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सुख-दुख

कैंसर से लड़ रहे संवेदनशील पत्रकार प्रकाश कुमार को मदद की जरूरत!

अमीश राय-

मेरा जिगरी यार, IIMC का स्कॉलर, एक संवेदनशील पत्रकार प्रकाश Prakash Kumar Badal कैंसर से जूझ रहा है. मेरी दोस्त और उसकी पत्नी रश्मि ने अबतक इस लड़ाई को उसके संग अकेले लड़ा है पर अब दोस्तों और समाज की सामूहिक ताकत की जरूरत है. क्योंकि 2025 में प्रकाश को जो रेयर कैंसर का पता चला वो अब उसके लिवर तक फैल चुका है. कीमोथेरेपी और रेडिएशन के बावजूद कैंसर तेजी से बढ़ रहा है.

Smiling man in an orange shirt adjusts a headband while carrying a woven basket of branches along a stone wall.

डॉक्टरों का कहना है कि प्रकाश के कैंसर में एक ऐसा रेयर जीन म्यूटेशन है जिसे अब तक लाइलाज माना जाता था. पर उम्मीद की किरण ये आई है कि अमेरिका में इसे टारगेट करने वाली दुनिया की पहली जीवनरक्षक दवा को हाल में ही मंजूरी मिल गई है.

डॉक्टरों का कहना है कि प्रकाश को बचाने के लिए अब यही एकमात्र रास्ता बचा है. इस दवा को अमेरिका से मंगाना होगा इसलिए इसके पूरे इलाज का खर्च करीब 3 करोड़ रुपये आ रहा है. प्रकाश और रश्मि पिछले एक साल में अपनी सारी जमा-पूंजी लगा चुके हैं. इतनी बड़ी रकम अकेले जुटाना उनके लिए नामुमकिन है. प्रकाश हमेशा मुश्किल से मुश्किल चढ़ाई पार करने का हौसला रखता है. आज उसे हमारे साथ की जरूरत है. आप सभी से हाथ जोड़कर अपील है कि इस इलाज के लिए जितनी संभव हो उतनी आर्थिक मदद करें.

नीचे लिंक पर जाकर प्रकाश को बचाने की इस मुहिम में अपना यथासंभव योगदान करें. इस पोस्ट को आगे शेयर करके प्रकाश को एक नया जीवन देने में हमारा साथ दें. समय बहुत कम है और आपका हर एक प्रयास प्रकाश की जिंदगी को बढ़ाने वाला साबित होगा.

फंड रेजिंग का लिंक, इसमें सारी जानकारी मौजूद है- प्रकाश बादल


निखिल श्रीवास्तव-

एक जिंदगी के लिए, एक अपील

नवभारत टाइम्स में हम साथ काम करते थे। तब से जानता हूं उसे, एक बेहद ज़हीन दिल, एक बेदाग़ ईमानदारी, और एक ऐसी आत्मा जो शायद सदियों में एक बार मिलती है।

प्रकाश था तो पेशे से पत्रकार लेकिन उसकी पहचान थी उसकी समसारा, उसकी बाइक। उस बाइक पर उसने पूरा हिंदुस्तान नापा। नागालैंड की पहाड़ियों से लेकर झारखंड के जंगल, बिहार की मिट्टी से लेकर जम्मू-कश्मीर की वादियां, और वहां से साउथ इंडिया तक, हर कोना, हर सड़क, हर अनजान चेहरा उसका अपना बन जाता था। लोगों के घरों में रुकना, उनके साथ खाना, उनकी कहानियां सुनना, यही उसकी असली दौलत थी। एक यायावर, जिसने हिम्मत को अपना साथी बना लिया था। मुझे भी उसके साथ जाना था लंबी सुखद यात्राओं पर! जाना है!

Smiling man in a maroon jacket with a beige woven cone hat, standing in a room with wicker baskets in the background.

आज वही हिम्मत, उसकी सबसे बड़ी परीक्षा में है।

लंबे वक्त से प्रकाश एक बेहद दुर्लभ कैंसर से लड़ रहा है। टाटा मेमोरियल, मुंबई में इलाज चल रहा है, पूरी शिद्दत से, पूरे विश्वास के साथ। लेकिन बीमारी ने वो रास्ता नहीं दिया जिसकी हम सब दुआ कर रहे थे।

और इस पूरी लड़ाई में, एक शख्स कभी नहीं डगमगाई, उसकी पत्नी रश्मि। शादी को अभी साल भर हुआ है, और इस एक साल में उसने वो निभाया है जो शायद उम्र भर के साथ में भी मुश्किल से निभता है। हर दिन, हर रात, हर मुश्किल फैसले में वो प्रकाश के साथ चट्टान की तरह खड़ी रही है।

अब एक उम्मीद है।

पिछले महीने अमेरिका में एक नई दवा को मंज़ूरी मिली है, इस दुर्लभ कैंसर के लिए, जिसे कई लोग “मैजिक ड्रग” कह रहे हैं। छह से आठ महीने का यह इलाज असल में एक नई जिंदगी का रास्ता खोल सकता है।

लेकिन इस रास्ते की कीमत है, करीब तीन करोड़ रुपये।

हम सब जानते हैं कैंसर की लड़ाई क्या मांगती है। यह सिर्फ पैसा नहीं मांगती, यह हमारा हर रिश्ता, हर जमा-पूंजी, हमारी पूरी हिम्मत मांग लेती है। हेल्थ इंश्योरेंस एक हद तक साथ देता है, उसके बाद बचते हैं सिर्फ हम, दोस्त, परिवार, और वो अनजान लोग जिनका दिल इंसानियत के लिए धड़कता है।

रश्मि ने ketto प्लेटफॉर्म पर यह मुहिम शुरू की है। कुछ ही घंटों में दुनिया भर से लोगों ने मिलकर कुछ लाख रुपये जुटा भी दिए हैं, यह दिखाता है कि इंसानियत अभी ज़िंदा है।

पर मंज़िल अभी बहुत दूर है। तीन करोड़ की यह रकम अकेले जुटाना नामुमकिन है, पर मिलकर, यह असंभव नहीं है।

मेरी अपील है प्रधानमंत्री आदरणीय narendra modi जी से, केंद्र सरकार से, झारखंड-बिहार-हरियाणा और दिल्ली सरकार से! और देश-दुनिया के तमाम मददगार लोगों से…सपोर्ट कीजिए इस मुहिम को और कामयाब बनाइए हमारी कोशिश को!

मैं यह अपील सिर्फ इसलिए नहीं कर रहा कि प्रकाश मेरा दोस्त है। मैं यह इसलिए कर रहा हूं क्योंकि दुनिया में ऐसी शुद्ध आत्माएं कम बचती हैं, जो बिना शर्त प्रेम करना जानती हैं, जो हर सफर में एक नया रिश्ता बना लेती हैं, जो ज़िंदगी को असल मायनों में जीती हैं।

ऐसी रूह का इस दुनिया में रहना, हम सबके लिए ज़रूरी है।

अगर आप कर सकें, तो थोड़ा योगदान दीजिए। अगर पैसा न भी बन पाए, तो इसे शेयर कीजिए, शायद किसी और तक पहुंच जाए जो मदद कर सके।

एक पत्नी की हिम्मत, एक दोस्त की दुआ, और एक इंसान की जिंदगी, इन तीनों को मिलकर हम एक नया मौका दे सकते हैं।

प्रकाश के लिए। रश्मि के लिए। इंसानियत के लिए।

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