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उत्तर प्रदेश

आगरा के पत्रकार पीयूष शर्मा पर फिर दर्ज हुआ एक मुकदमा, अबकी ब्लैकमेल कर पाँच लाख मांगने का आरोप!

Man with short dark hair and beard wearing a red shirt sits on a couch indoors, looking at the camera.

आगरा। नगर पुलिस आयुक्तालय के थाना जगदीशपुरा में 29 सितंबर 2026 को शाम 8:41 बजे अपराध संख्या 0645/2026 दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता राजेश पाराशर (पुत्र स्वर्गीय सत्यप्रकाश पाराशर, जन्म 1986, निवासी 19-20 श्यामजीपुरम, बोटला, आगरा) ने पीयूष शर्मा और दीपक बाबू के खिलाफ लिखित तहरीर दी है।

एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 352 (शांति भंग के इरादे से जानबूझकर अपमान), 351(3) और 351(4) (आपराधिक धमकी), 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) तथा 356(2) और 356(3) (मानहानि) में दर्ज है। सूचना लिखित रूप में मिली। जनरल डायरी प्रविष्टि संख्या 074 है। घटनास्थल अदम तहरीर बताया गया है, थाने से उत्तर-पश्चिम दिशा में करीब तीन किलोमीटर। जांच उपनिरीक्षक योगेश पोशवाल को सौंपी गई है।

शिकायत में क्या कहा गया

राजेश पाराशर का आरोप है कि मई-जून 2026 से पीयूष शर्मा फोटो दिखाकर और फोन पर धमकी देकर उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं तथा चार-पाँच लाख रुपये की माँग कर रहे हैं। तहरीर के मुताबिक आरोपी दफ्तर भी आए, एक फोटो दिखाकर बदनाम करने की धमकी दी और कहा कि फोटो में बैठे व्यक्ति की सजा हो चुकी है, उन्हें उसी के साथ अपराधी वाली छवि में जोड़ा जाएगा।

शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि पीयूष शर्मा का लंबा आपराधिक इतिहास है, वे कई बार जेल जा चुके हैं और शहर में आधा दर्जन लोगों का गिरोह चलाते हैं, जो निर्दोष लोगों को फँसाता है। एडवोकेट दीपक बाबू पर आरोप है कि वे अपने ट्विटर अकाउंट से शिकायतकर्ता की छवि और साख खराब करते हैं। दोनों के मिलकर साजिश रचने और उन पर गलत आरोप लगाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया।

एफआईआर में दोनों आरोपियों का पता अज्ञात, नगर (कमिश्नरेट आगरा), उत्तर प्रदेश दर्ज है।

भड़ास4मीडिया से बातचीत में पत्रकार पीयूष शर्मा ने इस एफआईआर को पूरी तरह फर्जी और निराधार बताया है। उनका कहना है कि जिन पत्रकारों और लोगों के खिलाफ उन्होंने खबरें कीं, वही उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पुरानी रंजिश के चलते उन्हें सटोरिया तक घोषित किया गया, गलत तरीके से तीन दिन जेल में रखा गया। शिकायतकर्ता पहले भी उनके खिलाफ साजिशों में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि वे अदालत गए हैं और इस मामले से भी निपटेंगे।

देखें एफआईआर की कॉपी…

First Information Report (FIR) form with district details, year 2026, FIR number, date and a two-column table listing acts/sections; contains Hindi and English headings.
Form page (Page 3) titled Complainant/Informant section in bilingual Hindi/English, requesting personal details: name, father's name, DOB 1986, nationality India, UID, passport, ID details, two address entries, occupation, phone/mobile, and details of known/unknown accused.
N.C.R.B. form page with bilingual table fields for S.No, Name, Alias, Relative's Name, Present Address, plus sections on delay reasons, properties of interest, total value, and First Information contents.
Page 5 of a formal inquiry form in Hindi/English detailing action taken, investigation status, and FIR-related notes like registered case and IO details.

ज्ञात हो आगरा ताज प्रेस क्लब के सचिव पीयूष शर्मा कुछ समय पूर्व जुए सट्टे के मामले में जेल गए थे। जेल से छूटने के बाद से वो अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। पीयूष ने एक वीडियो जारी कर अधिकारियों पर तो आरोप लगाए ही, साथ ही एक कारोबारी राजेश पाराशर को भी घेरे में ले लिया। पीयूष शर्मा ने जिस एसीपी मयंक तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए उनके साथ कई फोटो राजेश पाराशर के भी हैं जिसको लेकर उसने राजेश को भी घेर लिया। बस फिर क्या था। सट्टे के मामले में जेल गये पीयूष शर्मा को यही भारी पड़ गया। कारोबारी ने पीयूष शर्मा के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करवा दिया है।

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