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गोदी मीडिया देखकर भ्रम होता है कि यह ख़बरों का चैनल है या अस्पताल का!

रवीश कुमार-

गोदी मीडिया ने अपनी बिखरी हुई विश्वसनीयता बटोरने के लिए स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों का एक सेग्मेंट पकड़ लिया है। उसकी ख़बरों के लिए न देखें तो कम से कम ह्रदय, यकृत, मधुमेह, कैंसर से सुरक्षित रहने के उपायों के नाम पर देख लें।

इनकी कोई भी ढंग की ख़बर शेयर नहीं हो रही होती लेकिन दिन भर चोटी के डॉक्टरों की तरह-तरह की चेतावनी और सावधानी के क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। यह इतना बढ़ गया है कि आप भ्रमित हो जाते हैं कि यह ख़बरों का चैनल है या अस्पताल का।

SIR और उससे पहले के चुनावों में मतदान के आँकड़ों को जारी करने में जो देरी की गई उन सबके बारे में बारीकी से नहीं बताया जाता है। लोकतंत्र का हेल्थ सड़ा दिया गया, उसके लिए चुनाव आयोग के तीनों डॉक्टरों का इंटरव्यू होता और उसमें सारे सवाल पूछे जाते तो वोटर को पता चलता कि डेमोक्रेसी का हेल्थ ठीक करने के लिए नित्य कौन-कौन से उपाय करने चाहिए।

चुनाव चोरी से जीते जाएंगे तो उसमें आपकी ‘ज़ीरो कार्ब हाई प्रोटीन’ (पिचका पेट) बॉडी किसी काम की नहीं रह जाएगी।

इसलिए देश के चार-पाँच अस्पतालों के तीन-चार डॉक्टरों से मेरी अपील है कि गोदी मीडिया के झाँसे में न फँसें। गोदी चैनल ख़ुद थर्ड क्लास काम करते हैं, अपनी साख गँवा चुके हैं और अब आपके जीवन भर की मेहनत और साख का दोहन कर रहे हैं।

गोदी चैनल इस देश के अर्जित लोकतंत्र की हत्या के अपराधी हैं और आप अपराधियों के स्टुडियो में बैठ कर दीर्घायु जीवन की पुड़िया बाँट रहे हैं। प्लीज़ ऐसा मत कीजिए। गोदी चैनल SIR और चुनाव आयोग के फ़्रॉड को लेकर गोदी चैनल जागरूकता नहीं फैला रहे, हार्ट अटैक और किडनी फ़ेस से बचाने का नाटक कर रहे हैं।

आप बड़े डॉक्टर हैं, अपना वीडियो बना कर पर्सनल और अस्पताल के सोशल मीडिया पेज से डाल दीजिए, ऐसे ही वायरल हो जाएगा।

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