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मेट्रो अस्पताल नोएडा ने बताया 25 लाख का खर्च, एम्स में एक लाख में हुआ इलाज!

नोएडा स्थित मेट्रो अस्पताल पर एक मरीज के इलाज को लेकर परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि अस्पताल ने हृदय में स्टेंट लगाने के साथ ही वाल्व संबंधी उपचार की आवश्यकता बताते हुए करीब 25 लाख रुपये का अनुमानित खर्च बताया था। बाद में दिल्ली के एम्स में मरीज का उपचार लगभग एक लाख रुपये में हो गया और वाल्व संबंधी प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ी।

Portrait of a middle-aged man with a mustache looking at the camera, wearing a pink shirt and dark blazer.

प्रशांत शुक्ला-

मेट्रो हॉस्पिटल ग्रुप की सच्चाई : परसों पीलीभीत के संजय रॉयल पार्क निवासी आशुतोष शर्मा की बहन के ससुर को हृदय संबंधी समस्या के कारण मेट्रो हॉस्पिटल, नोएडा में भर्ती कराया गया। अस्पताल प्रशासन ने स्टेंट और वाल्व दोनों में समस्या बताते हुए इलाज पर 25 लाख रुपये का खर्च बताया।

इसके बाद केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद जी से बात करके मरीज को एम्स, दिल्ली में भर्ती कराया गया, जहां केवल स्टेंट डाले गए। एम्स में इलाज पर महज एक लाख रुपये खर्च हुए। मरीज की हालत संतोषजनक है और कल एम्स से छुट्टी मिल जाएगी।

क्या यही नैतिकता है कि इलाज के नाम पर किसी का घर बिक जाए? इन्हीं डॉ. लाल को पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं।

निजी अस्पताल असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा पर पहुंच चुके हैं और डकैती पर उतारू हैं। निजी अस्पतालों में संवेदनशीलता शून्य हो गई है। इन पर प्रभावी अंकुश लगाना अत्यंत आवश्यक है।

इस मामले ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, इलाज के अनुमानित खर्च और मरीजों को दी जाने वाली चिकित्सकीय सलाह की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का कहना है कि यदि वे मेट्रो अस्पताल के बताए इलाज और खर्च को स्वीकार कर लेते तो परिवार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता था।

परिजनों ने निजी अस्पतालों पर प्रभावी नियामक अंकुश लगाने की मांग करते हुए कहा है कि इलाज के नाम पर मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक संकट में डालना अमानवीय है। सरकार को ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने तथा इलाज और शुल्क में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस व्यवस्था करनी चाहिए।

मेट्रो अस्पताल अथवा संबंधित चिकित्सक का पक्ष अभी उपलब्ध नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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