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18 साल बाद बिजनेस अखबारों की नई एंट्री, प्रिंट संकट के बीच दक्षिण भारत से तीन नए बिजनेस डेली की दस्तक

कोच्चि से Express Publications का राष्ट्रीय बिजनेस डेली, चेन्नई से Kumudam का तमिल-अंग्रेजी अखबार; Dinamalar भी मैदान में

भारत के प्रिंट मीडिया बाजार में एक दिलचस्प विरोधाभास सामने आ रहा है। एक तरफ अखबारों के विज्ञापन राजस्व पर दबाव है, न्यूजप्रिंट की लागत और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चुनौती बढ़ रही है तथा न्यूजरूम में नौकरियां घट रही हैं। दूसरी तरफ करीब 18 साल के अंतराल के बाद बिजनेस अखबारों के क्षेत्र में नई एंट्री की तैयारी है।

दक्षिण भारत से कम से कम तीन नए बिजनेस डेली आने की खबर है। Express Publications (Madurai), जो The New Indian Express समूह का संचालन करता है, कोच्चि से एक राष्ट्रीय वित्तीय अखबार लॉन्च करने की तैयारी में है। Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी लॉन्चिंग पहले अक्टूबर के अंत तक प्रस्तावित थी, जबकि बाद की रिपोर्ट में नवंबर में लॉन्च की संभावना बताई गई है। अखबार के लिए “Financial Standard” नाम सामने आया है, हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में समूह की ओर से नाम की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई थी।

इस नए अखबार की कमान Anto T Joseph को दी गई है। वह इससे पहले The New Indian Express में तमिलनाडु के Resident Editor थे। उन्होंने उस पद से हटकर आगामी बिजनेस डेली के संपादक की जिम्मेदारी संभाल ली है। Joseph इससे पहले Economic Times और DNA के बिजनेस न्यूज़रूम में भी काम कर चुके हैं।

Express Publications की रणनीति भी पारंपरिक मुंबई-दिल्ली केंद्रित बिजनेस पत्रकारिता से आगे जाने की बताई गई है। समूह की योजना मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, इनोवेशन, फैमिली बिजनेस और उभरते क्षेत्रीय कारोबारी केंद्रों पर ज्यादा ध्यान देने की है। यानी देश की आर्थिक कहानी को केवल शेयर बाजार और कॉरपोरेट बोर्डरूम तक सीमित न रखने का दावा किया जा रहा है।

चेन्नई से Kumudam का बिजनेस डेली भी मैदान में उतर रहा है। शुरुआती रिपोर्टों में इसका संभावित नाम “Kumudam Business and News” बताया गया था और संपादक के तौर पर L Ranganathan का नाम सामने आया था। अब प्रेस रजिस्ट्रार जनरल के आधिकारिक रिकॉर्ड में “KUMUDAM BIZ NEWS DAILY” शीर्षक दर्ज है। रिकॉर्ड के अनुसार यह तमिल और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दैनिक प्रकाशन होगा और इसके संपादक L RENGANATHAN हैं। इसकी registration date 30 जुलाई 2026 दर्ज है।

यानी Kumudam के मामले में अब यह केवल बाजार में चल रही चर्चा नहीं रह गई है। अखबार का शीर्षक सरकारी पंजीकरण रिकॉर्ड में आ चुका है।

इसी बीच तमिलनाडु का एक और बड़ा अखबार समूह Dinamalar भी बिजनेस न्यूज के बाजार में उतरने की तैयारी कर रहा है। Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक Dinamalar तमिल भाषा में बिजनेस डेली लॉन्च करने की योजना पर काम कर रहा है और साल के अंत तक इसकी शुरुआत का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार अखबार के dummy pages तैयार किए जा रहे थे।

करीब 18 साल का अंतराल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में आखिरी प्रमुख नए बिजनेस डेली की एंट्री Financial Chronicle के रूप में अप्रैल 2008 में हुई थी। उससे पहले 1 फरवरी 2007 को Mint बाजार में आया था। Financial Chronicle फरवरी 2019 में बंद हो गया। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर Economic Times, Business Standard, Mint, Financial Express और BusinessLine जैसे प्रमुख बिजनेस अखबार ही बचे।

अब सवाल यह है कि जब सामान्य प्रिंट मीडिया लगातार आर्थिक दबाव की बात कर रहा है, तब बिजनेस अखबारों के लिए अचानक नई जमीन क्यों तैयार हो रही है?

इस सवाल का जवाब बाजार के बदलते भूगोल में तलाशा जा सकता है। भारत की आर्थिक गतिविधियां केवल मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु तक सीमित नहीं हैं। दक्षिण भारत में मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, निर्यात, स्टार्टअप और पारिवारिक कारोबार के नए केंद्र विकसित हुए हैं। नए अखबार इसी बदलती आर्थिक भौगोलिकता को अपना संभावित पाठक आधार मान रहे हैं। Express Publications ने भी अपने प्रस्तावित अखबार के लिए emerging regional markets और growth corridors पर जोर दिया है।

लेकिन इस कहानी का दूसरा पहलू भी कम महत्वपूर्ण नहीं है।

Indian Newspaper Society की 87वीं वार्षिक रिपोर्ट में प्रिंट मीडिया के सामने विज्ञापन राजस्व में गिरावट, आयातित न्यूजप्रिंट पर 5 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी और डिजिटल विज्ञापन राजस्व में Google तथा Meta जैसे Big Tech प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभुत्व को प्रमुख चिंता के रूप में रेखांकित किया गया है। यानी अखबारों के सामने पाठक जुटाने के साथ-साथ उस पाठक को आर्थिक रूप से monetize करने की चुनौती भी बनी हुई है।

इसी दौर में न्यूज़रूम में नौकरियों की तस्वीर भी उत्साहजनक नहीं है। अगस्त 2026 के आकलन के मुताबिक भारत में 2026 के दौरान अब तक 1,000 से ज्यादा मीडिया नौकरियां जाने का अनुमान है। कटौती का असर टीवी, प्रिंट, डिजिटल और बिजनेस न्यूज़रूम सहित मीडिया के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ा है। रिपोर्ट में कमजोर अर्थशास्त्र, AI और restructuring को इस बदलाव के प्रमुख कारकों में गिना गया है।

मीडिया कारोबार की उलझन को Network18 के हालिया आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का consolidated operating revenue 10.3 प्रतिशत बढ़कर करीब 516 करोड़ रुपये हुआ, लेकिन कंपनी को 38.7 करोड़ रुपये का consolidated net loss हुआ। यानी राजस्व बढ़ने के बावजूद मुनाफे की तस्वीर अलग रही।

इसीलिए नए बिजनेस अखबारों की दस्तक को केवल “प्रिंट की वापसी” कह देना जल्दबाजी होगी। यह संभवतः उस बदलते मीडिया बाजार का संकेत है जिसमें एक ओर पारंपरिक अखबार आर्थिक दबाव में हैं और दूसरी ओर कुछ मीडिया समूह मान रहे हैं कि विशेषज्ञतापूर्ण बिजनेस कंटेंट के लिए अभी भी नया पाठक और नया विज्ञापन बाजार बनाया जा सकता है।

मगर असली परीक्षा लॉन्च के बाद होगी—कितने पाठक मिलते हैं, कितने विज्ञापन आते हैं, डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ कारोबार का मॉडल कैसे बनाया जाता है और सबसे महत्वपूर्ण, क्या बिजनेस पत्रकारिता के लिए नए संस्थान लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ मॉडल खड़ा कर पाते हैं।

एक तरफ पुराने अखबारों का कारोबारी मॉडल दबाव में है, दूसरी तरफ नए बिजनेस अखबारों के लिए निवेश और विस्तार की तैयारी हो रही है। भारतीय प्रिंट मीडिया की अगली कहानी शायद इसी विरोधाभास से लिखी जाएगी।

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