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उत्तर प्रदेश

बरेली मेयर के रक्षाबंधन कार्यक्रम में महिला की मौत, विज्ञापन तले दबे पत्रकारों का खेल पढ़िए!

Hindi news thumbnail: a large crowd at a political event with a man in a suit at the center and bold red banners with Hindi headlines about women and UP mayor.

बरेली। भाजपा के मेयर उमेश गौतम की ओर से बरेली क्लब ग्राउंड में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने के बाद अव्यवस्था के हालात पैदा हो गए। कार्यक्रम में महिलाओं को मेयर को राखी बांधने के बाद उपहार दिए जाने की बात कही गई थी। बताया जा रहा है कि अपेक्षा से कहीं अधिक संख्या में महिलाएं कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गईं। इसी दौरान भीड़ में धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसे हालात बनने की सूचना है। घटना में एक महिला की मौत हो गई।

घटना के बाद बरेली की स्थानीय मीडिया कवरेज को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कार्यक्रम के प्रचार के लिए स्थानीय अखबारों में मेयर की ओर से बड़े पैमाने पर विज्ञापन प्रकाशित किए गए, लेकिन उसी आयोजन में हुई महिला की मौत की खबर को प्रमुखता नहीं दी गई। सवाल यह है कि क्या राजनीतिक विज्ञापन और मीडिया संस्थानों के व्यावसायिक हितों ने एक गंभीर घटना की खबर को प्रभावित किया?

Rakshabandhan poster with a large crowd and two men waving; promotes Dr. Umesh Gautam for mayor of Bareilly in Hindi.
Political campaign poster in orange with a row of politicians at the top, a large bold Hindi slogan and decorative imagery, a crowd waving in the foreground, and names/venue text at the bottom.

बताया जा रहा है कि कई स्थानीय अखबारों के पहले पन्ने पर मेयर के रक्षाबंधन कार्यक्रम के विज्ञापन दिखाई दिए, जबकि कार्यक्रम में हुई मौत की खबर प्रमुखता से नजर नहीं आई। डिजिटल मीडिया में भी खबर के प्रकाशन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि एक प्रमुख हिंदी समाचार पोर्टल के स्थानीय रिपोर्टर के स्तर पर भी घटना की खबर तत्काल सामने नहीं आई और करीब 24 घंटे बाद इसे प्रकाशित किया गया।

वहीं, कुछ न्यूज चैनलों ने घटना को प्रसारित किया। इसके बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर इतनी गंभीर घटना की खबर तत्काल व्यापक रूप से क्यों नहीं दिखाई गई।

इस पूरे मामले ने बरेली में राजनीतिक विज्ञापन बनाम पत्रकारिता की स्वतंत्रता को लेकर बहस छेड़ दी है। यदि किसी जनप्रतिनिधि के कार्यक्रम में अव्यवस्था के बीच किसी व्यक्ति की जान जाती है, तो वह सार्वजनिक महत्व की खबर बनती है। ऐसे में विज्ञापनदाता की राजनीतिक हैसियत या विज्ञापन की आर्थिक कीमत क्या खबर के संपादकीय निर्णय को प्रभावित कर सकती है—यह सवाल अब मीडिया संस्थानों के सामने है।

सबसे गंभीर सवाल उन गरीब महिलाओं को लेकर भी है, जो उपहार की उम्मीद में कार्यक्रम में पहुंचीं। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को सम्मान और उपहार देना था, लेकिन एक महिला की जान चली गई। अब इस मौत की जिम्मेदारी, कार्यक्रम में भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की जांच के साथ-साथ घटना की मीडिया कवरेज भी सवालों के घेरे में है।

क्या बरेली में विज्ञापन की चमक के सामने एक महिला की मौत की खबर दब गई? यह सवाल अब सिर्फ एक कार्यक्रम या एक अखबार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय पत्रकारिता की विश्वसनीयता से जुड़ गया है। जनता को यह जानने का अधिकार है कि घटना क्या थी, प्रशासन ने क्या कार्रवाई की और मीडिया ने उसे समय पर क्यों नहीं दिखाया।

News thumbnail: woman lying on a bed in an orange saree; portrait of another woman on the right with Hindi text overlay.
Group of women seated in a crowded room as authorities address them, alongside a Hindi news headline about online rumors being debunked by police (front-page photo).
Hindi news front page about a woman’s death in an honor-killing during a ceremony; the bold headline is in Hindi and three portrait photos appear beneath.
Hindi newspaper front page: large crowd of women seated under a tent, attending a Raksha Bandhan program event marked by a banner headline above.
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