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सियासत

सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन की सफाई लीपापोती ज्यादा लग रही है!

Official statement from Penguin Random House India about Sonia Gandhi's book Belonging, stating they did not publish it.

सुदीप ठाकुर-

इसे धूर्तता कहते हैं। किताब के फैक्ट्स की जितनी जिम्मेदारी प्रकाशक की होती है उससे कहीं ज्यादा लेखक की होती है, यह उसकी साख का सवाल होता है।

प्रकाशक के पास तो फिर भी बच निकलने के रास्ते होते हैं। सोनिया गांधी के memoir: Belonging पर penguin की सफाई लीपापोती ज्यादा लग रही है। उसे पारदर्शिता के साथ सामने आना चाहिए। Indian express की रिपोर्ट में Ritu Sarinने लिखा है कि उसने पेंगुइन से संपर्क किया लेकिन जवाब नहीं मिला।

पेंगुइन को बताना चाहिए कि क्या उसने दबाव में किताब छापने से मना किया?

इस मामले में Indian Express और देश की सम्मानित पत्रकार Ritu Sarin की साख भी दांव पर लगा दी है पेंगुइन ने। क्या जनरल नरवणे और सोनिया गांधी की किताबों के साथ पेंगुइन ने जो किया क्या वह महज इत्तेफाक है, या इसके पीछे कोई खास डिजाइन है।

इस मामले को अभिव्यक्त की आजादी पर मंडराते ने खतरे की तरह क्यों नहीं देखना चाहिए?


  1. अगर Penguin India पब्लिशर नहीं है/था, तो बात लेखक को रिकमेन्डेशन देने या फ़ैक्ट चेक तक कैसे पहुँची?
  2. Knopf Doubleday Publishing Group पेंगविन रेंडम पब्लिशिंग समूह का हिस्सा है, उसने एक लाख कॉपी का पहला प्रिन्ट छापने की घोषणा कैसे की?
  3. पेंगविन के हिन्दी समूह ने गोडसे का भाषण ‘मैंने गांधी वध क्यों किया’ हिन्दी में छापा है, क्या उसके फ़ैक्ट चेक किये गए थे?
    खैर, इतना झूठ बोलने की ज़रूरत कैसे पड़ी?
    -अशोक कुमार पांडेय

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