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आज के अखबार : भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं और राजनीति पर कोई खबर नहीं होती, आज भी नहीं है

Newspaper front page about a Manipur bandh over NRC; photo shows a street with a large 'No NRC' banner across storefronts.

3 मई 2023 से शुरू हुई मणिपुर की जातीय हिंसा के बाद से संकट लगातार गहराता गया है। दो समुदायों के बीच शुरू हुए इस संघर्ष ने राज्य के सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह विभाजित कर दिया है। हिंसा में 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 60,000 से अधिक लोग बेघर होकर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। 7,800 से ज्यादा मकान और सैकड़ों धार्मिक स्थल नष्ट हुए हैं। दोनों समुदायों की एक-दूसरे के क्षेत्रों में आवाजाही पूरी तरह बाधित है। लंबे समय तक अस्थिरता के बाद फरवरी 2025 में पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। फरवरी 2026 में नई सरकार के गठन के बावजूद शांति व्यवस्था बेहद नाजुक बनी हुई है। वहां बंद चल रहा है और दिल्ली में पहले पन्ने पर खबर नहीं है। इस खबर का शीर्षक हिन्दी में इस प्रकार होगा – मणिपुर में NRC को लेकर बुलाए गए बंद से घाटी के ज़िलों में जन-जीवन ठप। दो उपशीर्षक हैं – राज्य सरकार ने मांग का समर्थन किया, केंद्र को प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना और दूसरा है, छात्र और नागरिक समूह 2027 की जनगणना से पहले एनआरसी लागू करने की मांग कर रहे हैं। आप जानते हैं कि यह जनगणना 2021 में होनी थी और अब हो रही है। जनगणना से संबंधित विरोध के कारण तस्वीर मंगलवार को इंफाल की एक सुनसान सड़क की है। पीटीआई की इस फोटे के कैप्शन के अनुसार, ‘कैंपेन फॉर जस्ट एंड फ्री डेलिमिटेशनने दो दिन की हड़ताल बुलाई है, जिसमें मणिपुर में नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स लागू करने और जनगणना से पहले आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को उनके मूल घरों में वापस भेजने की मांग की गई है।

संजय कुमार सिंह

आज कई अखबारों में छपी खबर के अनुसार, दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येन्द्र जैन समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। खबर पढ़कर मुझे याद आया कि सीबीएसई की परीक्षा की कॉपी जांचने के लिए कंपनी चुनने के टेंडर में भी गड़बड़ी हुई थी। उससे छात्रों को परेशानी हुई, आंदोलन हुआ लेकिन कार्रवाई की खबर नहीं है। यहां जल बोर्ड के टेंडर में गड़बड़ी के लिए पूर्व मंत्री को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। कारण और चाहे जो हो, दिखाई यह दे रहा है कि भाजपा के खिलाफ मामला हो तो कार्रवाई नहीं होती है। भाजपा के विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई का मौका मिले तो सरकार नहीं चूकती है। दैनिक भास्कर में छपी खबर के अनुसार, एसीबी 1.52 करोड़ रुपए का मनी ट्रेल खंगाल रही है। अभी सबूत मिलने की खबर नहीं है लेकिन 1.52 करोड़ रुपए के लिए पूर्व मंत्री समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आप जानते हैं कि चंदा-चढ़ावा चोरी के स्पष्ट मामले में बड़े लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है और जिन आम सेवकों के खिलाफ कार्रवाई हुई है उनके यहां से बराममदगी और सीसीटीवी फुटेज जैसे सबूत हैं। इस संबंध में आज हिन्दुस्तान टाइम्स की सेकेंड लीड देख सकते हैं। इससे पहले, यूजीसी नेट की 25 जून की परीक्षा 16 अगस्त को रद्द करने की घोषणा की गई जबकि कारण प्रश्न पत्र में गड़बड़ी और उसे स्वीकार किया जाना है। इसे समझने और स्वीकार करने में इतना समय लगने का कोई कारण नहीं है और पहले ही रद्द नहीं किए जाने का कारण यह हो सकता है कि उस समय जंतर मंतर आंदोलन जोरों पर था। लेकिन परीक्षा एनटीए ने करवाए हैं और प्रश्नपत्र में गड़बड़ी का मतलब अयोग्य औऱ अक्षम लोगों को प्रश्नपत्र बनाने का काम सौंपना भी हो सकता है। इससे पहले प्रश्न पत्र तैयार करने वालों को ही लीक करने के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। भाजपा से इनके संबंध सर्वविदित हैं और जाहिर है, इस बात की संभावना है कि प्रश्नपत्र सेट करने का काम अयोग्य और अक्षम लोगों से कराया जा रहा हो जो भाजपा के करीबी हैं।

दिल्ली में चले छात्र आंदोलन से हुए राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए भाजपा ने लोगों का ध्यान झारखंड छात्र आंदोलन की तरफ खींचने की पूरी कोशिश की। झारखंड सरकार ने मांगें मान लीं तो आंदोलन खत्म हो गया लेकिन केंद्र सरकार से संबंधित मामलों में लगभग कुछ नहीं हुआ है। अगर आपको लग रहा है कि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने की मौजूदा व्यवस्था में सीजेपी के आंदोलन से भारी बदलाव आया है तो मैं कहूंगा कि सरकार पर दबाव बनने के अलावा कुछ खास नहीं हुआ है। इतने दिनों बाद आज खबर छपी है कि आंदोलन से संबंधित जो मुकदमे आंदोलन खत्म होने के साथ ही खत्म हो जाने चाहिए थे उन्हें सुप्रीम कोर्ट खत्म करेगा। लेकिन सरकार के लिए पुलिस ने आंदोलन को कुचलने की कोशिश की, गोली चलाई, बर्बरता की – को सरकार मानने के लिए तैयार नहीं है। किरेन रिजिजू ने कहा है कि कोई मरा नहीं, कोई गंभीर जख्म के कारण अस्पताल में दाखिल नहीं हुआ तो संयम बरतने के लिए पुलिस की प्रशंसा की जानी चाहिए। सच्चाई यह है कि आंदोलन की शुरुआत ही 20 से ज्यादा बच्चों की आत्महत्या के बाद हुई थी और सरकार ने मुआवजा देने की बात स्वीकार करके भी मुआवजा नहीं दिया है। घायल लोग अस्पताल में दाखिल हुए ही थे, छर्रों से घायल लोगों को मीडिया पर दिखाया जा चुका है और गंभीर रूप से जख्मी तो पुलिस वाले भी हुए हैं और उसका तो प्रचार भी किया-करवाया गया। कहने की जरूरत नहीं है कि जो पुलिस अपनी सुरक्षा नहीं कर पाई, यह जानते हुए नहीं की कि आंदोलन में सैकड़ों अपराधी शामिल हैं, उनमें से किसी को गिरफ्तार करने की खबर नहीं है और इन सारी बातों से तो यही लगता है कि सरकार एक अक्षम और अयोग्य पुलिस बल की प्रशंसा कर रही है। अखबारों में ऐसी कोई खबर नहीं होती है, सो अलग।   

आज मेरे दस में से नौ अखबारों की लीड एक ही है। दि एशियन एज को छोड़कर बाकी सभी अखबारों को लगता है कि छात्र आंदोलनकारियों के खिलाफ एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का तैयार हो जाना ही सबसे बड़ी खबर है। द हिन्दू के उपशीर्षक के अनुसार, खबर यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट नीट विरोध प्रदर्शनों को लेकर छात्रों के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने के लिए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करने पर सहमत हो गया है। कोर्ट ने विरोध से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए एक पैनल बनाने की घोषणा की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुलिस ने अभी तक एफआईआर की सूची जारी नहीं की है। दैनिक भास्कर का फ्लैग शीर्षक है, सभी पक्षों से नाम लेकर सुप्रीम कोर्ट आज करेगा कमेटी का ऐलान। मुख्य शीर्षक यही है कि पुलिस सख्ती की जांच उच्चाधिकार प्राप्त समिति करेगी। हमने देखा है कि इलेक्टोरल बांड से लेकर अनिल मसीह तक के मामले में और अभी हाल के मनन मिश्रा के आदेशों के संबंध में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है और आदेश रद्द होने भर से अखबार वाले सरकार के लिए अच्छा हेडलाइन मैनेजमेंट कर देते हैं। आज भी वही हुआ है। वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन ने लिखा है, …. किसी मामले को ठंडे बस्ते में डालना हो तो कमेटी बना दो। ये खेल दशकों से चलता आया है। बेला त्रिवेदी किस्म की किसी रिटायर जज के नेतृत्व में कमेटी बन जायेगी और अनंत काल तक जांच चलती रहेगी। सवालों के घेरे में अमित शाह भी हैं, उनके गृह मंत्री रहते कमेटी क्या जांच करेगी? फिर भी आज मेरे 10 में से नौ अखबारों की लीड यही खबर है। दि एशियन एज की लीड के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत की चुनाव प्रणाली की प्रशंसा की है। अमेरिका में चुनाव सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए ट्रम्प ने भारत के वोटर आईडी कार्ड का उल्लेख किया। अमर उजाला में भी यह खबर पहले पन्ने पर है और इसका शीर्षक है, भारतीय चुनाव व्यवस्था के मुरीद हुए ट्रम्प। कहने की जरूरत नहीं है कि यह भी सरकार के काम-काज का प्रचार ही है लेकिन ज्यादातर अखबारों ने तात्कालिक फायदे वाली खबर को महत्व दिया है। चुनावी व्यवस्था के प्रचार के लिए इसका उपयोग भविष्य में कभी भी तमाम तरीकों से किया जा सकता है।

आइए, अब आज की कुछ दूसरी खबरें भी देख लें। दि एशियन एज में पहले पन्ने पर जो दूसरी महत्वपूर्ण खबरें हैं उन्हें सबसे पहले लिख देता हूं। इनमें एक खबर मणिपुर की है। इस खबर के अनुसार, ‘कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन’ (जेएफडी) की अपील पर 48 घंटे की आम हड़ताल के कारण मंगलवार को मणिपुर के पांच घाटी ज़िलों में आम जनजीवन प्रभावित हुआ। छात्र और नागरिक समाज के समूहों ने 2027 की जनगणना से पहले 1951 को आधार वर्ष मानकर ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स’ (एनआरसी) को अपडेट करने की अपनी मांग और तेज़ कर दी है। इससे पहले कश्मीर से खबर थी, कश्मीरियों (विशेषकर कश्मीरी पंडित कर्मचारियों) को सुरक्षा कारणों से घरों के भीतर रहने के निर्देश दिए गए थे। दोनों अलग-अलग क्षेत्रीय और सुरक्षा चिंताओं से जुड़े मुद्दे हैं। सरकार के इस दावे के बावजूद हैं कि हथियारबंद नक्सलियों को खत्म कर दिया गया है। आतंकवाद को बहुत पहले खत्म हो गया था। दि एशियन एज की एक खबर का शीर्षक है, कोलकाता में सीजेपी के लिए एक के बाद एक दरवाज़े बंद होते गए। खबर के अनुसार, जिस शहर ने इसी महीने के शुरू में बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन की मेज़बानी करके अपनी समावेशी संस्कृति का प्रदर्शन किया था, उसी शहर ने मंगलवार को एक अलग ही चेहरा दिखाया। नरेंद्र मोदी सरकार को हिला देने वाले आंदोलन के एक युवा नेता ने आरोप लगाया कि शहर के कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों – जैसे बोबाज़ार में 150 साल पुराने भारत सभा हॉल और प्रेस क्लब कोलकाता – ने उनके संगठन को एक तय बैठक आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। कॉकरोच जनता पार्टी के नेता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि भारत सभा (या इंडियन एसोसिएशन) ने संगठन की आंतरिक बैठक के लिए मौखिक बुकिंग कन्फर्मेशन से पीछे हटते हुए अनुमति देने से मना कर दिया। उन्होंने हॉल को “स्थानीय बीजेपी नेताओं से धमकी भरे कॉल” आने का भी आरोप लगाया।

नवोदय टाइम्स की एक खबर के अनुसार, नीरव मोदी के वकील रहे विजय अग्रवाल नकदी के साथ लंदन में पकड़े गए। उनपर वर्क परमिट के बिना वहां काम करने का आरोप है। देशबन्धु की खबर के अनुसार, महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने पुणे में राहुल गांधी के “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम के लिए नया अड़ंगा लगाया है। वहां 22 को कार्यक्रम की तैयारी है और डरी हुई भाजपा सरकार इसे रोकने में लग गई है। हिन्दुस्तान टाइम्स की सेकेंड लीड का शीर्षक है, एसआईटी ने राम मंदिर ट्रस्ट में ढेरों अनियमितताओं को रेखांकित किया है लेकिन दो शिखर के लोगों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार राजधानी दिल्ली के अल्पसंख्यक प्रभावित क्षेत्रों में एसआईआर के तहत ज्यादा जांच हुई है। द हिन्दू की सेकेंड लीड के अनुसार, झारखंड में छात्र आंदोलन के कारण करीब 2000 लोगों का भविष्य अधर में। यह खबर आज इंडियन एक्सप्रेस में भी है। इसका शीर्षक है, ‘सब कुछ खत्म हो गया’: उनसे मिलिए जो बेरोजगार हो गए हैं क्योंकि झारखंड सरकार ने परीक्षा रद्दा कर दी है। खबरों के अनुसार, सफलतापूर्वक परीक्षा पास कर चुके ये लोग सरकारी कर्मचारी हैं और आंदोलन के कारण परीक्षा रद्द करने की घोषणा से प्रभावित हुए हैं हालांकि सरकार ने अभी ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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