रवीश कुमार-
शेयर बाज़ार को लेकर चुप रहना चाहिए। अब शेयर बाज़ार भारत की सुपर तरक्की का प्रतीक नहीं रहा। पहले से ही गिर रहा था मगर जिस दिन से जीडीपी के नंबर आए हैं, 7.8 वाले, उसे देख कर लगता है मार्केट खिसिया गया है। ढिमलाते जा रहे हैं।
कोविड के बाद जो लोग बैंकों से अपनी पूंजी निकाल कर मार्केट में लाए हैं, उन्हें घबराना नहीं चाहिए। ऐसे किसी की तलाश कीजिए जिसका पैसा भी डूब गया हो, वोट भी कट गया हो। ऐसे किसी का अनुभव सामने लाइये। बाकी दुखी लोगों को राहत मिलेगी कि वोट और नोट दोनों डूबने के बाद भी कोई हालात का सामना कैसे कर रहा है।
जो लोग दो साल पहले मार्केट को एक लाख पर पहुंचा दे रहे थे, उन लोगों को डिस्टर्ब मत कीजिए। वो तो अच्छा ही चाहते थे, अब मार्केट अपना भला नहीं चाहता है तो उनका क्या दोष।
सुभाष सिंह सुमन-
यह डराने के लिए नहीं कह रहा, लेकिन फैक्ट है कि इंडियन मार्केट के बुरे दिन अभी बीते नहीं हैं। सितंबर 2024 से सितंबर 2026 के दो सालों में मार्केट लगभग 15% डाउन है। लगभग 3 साल का रिटर्न जीरो है।
5 साल में निफ्टी50 का रिटर्न 4.5% पर आ गया है, FD से भी कम। यह सच है कि मार्केट में साइकिल आते हैं। यह सामान्य बात है। लेकिन यह सामान्य नहीं है कि दुनिया का हर मार्केट चल रहा हो, और आपका नहीं चल रहा हो।
ईरान वॉर शुरू होने के बाद US मार्केट, Japanese मार्केट, कोरियन मार्केट सबने कई ऑल टाइम हाई बनाया है। इवन खुद युद्ध में फंसे इजरायल और हमारे पड़ोसी पाकिस्तान के बाजार ने भी ऑल टाइम हाई बनाए हैं।
हम ऑल टाइम हाई से 15% गिरे हुए हैं। यह 15% बड़े मजे में 30-35% बन जाए, यदि DII और रिटेलर्स के पास ऑप्शन हों। FPI के पास ऑप्शन हैं, वो नहीं आ रहे इंडियन मार्केट में। बेशक से बेशर्म अमृतलाल जीडीपी के फर्जी आंकड़ों से डंका पीट लेता हो।
जिस दिन भाई ने जीडीपी का डंका पीटा, उसके बाद बाजार अपवाद टाइप एकाध दिन चला है। रिटेलर्स और DII कहां लगाएं पैसे? फॉरेन मार्केट रूट सीमित हैं, क्रिप्टो में भी दिक्कत है। गलती से ऑप्शन मिल जाए, फिर आप देखेंगे FPI से ज्यादा तेज DII भागते मिलेंगे।
मार्केट के बारे में सबसे सच बात यह है कि कोई इसके चलने या गिरने का सही-सही समय नहीं बता सकता। No one can time or tame. मोटा-मोटी अंदाजा लगाया जा सकता है सिर्फ। चाहे आप टेक्निकल देख लो, चाहे फंडामेंटल। मैं टेक्निकल से ज्यादा फंडामेंटल देखने वाला व्यक्ति हूँ। फंडामेंटल दिशा का अंदाजा देता है, लेवल्स नहीं बताता। लेवल्स टेक्निकल बताता है। कल सुबह की बात है। हमारे एक टेक्निकल एक्सपर्ट हैं। बड़े नाम हैं। सुबह उन्होंने दावा किया, पूरे जोर से, कि कुछ भी हो जाये, निफ्टी 22,700 से नीचे नहीं गिरेगा। खुलते ही निफ्टी इससे नीचे आया। बाद में कुछ ऊपर क्लोज हुआ। तब हुआ कि क्लोजिंग तो ऊपर निकली न। अब आज क्लोजिंग भी इससे नीचे निकल आयी। लेकिन इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। न उनका ज्ञान गलत है, न उनका गणित। गलत है बस दावा ठोक देना।
कल रात मैंने कुछ फैक्ट्स लिख दिया। कई लोग उससे ट्रिगर हो गये। अमृतलाल ब्रो ने देश पर सबसे गहरा असर यही डाला है कि लोग किसी भी बात पर ट्रिगर हो जाते हैं। कुछ तो मार्केट पर लिखने की मेरी ऑथोरिटी पर ही क्वेश्चन मार्क लगा दे रहे थे। अब कौन बताने जाये कि भैया जब आपको सेंसेक्स में सिर्फ सेक्स समझ आता था, तब भी रोज मार्केट एनालाइज करता था मैं!
पर यह मुद्दा नहीं है। मुद्दे की बात यह है कि मार्केट लॉन्ग रन में चलेगा, इसका दावा ठोका जा सकता है। लॉन्ग रन में यह बाकी सब एसेट क्लास को बीट करेगा, इसका दावा ठोका जा सकता है। लेकिन यह नहीं बताया जा सकता कि कबसे ऊपर की दिशा निकलने वाली है। शॉर्ट रन में अच्छी चीजें कम दिख रही हैं, बुरी चीजें ज्यादा। बाजार के लिए अच्छी चीजें जो अगले कुछ महीने में हो सकती हैं, वो हैं महंगाई, US ट्रेड डील, AI बबल और यूपी चुनाव। महंगाई बढ़ेगी, यह तय है। कंपनियों की कमाई उससे कितना बढ़ेगी, यह देखने वाली बात होगी। AI या तो बबल सिद्ध हो और फूटे या सेचुरेट हो, हमारे बाजार के लिए अच्छा होगा। US के साथ डील देश के लिए बुरा होगा, लेकिन विदेशी निवेशकों को पसंद आयेगी, तो बाजार के लिए अच्छा होगा। और यूपी चुनाव में यदि बीजेपी हारती है, बाजार बहुत खुश होगा। इनके अलावा मार्केट के लिए कोई पॉजिटिव ट्रिगर नहीं है हाल फिलहाल में। सरकार कुछ हस्तक्षेप करे, उससे भी बात बन सकती है, लेकिन गुंजाइश कम है। फकीरा झोला उठा ले, उससे भी बात बन सकती है।
बाकी तो यही कि लॉन्ग रन के लिए बाजार में हैं, निश्चिंत रहिये। SIP बंद करने की कोई जरूरत नहीं है। बस स्कीम का रिव्यू करिये। यहाँ लोग गलती करते हैं कि कई बार ओवर डायवर्सिफिकेशन कर डालते हैं, जिससे ओवरलैपिंग पोर्टफोलियो बन जाता है। यह नहीं होना चाहिए। डायरेक्ट स्टॉक में एक्सपोजर रखिये, पर लिमिटेड। सोशल मीडिया पोस्ट या रील देखकर कोई डायरेक्ट स्टॉक मत खरीदिए। खुद पढ़िए, खोजिए और कनविक्शन आये, तभी पैसे डालिये। लेकिन पोर्टफोलियो की नींव म्यूचुअल फंड्स से बनाइए।
आम लोगों के लिए वेल्थ क्रिएशन का सबसे बड़ा औजार है मार्केट। वैसे तो सबसे उत्तम औजार है खुद का बिजनेस। लेकिन हर कोई अपना बिजनेस नहीं कर सकता। जो नहीं कर सकता, उनके लिए मार्केट है। लेकिन सिर्फ मार्केट के भरोसे नहीं बैठना है। इसमें गाइड करने के लिए दुनिया भर के एडवाइजर बैठे हैं। उन्हें पकड़िये। निर्णय खुद के रिसर्च से हो या एडवाइजर की सलाह से हो। बाकी सारे विकल्प तकलीफ देंगे।
(मैं इन्वेस्टमेंट एडवाइजर नहीं हूँ, तो मुझसे नहीं पूछना है कुछ भी। मैं बताऊंगा भी नहीं।)

