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दिल्ली

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से नहीं मानने वाले आंदोलनकारी, काक्रोच पार्टी ने शेष मांगें सामने रखीं!

A man in a white t-shirt is on his phone while being surrounded by people under a yellow canopy at an outdoor event.

प्रधान जी के इस्तीफे के बाद सरकार की घबराहट कम नहीं हुई है। काक्रोचों से सरकार के नुमाइंदे लगातार बात कर रहे हैं। मीटिंग जारी है। अब जो-जो पेंडिंग डिमांड है, उस पर मोदी सरकार और सीजेपी टीम आमने सामने होकर वार्तालाप कर रही है। #CJP #JantarMantar #ModiGovernment

Four men sit on white sofas facing each other in a wood-paneled room, engaged in a discussion with papers on the coffee table.

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी छात्र आंदोलन थमता नहीं दिख रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोशल मीडिया पर अपनी संशोधित मांगों की सूची जारी करते हुए कहा है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक बाकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। पार्टी ने छात्रों की आत्महत्या करने वाले परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा, आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करने और दिल्ली पुलिस व रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) से सार्वजनिक माफी की मांग दोहराई है। साथ ही कहा है कि जंतर-मंतर से लेकर पूरे देश की नजर अब इन लंबित मांगों पर है।

Post image from Cockroach is Back with a teal checkmark; lists four demands about resignations and apologies (informational).

जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने कहा- मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगे हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है। जिन बच्चों ने सुसाइड किया उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिस वालों पर एक्शन होना चाहिए।
दिल्ली पुलिस अधिकारी याद रखें कॉकरोच से पंगा लिया है। हमने तो एक मंत्री का इस्तीफा ले लिया, तो तुम लोग क्या चीज हो। छात्रों पर केस वापस होने चाहिए। भैया ये लोकतंत्र है। मुझे एक महीने से लोग कहते थे क्या कर रहे हो कब तक बैठोगे। ये इस्तीफा नहीं देंगे। ये मनमानी सरकार है। मगर हमने कर दिखाया।
-राजेश साहू, पत्रकार


अभिरंजन कुमार-

चलो, हमारे बच्चों ने “प्रधान” का इस्तीफा तो ले लिया, लेकिन इस इस्तीफे के बावजूद “प्रधान मंत्री” की छवि तार-तार हो चुकी है।

विपक्षी दलों में परिवारवाद का पुरजोर विरोध करने वाले प्रधानमंत्री ने अपने मित्र के पुत्र और एक स्थापित निकम्मे मंत्री, जिसके महाभ्रष्ट होने का भी संदेह है, उसे बचाने के लिए क्या क्या नहीं किया! मुंह पर ताला लगाकर, कान में तेल डालकर एक महीना तक सोए रहे।

इस दौरान देश भर में हुए विरोध-प्रदर्शनों में सैकड़ों बच्चे और पुलिस वाले घायल हुए। दिल्ली में तो कथित रूप से पैलट गन तक चलवा दी, जो कश्मीर में आतंकवादियों के ऊपर चलाई जाती थी। लाठियों में कीलें ठोंक-ठोंक कर बच्चों पर प्रहार किया गया। वर्दीधारी सुरक्षाकर्मियों के साथ बिना वर्दी वाले गुंडों को लगाकर बच्चों को पिटवाया गया।

क्या लगता है आपको, देश की जनता अत्यंत मजबूरी में दिये गए इस इस्तीफे को सरकार की एक ईमानदार कोशिश के रूप में स्वीकार कर पाएगी?


अंतत: शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. 12 साल में पहली बार है जब मोदी सरकार को खुद को जनता के प्रति जिम्मेदार मानना पड़ा. इस देश के छात्रों ने, 18-20 साल के लड़के/लड़कियों ने मोदी जी को मजबूर कर दिया कि वो धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा लें. अगर प्रधान का नहीं लेते तो खुद देना पड़ता – बात यही है.
अब इसके बाद राजनाथ सिंह चचा को खुद की कड़ी निंदा करते हुये एक वक्तव्य जारी करना चाहिये. राजनाथ का कहना था कि बीजेपी में इस्तीफे नहीं होते. अब हो गया. आज पहला हुआ है आगे और होंगे.
-विश्व दीपक


नदीम अख्तर-

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने थोड़ी देर पहले ही पत्रकारों से कहा था धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ेगा। और यह हमारी मांग नहीं इन छात्रों की मांग है।

इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। और वही हुआ।

जंतर मंतर से छात्र पहली बार उनके पास आए थे। क्रेडिट पूरा छात्रों को हैं। उनकी एकजुटता और संघर्ष को।

जो मोदी सरकार कहती थी कि हमारे यहां इस्तीफे होते ही नहीं है वहां इस्तीफा करवा दिया।

यहां राहुल की दो बातें बताना बहुत जरूरी हैं-

  • एक उन्होंने अभी कहा था कि मोदी अतीत हो गए हैं और वह फ्यूचर का मुकाबला नहीं कर सकते। यह स्टूडेंट भारत का भविष्य हैं।
  • दूसरी बात कुछ दिन पहले कही थी कि मोदी के हाथ से सरकार और बाकी संवैधानिक संस्थाओं का नियंत्रण निकल गया है। ‌2 साल पहले तक था अब नहीं है और वह एक साल से ज्यादा नहीं रहेंगे।

राहुल के बहुत सारे आकलन सही साबित हुए। यह एक धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा बहुत बड़ा था यह भी। और सबसे बड़ा की प्रधानमंत्री मोदी 1 साल में चले जाएंगे वह अब सबको होता हुआ दिख रहा है।


यशवंत सिंह-

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा हो गया। इसी आंदोलन को लेकर कल देहरादून में पत्रकार साथी विकास जोशी ने मुझ से विस्तार से बात की। बहुत कम मौक़ा होता है जब इतना खुलकर हम पत्रकार लोग अपनी बात कह पाते हैं क्योंकि हम पूरा वक़्त दूसरों की ही बात दुख दर्द सुनाने में लगे रहते हैं। सुनिए और देश की सियासी स्थिति पर भड़ासी विश्लेषण को समझिए!

https://youtu.be/7dw3-Ueabu0?si=ZIbTBrCje-1EarCw

मूल खबर…

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