डॉ प्रकाश हिंदुस्तानी-
हर कोई ख़ूबसूरत दिखाई देने के लिए मरा जा रहा है! हर कोई गोरी/बेदाग़ त्वचा चाहता है। अब कंपनियां अलग तरीके से उत्पाद बेच रही हैं। वे फेयरनेस की जगह ब्राइटनिंग, ग्लोइंग, पिगमेंटेशन कंट्रोल और स्किन टोन इवन जैसे शब्द इस्तेमाल करती हैं। उनका धंधा गोरी त्वचा के बहाने चलता है।
यह धारणा बना दी गई है कि ख़ूबसूरत होने के लिए गोरा होना जरूरी है, गोरा होने के लिए मेकअप जरूरी है और मेकअप के बाद भी चेहरे पर एक भी दाग-धब्बा नहीं होना चाहिए! चेहरे पर मुहांसे हों तो उन्हें छिपाओ, रंग सांवला हो तो उसे गोरा बनाओ, बाल घुंघराले हों तो सीधे करवाओ। इसके लिए हमारा उत्पाद खरीदो और उसे यूज़ करो!
लेकिन इसी फिल्मी दुनिया में एक अभिनेत्री ऐसी भी आई जिसने इस पूरी व्यवस्था को चुनौती दे दी। उसने कहा कि मेरा चेहरा ऐसा ही है, मुझे इसी चेहरे के साथ स्वीकार कीजिए। न उसे गोरा होने की चिंता रही, न मुहांसे छिपाने की बेचैनी और न हर वक्त मेकअप में लिपटे रहने की मजबूरी।
नाम है साई पल्लवी।
लोगों ने उसे ‘पिम्पल गर्ल’ नाम तक दे दिया था। कहीं उसे ‘नो मेकअप गर्ल’ कहा जाता। वह अब नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में सीता के रोल में हैं। उन्होंने सौंदर्य प्रसाधनों के बाजार के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत जुटाई।
एक लड़की आई और मलयालम सिनेमा की दुनिया बदल गई।
2015 में मलयालम फिल्म आई थी ‘प्रेमम’। इसमें साई पल्लवी ने मलर नाम की एक तमिल कॉलेज लेक्चरर की भूमिका निभाई। मलर कोई परंपरागत फिल्मी हीरोइन नहीं थी। न उसके चेहरे पर चमकदार मेकअप था, न डिजाइनर कपड़ों की भरमार और न ही उसे हर समय कैमरे के सामने ख़ूबसूरत दिखने की कोशिश करते दिखाया गया।
उसके घुंघराले बाल थे, चेहरे पर स्वाभाविक बनावट थी और आंखों में एक अलग ही चमक। वह कॉलेज में पढ़ाती थी, विद्यार्थियों से सहजता से मिलती थी। साई पल्लवी ने मलर को सिर्फ अभिनय करके नहीं निभाया, बल्कि उस किरदार में ऐसी स्वाभाविकता भर दी कि दर्शक अभिनेत्री को भूलकर मलर को याद रखने लगे।
फिल्म के बाद साई पल्लवी का नाम पूरे दक्षिण भारतीय सिनेमा में फैल गया। ‘मलर’ उनकी पहचान बन गई। फिल्म का लोकप्रिय डांस और उनका सहज व्यक्तित्व भी चर्चा का विषय बना। ‘प्रेमम’ ने इस बात को रेखांकित किया कि मलर इसलिए दर्शकों से जुड़ती है क्योंकि वह खुद को किसी और के मुताबिक बदलने की कोशिश नहीं करती।
डॉक्टरी की पढ़ाई कर चुकीं साई पल्लवी कहती हैं कि उनके चेहरे पर होने वाली लालिमा को केवल पिम्पल या मुहांसे कहना सही नहीं है। उन्होंने अपनी त्वचा की स्थिति को रोसैशिया (Rosacea) बताया था। इसमें चेहरे पर लालिमा और संवेदनशीलता दिखाई दे सकती है। गर्मी, तनाव और कैमरे की तेज रोशनी में यह अधिक उभर सकती है।
जब उन्हें ‘प्रेमम’ के लिए चुना गया तो उन्होंने निर्देशक को अपने घुंघराले बालों और चेहरे के बारे में पहले ही बता दिया था।
निर्देशक भी साहसी था। उसने कहा कि वह जैसी हैं, वैसी ही रहें। निर्देशक को लगा कि उनके स्वाभाविक हावभाव और भावनाएं बिना मेकअप के ज्यादा अच्छी तरह उभरती हैं। गोरेपन की क्रीम बेचने वाली कंपनियां उनके पास करोड़ों के प्रस्ताव लेकर भी गईं कि हमारा एड कर दीजिए, लेकिन साई ने ना कर दिया।
ख़ूबसूरत दिखने की कोशिश में खुद को खो मत दीजिए।
-प्रहि

