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आयोजन

राहुल गांधी का पुणे में हुआ ‘छात्रों की गूंज’ आंखें खोल देने वाला कार्यक्रम था!

Group of people on a stage posing for a photo at an event, with a large banner reading 'SMASH THE PATRIARCHY' in the background and a TV-style 'LIVE' graphic on the right.

प्रशांत टंडन-

राहुल गांधी की पॉलिटिक्स का एल्गोरिथम:कल रात को पुणे में हुआ ‘छात्रों की गूंज’ आंखें खोल देने वाला कार्यक्रम था. भारत की राजनीति में शायद सबसे अनोखा. देश के मर्दों की ट्रेनिंग थी कि उन्हें समाज में कैसे रहना है. क्या क्या नहीं करना है.

कल कितने ही पिताओं, भाइयों, पतियों, साथ पढ़ने वाले या काम करने वाले पुरुषों ने देखा और सुना कि एक लड़की बस, ट्रेन में कैसे सफ़र करती है कैसे स्कूल, कॉलेज या काम पर जाती है.

थैंक्यू राहुल गांधी, और उन लड़कियों का भी शुक्रिया जिन्होंने हिम्मत और बेबाकी से अपनी आपबीती मंच पर सुनाई.

मंच पर कॉन्फिडेंस से अपनी बात रखने वाली लड़कियों के साथ राहुल गांधी खड़े हैं, सामने हज़ारों लड़कियां हैं और पीछे लिखा है “Smash Patriarchy” यानि “पितृसत्ता को ध्वस्त करो”. ये शिक्षा से ही हो सकता है.

जो काम 1848 में पुणे में ही सावित्री बाई फुले ने शुरू किया था उसी का फल अब दिखाई दे रहा है.

नेक्स्ट लेवल सोशल इंजीनियरिंग: जब भी सामाजिक न्याय की बात होती है, मनुस्मृति से पैदा हुये भेदभाव पर विमर्श में जातिगत अन्याय की बात तो होती है लेकिन 50% जनसंख्या पर मनुस्मृति जाति, धर्म से आगे जाकर लागू होती है इस पर चर्चा कम होती है. कल पुणे में खुल कर हुई.

पहली बार किसी राजनीतिक मंच पर, एक राष्ट्रीय नेता के सामने महिलाओं का इतना बोल्ड एक्सप्रेशन देखने को मिला.

जंतर मंतर आंदोलन में भूख हड़ताल पर बैठी नेहा, दानिश, मुंबई में पुलिस की वैन को रोकने वाली रिया अहीर, 56 इंच का छोटा बंदर नारा लगाने वाली सखी और मलीहा, पुलिस बर्बरता का जवाब गाली देकर मोदी को नॉन बायोलॉजिकल से बायोलॉजिकल बनाने वाली रुचिका जैसे सैकड़ों हिम्मती लड़कियों ने लीडरशिप दिखाई.

अब ये पहिया उल्टा नहीं घूम सकता.

राहुल गांधी की छापेमार राजनीति: अचानक एक बड़ा राजनीतिक कदम उठा लेना भी राजनीति में नया एलिमेंट है. कांग्रेस भी शायद इसके लिए अब तैयार हो रही है.

प्रधानमंत्री निवास पर धरना और पेलेट गन के विक्टिम साहिल लोचब की FIR न दर्ज होने पर पुलिस थाने में 5 घंटे धरने पर बैठना और फिर FIR लेकर ही उठना इसके दो उदाहरण है. सरकार और मोदी इस पॉलिटिकल यॉर्कर के लिये तैयार नहीं थे. बुरी तरह बीट हो गये.

मोदी के पास जो औजार हैं उनमें प्रमुख है हिंदू मुस्लिम, गोदी मीडिया, झूठे वादे करना, विरोधियों पर ईडी सीबीआई छोड़ना. ये औजार अब पुराने पड़ चुके हैं.

राहुल गांधी का पूरा कार्यक्रम इस लिंक पर देखें-

https://twitter.com/i/broadcasts/1XxygwzywDLGM

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