नई दिल्ली। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार विनोद कापड़ी की चर्चित फिल्म ‘PYRE (चिता)’ अब भारतीय दर्शकों के बीच पहुंचने जा रही है। अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में लंबी और सराही गई यात्रा के बाद फिल्म 23 अक्टूबर 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म अब तक 18 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुकी है, जिनमें 15 बेस्ट फिल्म अवार्ड शामिल हैं।
80 साल के पदम सिंह और 70 साल की हीरा देवी की कहानी
भगीरथी फिल्म्स और मशकबीन स्टूडियोज के बैनर तले बनी ‘PYRE’ में उत्तराखंड के 80 वर्षीय पदम सिंह कापड़ी और 70 वर्षीय हीरा देवी मुख्य भूमिकाओं में हैं। दोनों गैर-पेशेवर कलाकार हैं और फिल्म में काम करने से पहले उन्होंने कभी कैमरे का सामना नहीं किया था।
कुमाऊं हिमालय के एक दूरस्थ गांव की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म एक बुजुर्ग दंपती की कहानी है, जिनकी दुनिया अपने घर, रिश्ते और एक-दूसरे के साथ तक सीमित है। गांवों से लगातार हो रहे पलायन और बेहतर अवसरों की तलाश में पहाड़ छोड़ती नई पीढ़ी के बीच फिल्म प्रेम, साथ, अकेलेपन और बदलती पहाड़ी जिंदगी को सामने लाती है।
उम्र, रिश्ते और पलायन की कहानी
‘PYRE’ उम्र बढ़ने, रिश्तों, अपनेपन और समय के गुजरने जैसे भावों को रोजमर्रा की जिंदगी के जरिए सामने रखती है। बदलती दुनिया के बीच दो लोग किस तरह अपने रिश्ते और अपनी छोटी-सी दुनिया को थामे रहते हैं, फिल्म इसी मानवीय एहसास को सादगी के साथ दिखाती है।
फिल्म के दोनों मुख्य कलाकार इसकी कहानी को अलग गहराई देते हैं। पदम सिंह कापड़ी सेवानिवृत्त सेना के जवान हैं, जबकि हीरा देवी विधवा और गृहिणी हैं और कभी नृत्य भी करती थीं। दोनों के पास पेशेवर अभिनय का कोई अनुभव नहीं था। उनके वास्तविक जीवन के अनुभव और कैमरे के सामने सहज मौजूदगी फिल्म को स्वाभाविकता प्रदान करती है।
टालिन से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय सफर
‘PYRE’ की अंतरराष्ट्रीय यात्रा 28वें टालिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल से शुरू हुई, जहां फिल्म को POFF Best Film Audience Award मिला। इसके बाद फिल्म को 49वें साओ पाउलो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, 44वें कैम्ब्रिज फिल्म फेस्टिवल, 35वें बाथ फिल्म फेस्टिवल, 43वें फज्र इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और 30वें केरल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल समेत कई प्रतिष्ठित समारोहों में प्रदर्शित किया गया।
फिल्म ने वॉशिंगटन डीसी, शिकागो, कनाडा, स्पेन, बोस्टन, स्टटगार्ट, लंदन और बर्मिंघम समेत कई जगहों पर बेस्ट फिल्म अवार्ड हासिल किए हैं। इसके अलावा सर्बिया और बोस्टन में बेस्ट डायरेक्टर सहित संगीत, छायांकन और ध्वनि के लिए भी फिल्म को सम्मान मिले हैं।
भारत में फिल्म का वितरण सिनेपोलिस करेगा।
विनोद कापड़ी ने कहा- यह मेरे लिए बेहद निजी कहानी
फिल्म के निर्देशक विनोद कापड़ी के मुताबिक, ‘PYRE’ उनके लिए प्रेम, साथ, पलायन और बढ़ती उम्र के साथ आने वाले शांत अकेलेपन की बेहद निजी कहानी है। उनका कहना है कि वह इस कहानी को दोनों मुख्य पात्रों के वास्तविक जीवन के अनुभवों के जरिए कहना चाहते थे।
कापड़ी के मुताबिक, पदम सिंह और हीरा देवी को फिल्म के लिए खोज पाना उनके लिए सबसे असाधारण अनुभवों में से एक था। दोनों ने पहले कभी अभिनय नहीं किया था, लेकिन उन्होंने पर्दे पर ऐसी सहजता और सच्चाई दिखाई, जिसे किसी पेशेवर कलाकार के साथ दोहरा पाना शायद संभव नहीं होता।
माइकल डैना का संगीत, गुलजार के गीत
फिल्म के संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित संगीतकार माइकल डैना ने तैयार किया है। डैना ‘लिटिल मिस सनशाइन’, ‘मानसून वेडिंग’, ‘लाइफ ऑफ पाई’ और ‘मनीबॉल’ जैसी फिल्मों के संगीत के लिए जाने जाते हैं। फिल्म के गीतों के बोल प्रसिद्ध कवि और गीतकार गुलजार ने लिखे हैं।
उत्तराखंड के पहाड़ों में पूरी तरह शूट की गई ‘PYRE’ अपने प्राकृतिक परिवेश, खामोशी और वहां के लोगों के जीवन के जरिए दो लोगों और उनके आसपास तेजी से बदलती दुनिया की एक मानवीय कहानी पेश करती है।
विनोद कापड़ी की पोस्ट-
Pyre ANNOUNCEMENT
“जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा, कुरेदते हो जो अब राख जुस्तुजू क्या है।”
-मिर्ज़ा ग़ालिब
दुनिया के अलग-अलग देशों में और भारत में PYRE देखने के बाद कई फिल्मकारों ने मुझसे एक बात हमेशा कही..
“विनोद, इस फिल्म को बनाने के बाद अगर तुम्हारी मृत्यु भी हो जाए, तो तुम्हें कोई अफसोस नहीं होना चाहिए। तुमने एक ऐसी कृति बनाई है, जो असाधारण है। शायद तुम भी दोबारा ऐसी फिल्म न बना पाओ।”
पिछले चार साल से PYRE बनाने की मेरी यात्रा सचमुच चिता पर बैठने जैसी रही है। सर्वस्व न्योछावर करने के बाद, सब कुछ.. सब कुछ मतलब सब कुछ गंवाने के बाद…अब मेरी ये चिता आपके सामने है और अब मृत्यु भी हो जाए तो कोई मलाल नहीं रहेगा।
शायद आपको यकीन न हो, लेकिन ये सच है कि मेरी माँ के नाम पर बनी इस फिल्म कंपनी भागीरथी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसके बैनर तले यह फिल्म बनी है, आज उसके खाते में सिर्फ़ ₹ 7,565 हैं और मेरे पास है तो बस यह फ़िल्म .. मेरी चिता.. PYRE
चार साल की मेहनत.. तन-मन-धन से मुझ पर भरोसा करने वाले साथी.. मेरी टीम का विश्वास.. मेरा सब कुछ.. आपके सामने रख रहा हूँ।
अब फैसला आपका है। PYRE (चिता) Releasing in cinemas on 23rd October 2026.
पंकज दसीला-
उत्तराखंड की मिट्टी से निकली प्रेम कहानी अब दुनिया के पर्दे पर
‘पायर’ का वर्ल्ड प्रीमियर यूरोप में!
उत्तराखंड के हिमालयी परिवेश में बुनी 80 वर्ष के दो बुजुर्गों की प्रेम कहानी अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छाप छोड़ने जा रही है।
ऑस्कर विजेता संगीतकार माइकल डैना के संगीत से सजी फिल्म ‘पायर’ का वर्ल्ड प्रीमियर यूरोप के प्रतिष्ठित 28वें टालिन ब्लैक नाइट्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में खास बात यह है कि इस साल टालिन में चुनी गई फिल्मों में ‘पायर’ अकेली भारतीय फिल्म बताई गई है।
फिल्म के निर्देशक #विनोदकापड़ी ने उत्तराखंड के पहाड़ों की पृष्ठभूमि में दो बुजुर्गों के प्रेम को बेहद संवेदनशील अंदाज में पर्दे पर उतारा है। फिल्म में मुख्य किरदार निभाने वाले दोनों बुजुर्ग कलाकारों ने इससे पहले कैमरा तक नहीं देखा था।
फिल्म के लिए गुलजार ने गीत लिखा है, जबकि संगीत माइकल डैना ने दिया है।
पहाड़ की सादगी, आमा-बुबू का प्रेम और रिश्तों की गहराई—अब दुनिया देखेगी उत्तराखंड की यह अनोखी कहानी।
23 अक्टूबर से ‘पायर’ आपके नजदीकी सिनेमाघरों में।
आमा-बुबू की अनसुनी प्रेम कहानी…… पत्रकार,लेखक, फिल्म निर्माता निर्देशक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता विनोद कापड़ी कुमाऊं के लाल की एक और दमदार प्रस्तुति मुख्यत: पलायन पर आधारित
आमा-बुबू की अनसुनी प्रेम कहानी… अब बड़े पर्दे पर!
उत्तराखंड के पहाड़ों में जन्मी एक ऐसी प्रेम कहानी, जो शायद हमारी-आपकी अपनी कहानी है…
PYRE (चिता) — सिर्फ़ एक फिल्म नहीं, बल्कि पहाड़ के उन आमा-बुबू की कहानी है, जिन्होंने पूरी जिंदगी एक-दूसरे का हाथ थामकर बिताई… और फिर एक दिन उनके बच्चे बेहतर भविष्य की तलाश में पहाड़ छोड़कर दूर शहरों और विदेशों में चले गए।
पीछे रह गया— सूना पहाड़ी घर, जीवनभर का साथ, पुरानी यादें और बच्चों के लौटने का इंतज़ार…
फिल्म में 80 वर्षीय पदम सिंह कापड़ी जी और 70 वर्षीय हीरा देवी जी ने आमा-बुबू का किरदार निभाया है। दोनों बलगड़ी, बेरीनाग, उत्तराखंड से हैं और गैर-पेशेवर कलाकार हैं। कैमरे के सामने अभिनय करने के बजाय उन्होंने जैसे अपने जीवन को ही पर्दे पर जी दिया।
शायद यही वजह है कि उनकी खामोशियां, उनका अपनापन और एक-दूसरे के प्रति उनका रिश्ता दिल को छू जाता है।
PYRE की पूरी शूटिंग कुमाऊँ हिमालय में हुई है। फिल्म की अंतरराष्ट्रीय यात्रा Tallinn Black Nights Film Festival से शुरू हुई और यह कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित हो चुकी है। फिल्म अब तक 18 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, जिनमें 15 Best Film Awards शामिल हैं, जीत चुकी है।
संगीत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध संगीतकार Mychael Danna ने दिया है और गीतों के बोल गुलज़ार साहब ने लिखे हैं। लेकिन हमारे लिए PYRE सिर्फ़ एक फिल्म नहीं…
यह हमारे पहाड़ की कहानी है। यह हमारे आमा-बुबू की कहानी है। यह हमारे घरों की कहानी है। और यह उस इंतज़ार की कहानी है, जिसे आज भी पहाड़ के कितने ही माता-पिता जी रहे हैं।
PYRE (चिता) 23 अक्टूबर 2026 से आपके नज़दीकी सिनेमाघरों में। इस बार सिनेमाघर जाइए तो इसे सिर्फ़ एक फिल्म समझकर नहीं… अपने पहाड़, अपनी मिट्टी और अपने आमा-बुबू की कहानी समझकर देखिए।
आमा-बुबू की इस soulful love story को जरूर देखिए और अपने दोस्तों, परिजनों एवं इष्ट-मित्रों तक भी पहुंचाइए। Share करें… ताकि पहाड़ की यह कहानी दूर-दूर तक पहुंचे।


