झांसी– वरिष्ठ वीडियो जर्नलिस्ट गिरीश शर्मा के निधन की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि उन्हें अटैक पड़ा था, परिजन उन्हें अस्पताल ले गए लेकिन बचाया नहीं जा सका। मामला 13 सितंबर का है।
रवीश रंजन शुक्ला-
ओहहह…ये क्या हो गया…मेरी एक सप्ताह पहले ही गिरीश से बात हुई थी…झाँसी में ETV से कैमरामैन थे और बहुत सीधा, अच्छा और क़ाबिल कैमरामैन था…उफ़ भरोसा नहीं हो रहा है…
गिरीश बामुश्किल 45 साल के अंदर होंगे.. काफ़ी समय से देहरादून में शिफ़्ट हो गए थे…मुलाक़ात का वादा था..
हे ईश्वर इतने भले लोगों को हम लोगों से छीन रहे हो…गिरीश हम लोगों ने कितनी यात्राएं कि दिन और रात झाँसी से महोबा, महोबा से टीकमगढ़, टीकम गढ़ से छतरपुर छतरपुर से पन्ना…रात हो या दिन जाड़ा हो या बरसात…गिरीश को शूट बताता बोलते चलिए सर चलते हैं…कितनी यात्राएं कितने जोखिम कितने शूट हमने गिरीश के साथ किया..
गिरीश को ईश्वर अपने चरणों में रखें..बुजुर्ग माता-पिता, छोटे छोटे दो बच्चे और पत्नी को इतना दुःख सहने की हिम्मत दे…
अहसान अली-
शोक सूचना
अलविदा मित्र… श्री गिरीश शर्मा जी वरिष्ठ पत्रकार।
13 सितंबर का वह काला दिन दोस्त गिरीश की जिंदगी में काल बनकर आया। पहली बार अचानक आए साइलेंट अटैक ने हमारे हंसते-खेलते भाई को हमसे हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया।
ईटीवी झांसी में लंबे समय तक साथ काम करते हुए हमारे बीच कैमरामैन और रिपोर्टर से बढ़कर एक अटूट रिश्ता बन गया था। दिन का अधिकांश समय एक साथ बीतता था, अनगिनत यादें थीं। आज भी वो लम्हा आंखों के सामने तैर जाता है जब उनके बड़े भाई की शादी में जाने के लिए हमने ऑफिस से बीमारी का बहाना बनाया था और मेरठ पहुंचे थे। गिरीश के पूरे परिवार ने जिस आत्मीयता और सम्मान से हमारा स्वागत किया था, वह मिठास आज भी दिल में बसी है।
गिरीश अपने घर में बुजुर्ग माता-पिता का अकेला सहारा थे। उनके जाने के बाद उनकी धर्मपत्नी और दोनों छोटे मासूम बच्चों पर दुखों का जो पहाड़ टूटा है, उसकी कल्पना मात्र से रूह कांप उठती है।
अंतिम सांस तक साथ निभाने का वादा करने वाले दोस्त यूं अचानक बीच राह में छोड़ जाएंगे, यह कभी नहीं सोचा था।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस अपार कष्ट को सहने का धैर्य एवं संबल प्रदान करें।
अलविदा मित्र… तुम यादों में हमेशा जिंदा रहोगे!

