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सियासत

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा; यह सरकार और टीवी मीडिया की व्यक्तिगत हार है!

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है। प्रधान ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि वह पिछले दस दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुखी है। इस बीच जंतर मंतर से एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसका एक पोस्टर खासा चर्चा में है। इस पोस्टर में अर्नब गोस्वामी, सुधीर चौधरी, चित्रा त्रिपाठी, रुबिका लियाकत, अमिश देवगन, अंजना ओम कश्यप इत्यादि एंकरों के पोस्टर किसी ईनामी अपराधी की तरह लगाए गये हैं।


इनामी अपराधियों की तरह पोस्टर लग गये हैं जंतर मंतर पर,
स्टूडियो में बैठ कर हिंदू मुसलमान करें ये लोग.
-प्रशांत टंडन, वरिष्ठ पत्रकार


नरेंद्र नाथ मिश्रा-

यह सरकार और टीवी मीडिया की व्यक्तिगत हार है।

आज का अर्नब शो-सोरोस/बांग्लादेशी/पाकिस्तानी/अमरीकी एजेंट के सामने क्यों झुकी सरकार।

एक चैनल ने तो इस मुद्दे से डाइवर्ट करने के लिए नया मुद्दा खड़ा करने की कोशिश को थी-रिजर्वेशन समाप्त करने की।

कुछ चैनल भाषा का मुद्दा उठाकर लगे थे ।

लेकिन जैसा पहले दिन से कह रहा हूँ यह जन आंदोलन था जिसे आप सिर्फ़ भीड़ से मत आंकिए। घरों तक पहुँच गया था। और अंततः सरकार झुकी!


सुरेश चिपलुनकर-

आखिरकार, हमेशा की तरह भाजपा द्वारा,, “सौ जूते और सौ प्याज खाने” वाली कहावत सिद्ध हुई..

भाजपा आईटी सेल के पालतू मूर्खों,, सोशल मीडिया पर आए दिन सबको सर्टिफिकेट बांटने वाले अनपढ़ चाटुकारों,, तथा आजीवन मोदी की बंधुआ मजदूरी का संकल्प लिए हुए गधो..जरा भी शर्म बची हो तो पिछले 3 दिन में लिखी अपनी पोस्ट डिलीट करो,, तुम्हारे paw paw ने फिर तुम्हारे मुंह पर थूकते हुए धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लिया..

और हां!! वो मनोहर कहानी कॉपी पेस्ट मत करना कि हंगामा करने वालों की लिस्ट बन रही है, फोटो खींच रहे हैं, fir होगी, उनकी हालत खराब कर देंगे,, ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला.. एक्को किसान का,, एक्को शाहीन बाग वाले का,, किसी का कुछ उखाड़ नहीं पाए हैं ये..

इसलिए अब चीन के एजेंट, पाकिस्तानी, सोरोस का एजेंट, अर्बन नक्सली, टुकड़े टुकड़े गैंग.. ये सारी भोंगलियां अपने पास रख लो.. और शर्म से डूब मरो..

शाबाश Gen Z.. गजब ही कर दिया बच्चों..


यशवंत सिंह-

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा हो गया। इसी आंदोलन को लेकर कल देहरादून में पत्रकार साथी विकास जोशी ने मुझ से विस्तार से बात की। बहुत कम मौक़ा होता है जब इतना खुलकर हम पत्रकार लोग अपनी बात कह पाते हैं क्योंकि हम पूरा वक़्त दूसरों की ही बात दुख दर्द सुनाने में लगे रहते हैं। सुनिए और देश की सियासी स्थिति पर भड़ासी विश्लेषण को समझिए!

https://youtu.be/7dw3-Ueabu0?si=ZIbTBrCje-1EarCw

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