इंटरनेट गया तो टीवी भी बंद? अब ऐसा जरूरी नहीं! भारत में Direct-to-Mobile यानी D2M तकनीक को व्यावसायिक रूप से लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। इसके जरिए ऐसे मोबाइल फोन पर लाइव टीवी, न्यूज, खेल और दूसरे वीडियो कंटेंट देखे जा सकेंगे, जिन्हें D2M रिसीव करने के लिए जरूरी हार्डवेयर से लैस किया गया हो। इसके लिए मोबाइल डेटा, Wi-Fi या पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं होगी।
प्रसार भारती D2M के व्यावसायिक रोलआउट के लिए Request for Proposal यानी RFP जारी करने की तैयारी में है। सितंबर 2026 के अंत में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, यह कदम D2M को वर्षों के परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन से निकालकर बड़े पैमाने पर तैनाती की दिशा में ले जा सकता है। इससे पहले जून 2026 में भी रिपोर्ट सामने आई थी कि प्रसार भारती ने तकनीकी वैलिडेशन पूरा कर लिया है और व्यावसायिक तैनाती के लिए RFP की तैयारी चल रही है।
D2M आखिर है क्या?
Direct-to-Mobile यानी D2M मूल रूप से टीवी प्रसारण की तकनीक को मोबाइल फोन तक पहुंचाने का तरीका है। सामान्य मोबाइल स्ट्रीमिंग में वीडियो इंटरनेट या मोबाइल डेटा नेटवर्क से फोन तक पहुंचता है। D2M में प्रसारण सिग्नल का इस्तेमाल करके वीडियो, ऑडियो और डेटा सीधे ऐसे मोबाइल डिवाइस तक भेजा जा सकता है, जिनमें D2M रिसीव करने की क्षमता मौजूद हो।
यानी इसकी कार्यप्रणाली कुछ हद तक FM रेडियो जैसी है—रेडियो स्टेशन से सिग्नल प्रसारित होता है और उपयुक्त रिसीवर उसे सीधे पकड़ लेता है। फर्क यह है कि D2M में केवल ऑडियो नहीं, बल्कि वीडियो, न्यूज, शैक्षणिक सामग्री और आपातकालीन संदेश भी भेजे जा सकते हैं। भारत सरकार ने भी D2M को SIM या मोबाइल डेटा पर निर्भर हुए बिना वीडियो, ऑडियो और डेटा प्रसारित करने वाली तकनीक के रूप में रेखांकित किया है।
फोन में इंटरनेट बंद हो तो भी TV?
सैद्धांतिक रूप से हां—लेकिन एक महत्वपूर्ण शर्त के साथ। हर मौजूदा स्मार्टफोन अपने-आप D2M फोन नहीं बन जाएगा। डिवाइस में D2M सिग्नल रिसीव करने के लिए आवश्यक हार्डवेयर/चिप और संबंधित सपोर्ट होना जरूरी है। 2025 में HMD और Lava जैसे मोबाइल निर्माताओं की ओर से D2M-सक्षम डिवाइसों की दिशा में काम की जानकारी भी सामने आई थी।
भारत में D2M के परीक्षण दिल्ली और बेंगलुरु सहित 19 से अधिक शहरों में किए गए हैं। प्रसार भारती, IIT कानपुर और टेक्नोलॉजी पार्टनर्स इस तकनीक के विकास और परीक्षण में शामिल रहे हैं। जून 2026 में IIT कानपुर और BSNL के बीच हुए समझौते में भी D2M को सहयोग के प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में शामिल किया गया।
मोबाइल नेटवर्क पर घट सकता है दबाव
D2M का एक बड़ा संभावित फायदा यह है कि करोड़ों लोग एक ही समय में कोई लाइव कार्यक्रम, समाचार या बड़ा खेल मुकाबला देख रहे हों तो हर मोबाइल को अलग-अलग इंटरनेट डेटा स्ट्रीम भेजने की जरूरत कम हो सकती है।
इसी वजह से D2M को मोबाइल नेटवर्क पर डेटा ट्रैफिक का दबाव घटाने वाली तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। बड़े खेल आयोजनों, आपदा या आपातकालीन स्थितियों में इसका इस्तेमाल विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।
सिर्फ TV नहीं, Emergency Alert भी
D2M को केवल मनोरंजन की तकनीक मानना अधूरा होगा। इसके जरिए आपदा प्रबंधन से जुड़े संदेश, सार्वजनिक सूचना, शैक्षणिक सामग्री, ऑडियो और आपातकालीन अलर्ट भी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाए जा सकते हैं।
प्रसार भारती द्वारा प्रकाशित तकनीकी परीक्षण दस्तावेजों के मुताबिक, 470–582 MHz बैंड में उपलब्ध D2M तकनीकों के इंटरफेरेंस और मोबाइल डिवाइस के तापमान पर परीक्षण किए गए हैं।
लेकिन अभी एक पेंच बाकी है
D2M की व्यावसायिक शुरुआत की तैयारी हो रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अक्टूबर 2026 से भारत के हर मोबाइल फोन पर मुफ्त TV चलने लगेगा।
सबसे बड़ी शर्त है—D2M-compatible डिवाइसों का व्यापक प्रसार। इसके अलावा प्रसारण नेटवर्क, कंटेंट और व्यावसायिक मॉडल तथा मोबाइल निर्माताओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी। 2026 की रिपोर्टों में RFP और commercial rollout की दिशा में प्रगति की बात कही गई है, लेकिन देशव्यापी उपभोक्ता सेवा की निश्चित तारीख अभी स्पष्ट नहीं है।
अगर यह व्यवस्था बड़े पैमाने पर लागू होती है तो भारत में मोबाइल पर TV देखने का तरीका बदल सकता है। अभी जहां Live TV देखने के लिए इंटरनेट डेटा सबसे सामान्य रास्ता है, वहीं D2M मॉडल में प्रसारण सिग्नल सीधे मोबाइल तक पहुंच सकता है—बिना Wi-Fi और बिना मोबाइल डेटा के।
यानी भविष्य का मोबाइल सिर्फ फोन और इंटरनेट की मशीन नहीं होगा; वह एक छोटा ब्रॉडकास्ट रिसीवर भी हो सकता है।


