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सुख-दुख

गालियां स्ट्रेस बस्टर भी होती हैं; लेकिन ये एक शोध का विषय है कि गाली.. कहाँ, कब और किसे देनी चाहिए!

Hospital ward with several injured young men watching a TV feature of the Prime Minister; a speech bubble reads in Hindi about forgiving children's mistakes.

देश में गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे जनप्रतिनिधियों को लेकर दावा किया गया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सबसे अधिक सांसद और विधायक ऐसे मामलों का सामना कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा में भाजपा के 63 सांसद, यानी पार्टी के कुल सांसदों का करीब 26 प्रतिशत, गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी भी दल के मुकाबले यह संख्या सबसे अधिक है।
इसी तरह, देशभर की विभिन्न विधानसभाओं में भाजपा के करीब 436 विधायक, यानी कुल भाजपा विधायकों का लगभग 26 प्रतिशत, गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आपराधिक मामला दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। इन मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित अदालतों द्वारा सुनवाई पूरी होने के बाद ही होता है।
-द हिंदू की रिपोर्ट

Hindi slide with two bullet points: MPs and MLAs. It states BJP had the highest number of MPs facing serious cases (63 members, 26% of its total) and mentions The Hindu as the report source.

गालियां स्ट्रेस बस्टर भी होती हैं… लेकिन यह एक शोध का विषय यह है कि गाली, कहाँ, कब और किसे देनी चाहिए।
कभी-कभी गुस्सा इतना भर जाता है कि एक-दो गाली मुंह से निकल ही जाती हैं और मन हल्का हो जाता है। मनोविज्ञान भी मानता है कि भावनाओं को दबाने से बेहतर है उन्हें सुरक्षित तरीके से बाहर निकालना पर बस इतना ध्यान रखे कि ये कार्य भी एक लिमिट और बैलेंस में रहे और किसी को हानि न पहुंचाये….शुक्रिया
-रविकांत पचिसिया


उर्मिलेश-

अब गालियां देश के लिए ‘बहुत बड़ा ख़तरा’ बन गई हैं! सारे खतरे सारी चुनौतियां खत्म! अब गालियां ही खतरा हैं! देश के विकास के रास्ते में रोड़ा हैं! पता नहीं, आजकल के युवा ‘नई-नई गालियां’ कहां से ‘सीख’ रहे हैं! हमारे यहां तो हमेशा से महान् मंत्रों, सुरीले श्लोकों और ऋषि-मुख से निकली ऋचाओं की सुंदर स्वर-लहरियां ही गूंजती रहती थीं! हाय! मनुस्मृति के जमाने में हमारे यहां सब कुछ कितना महान् और दिव्य था! तब सारे अधिकार सिर्फ 4 या 5 फीसदी कुलीन लोगों के पास होते थे! हा! हा! सारी मुश्किल इस डेमोक्रेसी ने पैदा की है!

पर करना तो कुछ पड़ेगा ही! “हमारे पूर्ण नियंत्रण वाली इस डेमोक्रेसी” में इससे निपटने का उपाय क्या है? देर किये बगैर गालियों को रोकने के लिए देश में कठोर कानून बनना चाहिए. जरूरत हो तो इस बाबत संविधान संशोधन भी किया जा सकता है, जिसमें स्पष्ट प्रावधान हो कि “सत्ता-पक्ष के सदस्यों-समर्थकों” के अलावा देश में किसी को भी गाली देने का अधिकार नहीं होगा! अन्य सभी दंड के भागी होंगे!


कृष्ण कांत-

साहेब जी आज फिर रात 11 बजते ही दुखी हो गए कि बच्चों ने गालियां दीं। इन्हें कल्चरल शॉक लगा कि लड़कियां गाली कैसे दे सकती हैं! हम भी इनसे सहमत हैं।

बस हम ये पूछना चाहते हैं कि क्या संसद में देश के पहले पीएम को अय्यास कहना संस्कारी कृत्य है? कल को संसद में पूर्व पीएम को गाली बकने की इस नई परंपरा से आपका भी सामना हो सकता है, आपने उसे कैसे इग्नोर कर दिया?

अगर 18 साल के बच्चे से आप संस्कारी होने की उम्मीद करते हैं तो बुड्ढे सांसदों से ये उम्मीद क्यों नहीं जिसका पाँव कब्र में लटका है? ज्यादा जिम्मेदारी किसके कंधे पर है? 18 साल के आम बच्चे पर या संसद में बैठे एक सदस्य पर?

बीजेपी के एक सांसद ने संसद के अंदर ही कटुवे, भड़वे जैसी गाली दी थी। उसपर क्या कार्रवाई हुई? संस्कार का ये दोहरा मापदंड कैसे चलेगा?

सर, हाथ जोड़ कर निवेदन है कि बच्चों से मत उलझिए। उनके साथ बुरा हुआ है, उसे ठीक कीजिए। फतेहपुर में स्कूली बच्चों ने पानी और पंखा मांग लिया तो उनके घर पुलिस जाकर उन्हें डरा रही है।

आप गले लगाकर माफ करने की बात तो कह रहे हैं लेकिन हो रहा है इसका उल्टा। जहां लड़ना था, जहां तनकर खड़ा हो जाना था, वहां चूं नहीं किया। सौ बार की बेइज्जती, टैरिफ, आदेश, निर्देश सब झेल लिया।

कुछ बातों को नजरअंदाज भी करना होता है, जैसे उस अंतर्राष्ट्रीय अहमक अमेरिकी को नजरअंदाज कर दिया, ये तो फिर भी अपने बच्चे हैं। युवाओं के मुद्दे पर चर्चा के दौरान संसद में न आना और रोज आधी रात को रील बनाना ये संदेश देता है कि मानसिक उलझन बहुत बढ़ गई है।

इसे बिना रील बनाए संभालने की जरूरत है। पेपर लीक के चलते 22 बच्चों ने आत्महत्या की।

Portrait of Pradeep Meghwal with Rajasthan label beneath; name and location shown.

प्रदर्शन में सैकड़ों बच्चों पर केस लादे गए। कितने बच्चे गिरफ्तार हुए, गिनती नहीं है। पुलिस स्कूली बच्चों को घर जाकर धमका रही है।

बाकी बची रियाया को राजा ने माफ कर दिया है। राजा ने बड़ा दिल दिखाते हुए आवाम को जिंदगी बख्श दी है। प्रजा में खुशी का माहौल है।


सुरेंद्र राजपूत-

बनारस के सांसद को गाली पर इतना बिलखना नहीं चाहिए। बनारस में तो गालियों पर कवि सम्मेलन तक होते हैं।

क्या तीन बार सांसद रहने के बाद भी आपको बनारस की यह बेजोड़ संस्कृति छूकर नहीं गई जो गाली पर रोकर, बच्चों को माफी मांगने पर मजबूर कर रहे हैं।

बनारस हास्य को भी रेखांकित करता है। बनारस बच्चों को सर आंखों पर रखता है। बनारस विचलित नहीं होता। बनारस हास्य को बदले की भावना से नहीं लेता। बनारस गालियों का उत्सव भी मनाता है और संस्कृति के शिखर को भी गढ़ता है।

आप तीन बार के सांसद रहने के बाद भी बनारसी न बन सके, यह आपका दुर्भाग्य ही है। रही बात 15 साल की बच्ची को पूरे शासन प्रशासन, ट्रोलर्स, मीडिया के डंडे से प्रताड़ित करके माफी मांगने पर मजबूर करना, आपकी छाती की चौड़ाई लंबाई सब बता रहा है।

देश यह क्रोनोलोजी समझ रहा है कि इधर आपने रील बनाई, उधर 15 साल की बच्ची मजबूर हुई कि वह माफी मांगे। माफी आपको मांगना था, आपने उस बच्ची से माफी मंगवाई, देश यह देख रहा है।

बच्चो से लड़ती सत्ता, बच्चों को माफी मांगने को मजबूर करती सत्ता, बच्चों को ट्रोल करती सत्ता को सब देख रहे हैं। बच्चे आपको माफ नहीं करेंगे, आप भले उनसे माफी मंगवा लीजिये


Close-up of an older man with white beard and glasses indoors, with two Hindi text banners about a mother and a girlfriend (meme-style caption).

मैं राहुल गांधी की माँ को जर्सी गाय बोल सकता हूँ।
मैं शशि थरूर की पत्नी को 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड बोल सकता हूँ।
मैं ममता बनर्जी को छपरियों की तरह ओ दीदी ओ दीदी बोल सकता हूँ।
पर तुमने मेरी माँ को गाली कैसे दी?
-अभय पांडेय

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