन्ना आंदोलन के वर्षों बाद एक बार फिर से जागृत और सक्रिय हो उठी देश की युवा ऊर्जा को अगर एक सकारात्मक, सृजनात्मक और दूरगामी स्वरूप देना है तो अन्ना आंदोलन के इतिहास, परिणति और आम जनता के मोहभंग, उसकी ग़लतियों से कड़े सबक़ लीजिए। आँधी की तरह अचानक मिले देशव्यापी जन समर्थन और लोकप्रियता के नशे को अपने लक्ष्य, फ़ोकस, विवेक और दूरदृष्टि पर हावी मत होने दीजिए।
अपने साध्य और साधनों दोनों को स्पष्ट, पारदर्शी, शुद्ध बनाए रखने लिए अनिवार्य बौद्धिक-आत्मिक मंथन और विमर्श कीजिए और ज़्यादा देर किए बिना लोगों के सामने रखिए। अचानक खड़े होने वाले जनांदोलनों के नेतृत्व को लक्ष्यों, मुद्धों, सिद्धांतों, रणनीतियों के बारे में स्पष्टता हासिल करने में समय लगता है। उसे संघर्ष और आत्म-मंथन से ही पाया जा सकता है यह इतिहास हमें बताता है।
सरकार ऐसे स्वतः स्फूर्त, जैविक और उभरते हुए आंदोलनों को नाकाम करने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाती है। नेताओं के चरित्र हनन, बदनाम करने की साज़िशों, भटकाने, बिखराने, भरमाने, भीतर से कमजोर करने, तोड़ने, लोगों की निगाहों में संदिग्ध बनाने और अंततः क्रूरतापूर्वक दबाने-कुचलने की हर कोशिश करती है। मोदी सरकार तो इस मामले में विश्वगुरु ही साबित हो सकती है।
इसलिए हम आप सबसे असाधारण सावधानी की अपेक्षा करते हैं।
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