कानपुर। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर की पत्रकारिता ने देश में राष्ट्रीय चेतना जगाने और जनमत तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे पत्रकारों ने अपनी कलम को जनसंघर्षों की आवाज बनाया। आज की पत्रकारिता के सामने भी लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की बड़ी जिम्मेदारी है। यह बात वरिष्ठ पत्रकार एवं सांसद राजीव शुक्ल ने बुधवार को शास्त्री भवन, लोक सेवक मंडल, खलासी लाइन में आयोजित कार्यक्रम में कही।
कानपुर जर्नलिस्ट एंड एक्टिविस्ट फोरम एवं तिलक फाउंडेशन की ओर से आयोजित श्री तिलक मेमोरियल व्याख्यान, पुस्तक विमोचन एवं उत्कृष्ट पत्रकारिता सम्मान समारोह में राजीव शुक्ल मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रमेश चिंतक ने की, जबकि प्रोफेसर आनंद शुक्ला ने ‘आजादी और उसकी सरहद’ विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। विषय प्रवर्तन तिलक फाउंडेशन के संयोजक डॉ राज तिलक ने किया।
राजीव शुक्ल ने कहा कि आजादी केवल सत्ता परिवर्तन का नाम नहीं है। स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब नागरिकों को अपने विचार व्यक्त करने, सवाल पूछने और असहमति रखने का अधिकार सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और पत्रकारों की जिम्मेदारी है कि वे तथ्यों के साथ समाज के सवालों को सामने रखें।
मुख्य वक्ता प्रो. आनंद शुक्ला ने कहा कि आजादी की लड़ाई का इतिहास केवल राजनीतिक संघर्ष का इतिहास नहीं है, बल्कि यह विचारों, अभिव्यक्ति और सामाजिक चेतना के संघर्ष का भी इतिहास है। उन्होंने ‘आजादी और उसकी सरहद’ के संदर्भ में कहा कि स्वतंत्रता की सीमाओं पर बहस लोकतंत्र को कमजोर नहीं करती, बल्कि उसे अधिक परिपक्व बनाती है। स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्य भी जुड़े हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक महेश शर्मा द्वारा संपादित पुस्तक ‘स्याही से शहादत तक’ का विमोचन किया गया। पुस्तक हिंदी पत्रकारिता के उस स्वर्णिम दौर की पड़ताल करती है, जिसमें गणेश शंकर विद्यार्थी, ‘प्रताप’ और पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना के निर्माण को विशेष स्थान मिला। पुस्तक पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि जनसरोकार और सामाजिक परिवर्तन के माध्यम के रूप में देखने वाली परंपरा को सामने लाती है।

डॉ. रमेश चिंतक ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी की पत्रकारिता आज भी इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि उसमें निर्भीकता के साथ मानवीय संवेदना और जनपक्षधरता थी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता तभी कायम रह सकती है, जब वह समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज को भी समान गंभीरता से स्थान दे।
समारोह में नवभारत टाइम्स के संवाददाता प्रवीण मोहता को ‘श्री तिलक मेमोरियल उत्कृष्ट पत्रकारिता सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान निर्भीक, निष्पक्ष एवं जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रदान किया गया। अतिथि विधायक सुरेंद्र मैथानी ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन वरिष्ठ पत्रकार मौली सेठ ने किया।
कार्यक्रम संयोजक रोहित अवस्थी एडवोकेट ने धन्यवाद देते हुए कहा कि कार्यक्रम में पत्रकारिता और साहित्य जगत से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। आयोजन के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन की पत्रकारिता की विरासत को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने तथा आज की पत्रकारिता की चुनौतियों पर संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार सत्यप्रकाश त्रिपाठी, लोक सेवक मंडल अध्यक्ष दीपक मालवीय, इतिहासविद रामकिशोर वाजपेई, प्रो खान फारूक, प्रो शिवकुमार दीक्षित आदि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।


