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सियासत

गोदी मीडिया की कारस्तानी भी ध्यान में रखिए, याद में रखिए!

A protest sign in orange and white text demanding accountability from any party, held in front of a person outdoors.

कृष्ण कांत-

गोदी मीडिया की कारस्तानी भी ध्यान में रखिए-

किसानों को खालिस्तानी कहा, फिर नॉन बायोलॉजिकल को उन्हीं किसानों के आगे झुकना पड़ा।

Anti-CAA प्रदर्शन को विदेशी साजिश बताया, वह कानून आज तक नहीं आया।

छात्रों को भी देशविरोधी, विदेशी टूल किट वगैरह बताया गया, फिर उन्हीं के आगे झुकना पड़ा।

जिनके आगे सरकार को झुकना पड़ता है, वह भारत की जनता है। जनता को आतंकवादी और देशविरोधी बताने वाले मीडिया पर अब भी कोई लगाम नहीं है।

जो मीडिया इसी देश की जनता को देशविरोधी घोषित करे, देश की जनता उसे चौथा खंभा क्यों स्वीकार करेगी? कोई एक कारण बताइए!


युवाओं के इस आंदोलन ने साफ़ कर दिया की अब देश को किसी आंदोलन को चलाने और जीतने के लिए किसी बड़े चैनल की ज़रूरत नहीं है। आज उन चैनलों को मुंह छिपाना पड़ेगा।

-अशोक दास (वरिष्ठ पत्रकार)


अजय एस एन सिंह-

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के साथ मोदी सरकार के लिए मेरा एक सुझाव है। अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। अपनी आईटी सेल और मीडिया पर पानी की तरह पैसे ख़र्च बहाना बंद कर दे। साथ ही मीडिया को भी दबाव से मुक्त कर दे। क्योंकि ज़ेन-ज़ी का दौर है। सबके हाथ में मोबाइल है। अब कोई भी ख़बर न छिपाए छिपेगी और ना ही दबाए दबेगी।

बुजुर्गों का वो दौर गया, जब लोगों के लिए समाचार का श्रोत सुबह की चाय के साथ ‘अख़बार’ और शाम की चाय के साथ ‘टेलीविजन’ हुआ करती थी। अब हर घटना सोशल मीडिया के माध्यम से तत्काल देशभर में प्रेषित हो जाती है। टेलीविजन और अख़बार जैसे पारंपरिक मीडिया का दौर आख़िरी सांसें गिन रहा है।


सुभाष सिंह सुमन-

1:- इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते।
बच्चों ने हलक में हाथ डालकर ले लिया।
2:- प्रदर्शनकारियों को देशद्रोही बताया जा रहा था। दमन के लिए देशद्रोह वाला कानून NSA आजमाया जा रहा था।
अब सारे FIR वापस होंगे।
3:- दिल्ली पुलिस और RAF की वर्दी पहनकर गुंडई करने वालों को हीरो बनाया जा रहा था।
RAF चीफ खुद गलती मान रही हैं।

अब भक्तगण भड़के हुए हैं। कई बेचारे तो सदमे में हैं। प्रोसेस ही नहीं कर पा रहे हैं। पता नहीं अमेजन/फ्लिपकार्ट वगैरह पर बरनॉल का स्टॉक बच रहा है या समाप्त हो गया! यदि स्टॉक है, तो उचित उपयोग करें। सर्किल में कोई अंधभक्त है, तो उसे तुरंत गिफ्ट करें। यदि भक्तमित्र थोड़ा पढ़ लेता हो, तब उसको अज्ञेय का लिखा ‘सन्नाटे का छंद’ गिफ्ट करें।

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