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वेब-सिनेमा

डेरा प्रमुख राम रहीम ने जिन 400 लोगों को बधिया कराया था, आज वही उसके खिलाफ केस लड़ रहे हैं!

A guru sits cross‑legged in meditation on a rock with a garland around the neck, as people enter a cave behind him.

स्वामी आनंद देव-

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर सीबीआई की चार्जशीट में एक आरोप यह भी है कि गुरमीत ने अपने 400 अनुयायियों का शुद्धीकरण कराया, उसने बाकायदा सर्जन रखे हुए थे, जो लोग सत्य की और आत्मज्ञान की गहरी प्यास रखते थे, वह उनसे कहता था कि जब तक काम क्रोध मन से दूर नहीं हुए, तब तक आत्मज्ञान कैसे हो सकता है?

यह लाइन लगभग हर अज्ञानी संत, महात्मा बोलता है, अगर तुम किसी ऐसे व्यक्ति के मार्गदर्शन में साधना कर रहे हो, जो स्वयं सत्य को उपलब्ध नहीं हुआ है, सबसे पहले तो वह साधना को कठिन करेगा ताकि तुम कर न पाओ, जब कर नहीं पाओगे तो तुम्हें भी लगेगा कि गुरु जी तो ठीक हैं लेकिन साधना कठिन है और हम कर नहीं पा रहे हैं l

बुद्ध जब ज्ञान की खोज में थे, उन्हें भी एक साधू मिला, उसने भी भूखे रहकर 40 दिन की कठिनतम साधना बुद्ध को दी, इतना कर लोगे तो ज्ञान को उपलब्ध हो जाओगे लेकिन बुद्ध लग गए, जितना उसने बताया, बुद्ध उससे ज्यादा ही कर रहे थे, जब बीस दिन बीते बुद्ध का जीवन संकट में पड़ गया, लेकिन बुद्ध लगे ही रहे, फिर साधू भी घबराया, आज कल के साधू संतों से ईमानदार रहा होगा, उसने कहा कि मैं कह नहीं सकता कि यह विधि काम भी करती है क्योंकि मैंने खुद कभी इसे नहीं किया, मैं खुद ही ज्ञान को उपलब्ध नहीं हूँ, तुम क्षमा करो l

अगर तुमने अज्ञानी गुरु की कसौटी पार कर दी क्योंकि कठिन को भी बहुत लोग चुनौती मानकर लग जाते हैं, अगर गुरु ने कहा है कि सुबह 4 बजे से उठकर जाप करना है तो वे 3 बजे से ही लग जाते हैं, दो घण्टे कहा है तो वे तीन घण्टे लग जाते हैं l एक प्रसिद्ध संत है तो वह अपने चेलों को एक शब्द दो लाख बार दोहराने को देते हैं, कुछ के लिए यह असंभव है लेकिन बहुत से झक्की हैं, वे दो से ऊपर भी निकल जाते हैं, पूरे दिन लगे ही रहते हैं l अब किसी शब्द को बार-बार दोहराना मानसिक विक्षिप्तता का लक्षण है, इससे आदमी टेप रिकॉर्डर तो बन सकता है लेकिन आत्मज्ञानी कैसे हो जाएगा? फिर झक्की चेले जब पूछते हैं कि गुरु जी हम पूरी साधना विधिवत कर रहे हैं तो फिर हमको सत्य की अनुभूति क्यों नहीं हो रही है तो उत्तर मिलता है कि अभी तुम्हारे भीतर बहुत काम क्रोध मौजूद है, पहले इसे दूर करो l जैसे काम क्रोध सत्य की प्राप्ति से पहले छूट सकते हैं l यह अज्ञानी गुरुओं के कॉमन उत्तर हैं, वे टालना चाहते हैं l

400 लोग बधिया किए गए, लेकिन प्रयोग असफ़ल हुआ, आज वे ही लोग राम रहीम के खिलाफ केस लड़ रहे हैं l प्रयोग की कोई आवश्यकता ही नहीं थी, भारत में लाखों हिजड़े हैं, उनके पास कामवासना का तंत्र ही नहीं है लेकिन वे न किसी सत्य को उपलब्ध हैं और न किसी ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त हैं l

जैसे किसान फसल में गोबर और सड़ी गली खाद लगाते हैं, वही खाद फ़सल में फूल लाती है, सुगंध लाती है, फल लाती है l पौधा उस खाद को रूपांतरित कर लेता है l उसी तरह जो ऊर्जा कामवासना बनतीं हैं, वही समाधि बनती है l इसीलिए करवट से लेटकर कोई समाधि में प्रवेश नहीं कर सकता है, रीढ़ की हड्डी सीधी हो, चाहे लेटे हों या बैठे हों, तभी समाधि में प्रवेश कर सकते हैं l जो ऊर्जा काम बनती है, वही करुणा और प्रेम में रूपांतरित होती है l नपुंसक होकर तुम केवल सम्भोग की संभावना को ही नष्ट नहीं करते बल्कि तुम समाधि की संभावना को भी नष्ट कर देते हो….

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