उत्तर प्रदेश में अरबपतियों की सूची में आगरा के जैन परिवार के नाम भी शामिल हैं। अमर उजाला की प्रकाशित सूची के मुताबिक, जैन परिवार के सदस्यों की संपत्ति करोड़ों रुपये में दर्ज है। इसी परिवार की कंपनी PNC Infratech इन दिनों लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है।
PNC Infratech के प्रमोटर परिवार में प्रदीप कुमार जैन, चक्रेश कुमार जैन, योगेश कुमार जैन और नवीन कुमार जैन शामिल हैं। कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों में प्रदीप कुमार जैन को चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, जबकि चक्रेश और योगेश कुमार जैन को मैनेजिंग डायरेक्टर बताया गया है। नवीन कुमार जैन प्रमोटर हैं।
अमर उजाला की तस्वीर में चक्रेश कुमार जैन, प्रदीप कुमार जैन, नवीन कुमार जैन और योगेश कुमार जैन के नाम जैन परिवार से जुड़े धनाढ्य लोगों के तौर पर दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, तस्वीर में दर्ज व्यक्तिगत संपत्ति के आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है और इन्हें कंपनी की आधिकारिक नेटवर्थ नहीं माना जाना चाहिए।
दिलचस्प सवाल यह है कि एक तरफ PNC Infratech के प्रमोटर परिवार का नाम अमीरों की सूची में है, वहीं दूसरी तरफ कंपनी को हाल के महीनों में अपने बनाए एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर बड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क के कई हिस्सों में धंसने और दूसरी खामियों की शिकायतें सामने आई थीं। अगस्त में NHAI ने कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। बाद में सितंबर में NHAI ने PNC Infratech को अपने प्रोजेक्टों में बोली लगाने से तीन साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया। कार्रवाई एक्सप्रेसवे में सामने आई खामियों और समय से पहले सड़क के खराब होने से जुड़ी थी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा होने के बाद सड़क के कुछ हिस्सों में शुरुआती बारिश के दौरान ही धंसने की खबरें सामने आई थीं। कंपनी ने अपनी ओर से प्रभावित हिस्से को करीब 300 मीटर बताया था और कहा था कि मरम्मत का काम किया जा रहा है।
PNC के बनाए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के आगरा-फिरोजाबाद के 56 किलोमीटर हिस्से को लेकर भी पहले सवाल उठ चुके हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, लोकार्पण के दो साल के भीतर इस हिस्से में कई स्थानों पर सड़क धंसी थी। जांच में जल निकासी और पाइप के आकार सहित निर्माण से जुड़े कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए गए थे।
यानी तस्वीर का एक पहलू जैन परिवार की संपत्ति और कारोबारी सफलता दिखाता है, तो दूसरा पहलू उसी परिवार से जुड़ी कंपनी के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों की गुणवत्ता पर उठे सवालों का है। अमीरों की सूची में नाम और एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर कार्रवाई—दोनों को साथ रखकर देखने पर कहानी का विरोधाभास जरूर सामने आता है।

यह आश्चर्यजनक है कि चक्रेश जैन, प्रदीप जैन एवं नवीन जैन जैसे लोग, जिन्होंने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे एवं बिहार में खराब-घटिया रोड़ बनायी, वे भी शामिल हो गये हैं. मुझे ये जानना है कि इन लोगों को किसने प्रेरणा दिया, हौसला दिया इस तरह से आगे बढ़ने का? इन लोगों को किसका आशीर्वाद एवं शुभकामना मिला है?
-अनिल कुमार, वरिष्ठ पत्रकार




